Harsh Firing Case in Sultanpur: जयसिंहपुर थाना क्षेत्र में तिलक समारोह के नाम पर जो कुछ हुआ, वह उत्सव नहीं बल्कि कानून को खुली चुनौती थी। शादी-ब्याह के मौके पर खुशियां मनाने की परंपरा है, लेकिन जब वही खुशियां गोलियों की तड़तड़ाहट में बदल जाएं, तो सवाल सिर्फ शोर का नहीं, सोच का हो जाता है। 30 राउंड से ज्यादा फायरिंग… वो भी उस दौर में, जब हर्ष फायरिंग पर सख्त पाबंदी है। यह कोई गलती नहीं, यह दंभ है कानून से ऊपर होने का दंभ।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, और यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा आईना है। क्योंकि अब अपराध सिर्फ किया नहीं जाता, उसे रिकॉर्ड भी किया जाता है। शायद यह मान लिया गया है कि कैमरे के सामने अपराध करने से डर खत्म हो चुका है। लेकिन यहीं पर प्रशासन का जवाब भी सामने आया। सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने साफ कहा कि मामला संज्ञान में है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। यानी संदेश स्पष्ट है हर्ष फायरिंग कोई शान नहीं, सीधा जेल का रास्ता है।
अब ज़रा सोचिए, जिन हाथों में तिलक की थाली होनी चाहिए थी, उन्हीं हाथों में अवैध हथियार थे। जिन घरों में मंगल गीत गूंजने चाहिए थे, वहां गोलियों की आवाज़ से पूरा इलाका दहल उठा। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, यह उस मानसिकता का सवाल है, जहां बंदूक को स्टेटस सिंबल समझ लिया गया है। मानो बिना फायरिंग के शादी अधूरी रह जाएगी।
और यहीं पर कटाक्ष खुद-ब-खुद निकलता है जो लोग खुद को समाज का सिरमौर समझते हैं, वही समाज को खतरे में डाल रहे हैं। जिन्हें लगता है कि रसूख के दम पर सब मैनेज हो जाएगा, उन्हें शायद यह नहीं पता कि वीडियो वायरल होने के बाद कानून और सख्त हो जाता है, नरम नहीं।
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इसी बीच एक और कड़वा सच सामने आता है। मुख्य पोक्सो कोर्ट ने एक अन्य मामले में 5 आरोपियों को दोषी ठहराया है, ट्रायल के दौरान एक अभियुक्त की मौत हो चुकी है। यानी अपराध चाहे किसी भी रूप में हो—हर्ष फायरिंग हो या जघन्य अपराध—अंजाम आखिरकार कानून ही तय करता है। देर हो सकती है, लेकिन फैसला होता है।
यह वक्त है सोचने का। तिलक समारोह हो या कोई भी सामाजिक कार्यक्रम, कानून को ताक पर रखकर की गई हर ‘हर्ष फायरिंग’ असल में समाज के लिए मातम का न्योता है। क्योंकि अगली गोली किसे लगेगी, यह कोई नहीं जानता। और तब पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता न शान, न रुतबा, न ही सोशल मीडिया की तालियां।
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