Hardik Pandya century : क्रिकेट में कुछ पारियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ स्कोरकार्ड नहीं बदलतीं, बल्कि माहौल, आत्मविश्वास और खिलाड़ी की कहानी भी बदल देती हैं। हार्दिक पंड्या की यह पारी भी कुछ ऐसी ही रही। जब वह 62 गेंदों में 66 रन पर थे, तब यह पारी एक साधारण, जिम्मेदार लेकिन धीमी पारी लग रही थी। मैदान पर टिके रहना जरूरी था, रन रेट संभालना था और टीम को संकट से निकालना था। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने दर्शकों को खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। हार्दिक ने अगले सिर्फ 6 गेंदों में 34 रन ठोक दिए,
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पांच छक्के
एक चौका
और इस तरह 68 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह सिर्फ शतक नहीं था, यह एक बयान था। जब पारी बदली, मैच पलटा 62 गेंदों तक हार्दिक पंड्या बेहद संयम में दिखे। स्ट्राइक रोटेट करना, खराब गेंद का इंतजार करना और विकेट बचाना यह उनकी रणनीति साफ दिख रही थी। विपक्षी टीम को लग रहा था कि उन्होंने हार्दिक को बांध लिया है। लेकिन क्रिकेट में अक्सर यही सबसे बड़ी भूल होती है। जैसे ही आखिरी ओवरों में गेंदबाजों ने जरा भी चूक की, हार्दिक ने अपने असली रंग दिखा दिए। लंबे-लंबे छक्के, गेंदबाजों पर दबाव और फील्डिंग साइड में अफरा-तफरी छह गेंदों का यह तूफान पूरे मैच की दिशा बदल गया।
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यह वही हार्दिक पंड्या थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि “अगर वह अंत तक टिक जाएं, तो कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं।‘ पांच छक्के और एक चौका: सिर्फ ताकत नहीं, टाइमिंग भी इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि यह सिर्फ ताकत के दम पर नहीं थी। हर शॉट में सही फुटवर्क गेंद की लेंथ की पहचान और बेहतरीन टाइमिंग दिखाई दी।
पांचों छक्के अलग-अलग एरिया में गए। कहीं लॉन्ग ऑन के ऊपर, कहीं कवर के बाहर, तो कहीं स्क्वायर लेग के पार। यह विविधता बताती है कि हार्दिक सिर्फ हिटर नहीं, अब पूरी तरह मैच रीड करने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। आलोचनाओं के बाद जवाब: बल्ले से पिछले कुछ समय से हार्दिक पंड्या को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कभी फॉर्म पर सवाल, कभी कप्तानी को लेकर बहस,तो कभी फिटनेस पर चर्चाएं।
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लेकिन क्रिकेट में सबसे बड़ा जवाब हमेशा बल्ला देता है। और इस पारी में हार्दिक ने वही किया। 62 गेंदों की धैर्यपूर्ण पारी यह दिखाती है कि वह हालात के हिसाब से खेलना जानते हैं, जबकि आखिरी 6 गेंदों का विस्फोट यह साबित करता है कि उनकी एक्सप्लोसिव नेचर कहीं गई नहीं है। टीम के लिए इस पारी का मतलब, इस शतक ने सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बढ़ाया, बल्कि टीम को भी मजबूती दी। लोअर ऑर्डर पर दबाव कम हुआ, टीम का स्कोर सम्मानजनक से खतरनाक बन गया
विपक्षी गेंदबाजों का मनोबल टूटा
ऐसी पारियां ड्रेसिंग रूम में भरोसा पैदा करती हैं। जब टीम जानती है कि आखिरी ओवरों में हार्दिक जैसा खिलाड़ी मौजूद है, तो रणनीति अपने आप मजबूत हो जाती है।
हार्दिक पंड्या और ‘फिनिशर DNA’
हार्दिक पंड्या की पहचान हमेशा से एक फिनिशर की रही है। लेकिन इस पारी में उन्होंने फिनिशर के साथ-साथ एंकर की भूमिका भी निभाई। पहले टिके फिर मैच खत्म किया यही बड़े खिलाड़ियों की पहचान होती है। यही वजह है कि कप्तान और टीम मैनेजमेंट मुश्किल हालात में उन पर भरोसा करते हैं।
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आंकड़ों से आगे की कहानी
अगर सिर्फ आंकड़ों पर नजर डालें तो यह शतक शानदार है। लेकिन इसके पीछे की कहानी और भी बड़ी है, मानसिक मजबूती आलोचनाओं से ऊपर उठने का जज़्बा और सही समय पर गियर बदलने की क्षमता ये वो चीजें हैं जो अच्छे खिलाड़ी को महान बनाती हैं।‘हार्दिक के आजकल दिन चल रहे हैं’ क्रिकेट की भाषा में कहा जाए तो सच में हार्दिक पंड्या के दिन चल रहे हैं। बल्ला भी चल रहा है, आत्मविश्वास भी और मैच पर असर भी। यह पारी आने वाले मुकाबलों के लिए एक साफ संकेत है हार्दिक फॉर्म में हैं हार्दिक आत्मविश्वास से भरे हैं और हार्दिक अभी बहुत कुछ दिखाने वाले हैं
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अगर यही लय बनी रही, तो यह शतक सिर्फ शुरुआत साबित हो सकता है। 62 गेंदों में 66 रन से लेकर 68 गेंदों में शतक तक का सफर सिर्फ 6 गेंदों में तय हुआ, लेकिन उसका असर लंबे समय तक रहेगा। यह पारी याद दिलाती है कि क्यों हार्दिक पंड्या आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विनर्स में गिने जाते हैं।
