India batting Kumble criticism: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चल रहे दूसरे टेस्ट में भारत की पहली पारी का प्रदर्शन क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों दोनों के लिए निराशाजनक रहा। पूर्व भारतीय कप्तान और महान स्पिनर अनिल कुंबले ने भारतीय बल्लेबाज़ों की मानसिकता और रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारतीय बल्लेबाजों में न तो टेस्ट क्रिकेट के अनुरूप धैर्य दिखा और न ही विपक्षी गेंदबाज़ों के सामने जुझारूपन।
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भारत पहली पारी में सिर्फ 201 रन बनाकर ढेर हो गया, जबकि दक्षिण अफ्रीका पहले ही 314 रन की मजबूत बढ़त बना चुकी थी। इस मंच पर कुंबले ने कहा कि भारत की बल्लेबाज़ी बेहद कमजोर और अव्यवस्थित रही। उनके शब्दों में, ‘भारत की बल्लेबाज़ी काफी खराब रही। टेस्ट मैच में जो धैर्य और मानसिक दृढ़ता चाहिए, वह नज़र नहीं आई। बल्लेबाज ऐसे खेल रहे थे मानो जल्द से जल्द रन बना लेने हों, जबकि टेस्ट क्रिकेट में बड़े स्कोर धीरे-धीरे और सत्र दर सत्र जमा किए जाते हैं।‘
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उन्होंने यह बात भी रेखांकित की कि जब दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज़, ख़ासकर मार्को जानसन, उछाल और गति के संयोजन से कठिन स्पेल डाल रहे थे, तब भारतीय बल्लेबाजों ने उन ओवरों को निकालने का प्रयास ही नहीं किया।
तेज़ शुरुआत के बाद ध्वस्त टॉप ऑर्डर
भारत की शुरुआत कुछ हद तक संतोषजनक रही थी। टीम ने 95/1 तक स्थिति संभाली हुई थी, लेकिन इसके बाद मानो विकेटों की झड़ी लग गई। कुछ ही ओवरों में भारत की स्थिति 122/7 हो गई। कुंबले के अनुसार, ‘यशस्वी और राहुल के आउट होने के बाद शॉट चयन लापरवाह हो गया। बल्लेबाज न तो गेंद को समझ रहे थे और न ही परिस्थिति के अनुरूप अपनी रणनीति बदल रहे थे।‘ उन्होंने खासतौर पर साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल औरऋषभ पंत की लगातार गिरती विकेटों को ‘ब्रेन फेड’ करार दिया।
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मार्को जानसन का घातक स्पेल
बाएं हाथ के तेज गेंदबाज़ मार्को जानसन ने 6 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाज़ी की कमज़ोरी पूरी तरह उजागर कर दी। कुंबले बोले ‘जानसन ने उत्कृष्ट लंबाई पर गेंदबाज़ी की। उनकी बाउंसर गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाज़ों में न गेंद छोड़ने का संयम दिखा और न ही साहस। टेस्ट क्रिकेट में तेज और उछालभरी गेंदों को झेलना बल्लेबाज़ी का अहम हिस्सा होता है। लेकिन भारत की टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ी इसमें असफल रही।
नीचे के क्रम की लड़ाई, सुंदर और कुलदीप की साझेदारी
चौंकाने वाली बात यह रही कि जहां शीर्ष क्रम के लाजवाब बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए, वहीं वॉशिंगटन सुंदर और कुलदीप यादव ने 72 रन की साझेदारी कर यह दिखा दिया कि धैर्य और तकनीक साथ हो तो रन बनाना संभव है। कुंबले ने भी इस साझेदारी की प्रशंसा करते कहा, ‘नीचले क्रम ने वह जज्बा दिखाया जिसकी उम्मीद उपरी क्रम से थी। अगर टॉप ऑर्डर ने इसी मानसिकता से खेला होता, तो भारत की स्थिति इतनी खराब नहीं होती।‘
दक्षिण अफ्रीका की रणनीति और दबदबा
कुंबले ने दक्षिण अफ्रीका की रणनीति को भी सराहा, ‘साउथ अफ्रीका की टीम बेहद अनुशासित रही। मुथुसामी का चयन भी सही साबित हुआ स्पिनर होकर भी उन्होंने शतक जड़ा, जिससे मैच का रुख पलट गया। दक्षिण अफ्रीका पहले ही तीन दिनों तक मैच पर हावी रही, और दो दिन शेष रहते हुए 325 रन की बढ़त से वे प्रभावी स्थिति में हैं। भारत के सामने यह टेस्ट मैच अब लड़ाई से ज्यादा सम्मान बचाने की चुनौती बन चुका है। कुंबले ने अपने बयान में साफ कहा कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्य, सम्मान और परिस्थिति की समझ बुनियादी आधार हैं, और भारत उन्हीं में विफल रहा।
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