India vs Pakistan no handshake: भारत और पाकिस्तान के बीच T20 World Cup 2026 के कोलंबो मुकाबले में टॉस के दौरान एक बार फिर सामान्य प्री-मैच शिष्टाचार नहीं दिखा। India vs Pakistan no handshake की घटना तब सामने आई जब भारत के कप्तान सूर्याकुमार यादव ने टॉस की औपचारिकताएं जल्दी पूरी कीं और पाकिस्तान कप्तान सलमान अली आगा के साथ हैंडशेक नहीं किया। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनने का फैसला किया।
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यह मामला सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं माना जा रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों टीमों के बीच जो दूरी पिछले साल एशिया कप के दौरान दिखी थी, वही रुख इस वर्ल्ड कप मैच में भी जारी रहा। साथ ही, इस पर भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ के कुछ पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
टॉस पर क्या हुआ, और क्यों चर्चा बढ़ी? India vs Pakistan
टॉस के समय सूर्याकुमार यादव गंभीर नजर आए। टीम शीट सौंपने और कुछ औपचारिक बातचीत के बाद उन्होंने हैंडशेक नहीं किया। इसे लेकर यह संकेत भी दिया गया कि फैसला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की “नीति” का हिस्सा हो सकता है। भारत की तरफ से पहले भी ऐसे मौकों पर “केवल मैच के दायरे में प्रतिस्पर्धा” वाली लाइन दिखाई देती रही है।
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इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि मैच से पहले इस मुद्दे पर क्रिकेट बोर्ड स्तर की चर्चाएं हुई थीं और यह एक संवेदनशील स्टिकिंग पॉइंट रहा।
एशिया कप के बाद बढ़ी दूरी India vs Pakistan
खास बात यह है कि भारत-पाक मैचों में माहौल अक्सर हाई-टेंशन रहता है, लेकिन टॉस/मैच के पहले “हैंडशेक” जैसी परंपराएं लंबे समय से खेल की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा रही हैं। फिर भी, पिछले साल एशिया कप के दौरान दोनों टीमों के बीच जो ठंडापन देखा गया, उसके बाद से यह विषय बार-बार चर्चा में रहा। इसी क्रम में, कोलंबो के मुकाबले में भी वही पैटर्न दोहराया गया।
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वहीं दूसरी ओर, यह भी सच है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट लंबे समय से बंद है और दोनों टीमें आमतौर पर ICC/ACC जैसे बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में ही आमने-सामने आती हैं। ऐसे में हर छोटी-बड़ी घटना ज्यादा तेजी से सुर्खियां बनती है।
क्यों जोड़ा जा रहा है बड़ा संदेश? India vs Pakistan
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की तरफ से मैच से पहले यह बात कही गई थी कि हैंडशेक का फैसला भारत की तरफ से आएगा। इसके बाद टॉस पर जो हुआ, उसे कई लोग “स्पष्ट संकेत” मान रहे हैं कि दोनों टीमों के बीच संबंध सिर्फ व्हाइट लाइन के भीतर तक सीमित रखे जा रहे हैं।
इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह अनुमान भी जताया गया कि यह निर्देश ऊपर से आया हो सकता है हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई। Google News जैसी पॉलिसी के लिहाज से यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि अनुमान को तथ्य की तरह पेश न किया जाए, इसलिए इसे रिपोर्टेड संदर्भ में ही देखा जा रहा है।
मैदान से बाहर भी दिखी दूरी India vs Pakistan
इसी क्रम में एक और बात नोट की गई मैच के आसपास कई पूर्व कप्तान दिग्गज मौजूद थे, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, आपसी मिलना-जुलना सीमित रहा। यानी ठंडापन सिर्फ कप्तानों तक नहीं, पूरे माहौल में झलकता दिखा। साथ ही, दर्शकों और सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं कुछ लोग इसे “रुख की निरंतरता” मान रहे हैं, तो कुछ इसे खेल भावना से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
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आलोचना भी, समर्थन भी India vs Pakistan no handshake
खास बात यह है कि भारत में भी इस फैसले पर एकराय नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व क्रिकेटर कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने इसे अनावश्यक बताते हुए खेल की भावना का सवाल उठाया। उनका तर्क यह रहा कि या तो खेल भावना के साथ खेलें, या फिर न खेलें यानी प्रतीकात्मक कदमों से बचना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कुछ वर्ग इसे परिस्थितियों के अनुरूप कदम मानते हैं और कहते हैं कि जब रिश्ते सामान्य नहीं हैं, तो औपचारिक शिष्टाचार भी टीम नीति के दायरे में आ सकता है। यहां भी ध्यान देने वाली बात यही है कि ये राय हैं, फैसले का आधिकारिक कारण नहीं।
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टीम बदलाव और आगे का असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी, जबकि भारत ने पहले बल्लेबाजी में संतोष जताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव हुए, जिनमें एक बल्लेबाज की वापसी और गेंदबाजी विकल्प में बदलाव जैसी बातें शामिल रहीं। इसके अलावा, हाल के दिनों में हैंडशेक प्रोटोकॉल और मैच खेलने बॉयकॉट जैसी चर्चाएं भी खबरों में रही हैं, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया।
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ICC या टूर्नामेंट प्रोटोकॉल पर पड़ेगा असर?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक मैच तक सीमित रहेगा या आगे भी भारत-पाक मैचों में यही “नो-हैंडशेक” रुख दिखाई देगा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर यही संकेत है कि यह एक निरंतर नीति की तरह देखा जा रहा है, लेकिन ICC की ओर से इस पर कोई अलग “अनिवार्य” गाइडलाइन सामने आई है ऐसा स्पष्ट रूप से रिपोर्ट नहीं किया गया।
इसके अलावा, टूर्नामेंट के बाकी मैचों में खिलाड़ियों का व्यवहार, पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन और ऑन-फील्ड इंटरैक्शन भी नजर में रहेगा क्योंकि ऐसी घटनाएं अक्सर आगे के प्रोटोकॉल और माहौल दोनों पर असर डालती हैं।
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