Ranji Trophy 2025-26: भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 1959-60 में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेलने उतरी जम्मू-कश्मीर की टीम ने 67 साल बाद वह कर दिखाया, जिसका इंतजार पीढ़ियां करती रहीं। Ranji Trophy 2025-26 के फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने मजबूत मानी जा रही कर्नाटक को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर अपना पहला खिताब जीत लिया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि राज्य के क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम क्षण के रूप में दर्ज हो गई है।
पहली पारी में ही रख दी जीत की नींव
Ranji Trophy 2025-26 फाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने टॉस के बाद बल्लेबाजी करते हुए धैर्य और अनुशासन का बेहतरीन प्रदर्शन किया। टीम ने पहली पारी में 584 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। शीर्ष क्रम से लेकर मध्यक्रम तक बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी निभाई और कर्नाटक के गेंदबाजों को लंबे समय तक मैदान में दौड़ाया।
साउथ अफ्रीका से करारी हार के बाद टीम इंडिया के सामने मुश्किल चुनौती
जवाब में कर्नाटक की टीम दबाव में बिखर गई और 293 रन पर सिमट गई। पहली पारी में मिली 291 रन की बढ़त ने मैच का रुख लगभग तय कर दिया। रणजी ट्रॉफी के नियमों के मुताबिक यदि फाइनल ड्रॉ होता है तो पहली पारी की बढ़त के आधार पर विजेता घोषित किया जाता है। यही बढ़त अंततः जम्मू-कश्मीर के लिए निर्णायक साबित हुई।
दूसरी पारी में भी बरकरार रहा दबदबा
दूसरी पारी में भी जम्मू-कश्मीर के बल्लेबाजों ने आक्रामकता और संयम का संतुलन बनाए रखा। कामरान इकबाल ने 160 रन की शानदार पारी खेलकर टीम की स्थिति और मजबूत कर दी। उनके साथ साहिल ने भी शतक जड़ते हुए कर्नाटक की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। दूसरी पारी के बाद कुल बढ़त 630 रन से अधिक हो चुकी थी।
Ranji Trophy 2025-26 मैच के अंतिम चरण में जब ड्रॉ तय लग रहा था, तब भी जम्मू-कश्मीर की टीम पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी नजर आई। ड्रॉ के साथ ही पहली पारी की बढ़त के आधार पर उसे विजेता घोषित किया गया और खिलाड़ी मैदान पर जश्न में डूब गए।
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पहली बार फाइनल, पहली बार खिताब
जम्मू-कश्मीर ने अपने रणजी इतिहास में पहली बार फाइनल में जगह बनाई थी और उसी मौके को यादगार बना दिया। इससे पहले टीम का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा था। 1982-83 में उसे पहली जीत मिली थी, लेकिन खिताब तक पहुंचने का सपना अधूरा ही रहा। इस बार टीम ने पूरे सीजन में निरंतर प्रदर्शन किया और बड़े मुकाबलों में भी संयम नहीं खोया।
राज्य के मुख्यमंत्री Omar Abdullah फाइनल के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहे। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और कहा कि यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों के बावजूद इस उपलब्धि ने दिखा दिया कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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आकिब नबी बने जीत के नायक
इस ऐतिहासिक अभियान में तेज गेंदबाज आकिब नबी का योगदान सबसे अहम रहा। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 60 विकेट लेकर खुद को सबसे सफल गेंदबाज के रूप में स्थापित किया। फाइनल की पहली पारी में उनके पांच विकेट ने कर्नाटक की कमर तोड़ दी। सेमीफाइनल में उन्होंने नौ विकेट लेकर टीम को जीत दिलाई थी, जबकि क्वार्टर फाइनल में 12 विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया था।
उनकी सटीक लाइन-लेंथ और रफ्तार ने विरोधी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आकिब नबी का यह प्रदर्शन भविष्य में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिला सकता है।
घरेलू क्रिकेट में नई उम्मीद
यह Ranji Trophy 2025-26 जीत केवल एक सीजन की सफलता नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट ढांचे की मजबूती का संकेत भी है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षण ढांचे में सुधार हुआ है। युवा खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग और प्रतियोगी माहौल मिला है, जिसका परिणाम अब सामने आया है।
Ranji Trophy 2025-26 में यह ऐतिहासिक जीत बताती है कि भारतीय घरेलू क्रिकेट में अब पारंपरिक दिग्गजों के साथ नए दावेदार भी मजबूती से उभर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं को क्रिकेट की ओर प्रेरित करेगी।
67 साल का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। ट्रॉफी के साथ उठती हुई टीम की तस्वीरें यह साबित करती हैं कि संघर्ष और धैर्य का फल मीठा ही होता है। भारतीय क्रिकेट के नक्शे पर अब जम्मू-कश्मीर का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है।
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