Driving Tips in Fog: सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत के कई राज्यों खासतौर पर यूपी, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में घनी धुंध एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन जाती है। सुबह तड़के और देर रात के समय विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि ड्राइवर को कुछ मीटर आगे तक भी साफ दिखाई नहीं देता। ऐसे हालात में जरा-सी लापरवाही बड़े हादसे में बदल सकती है। इसी वजह से यह जानना बेहद जरूरी है कि धुंध में कार चलाते समय सफेद (White) लाइट बेहतर है या पीली (Yellow) लाइट, और किस तरह की ड्राइविंग आदतें आपको सुरक्षित रख सकती हैं।
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धुंध में विजिबिलिटी क्यों घट जाती है?
धुंध असल में हवा में मौजूद बेहद बारीक पानी के कणों का समूह होती है। जब हेडलाइट की रोशनी इन कणों से टकराती है, तो वह सीधे सड़क तक पहुंचने के बजाय अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती है। इस प्रक्रिया को लाइट स्कैटरिंग कहा जाता है। जितनी ज्यादा स्कैटरिंग होगी, ड्राइवर को उतना ही कम साफ दिखाई देगा।

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धुंध में सफेद LED लाइट क्यों नहीं होती असरदार?
आजकल ज्यादातर नई कारों में LED हेडलाइट्स दी जाती हैं, जिनकी रोशनी सफेद होती है। इनका कलर टेंपरेचर आमतौर पर 5000 से 6500 केल्विन के बीच होता है। देखने में ये लाइट्स काफी तेज और आकर्षक लगती हैं, लेकिन धुंध में यही चमक परेशानी बन जाती है।
- सफेद रोशनी की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) कम होती है
- कम तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी धुंध के कणों से टकराकर ज्यादा बिखरती है
- रोशनी सड़क तक पहुंचने के बजाय वापस ड्राइवर की आंखों की ओर रिफ्लेक्ट होती है
- नतीजा: सामने का रास्ता और भी ज्यादा धुंधला नजर आता है
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इसके अलावा, सफेद LED लाइट की तेज चमक सामने से आ रहे वाहन के ड्राइवर की आंखों पर भी जोर डालती है। इससे ग्लेयर (चकाचौंध) बढ़ता है और दुर्घटना का खतरा और ज्यादा हो जाता है।
पीली लाइट क्यों देती है बेहतर विजिबिलिटी?
पीली लाइट आमतौर पर हेलोजन बल्ब या येलो फॉग लैंप में देखने को मिलती है। इसका कलर टेंपरेचर करीब 2700 से 3000 केल्विन होता है। यही वजह है कि यह धुंध में ज्यादा कारगर साबित होती है।
- पीली रोशनी की तरंगदैर्ध्य ज्यादा होती है
- यह धुंध के कणों में कम बिखरती है
- सड़क की सतह तक अपेक्षाकृत ज्यादा सीधी रोशनी पहुंचती है
- आंखों पर कम दबाव पड़ता है और कंट्रास्ट बेहतर दिखता है
इसी कारण घनी धुंध में पीली फॉग लाइट या हेलोजन लाइट ड्राइवर को ज्यादा सुरक्षित महसूस कराती है और सामने का रास्ता थोड़ा ज्यादा साफ नजर आता है।
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क्या पीली लाइट की भी कोई सीमाएं हैं?
हां, पीली लाइट हर समस्या का समाधान नहीं है। इसकी कुछ सीमाएं भी हैं:
- इसकी रेंज कम होती है, यानी बहुत दूर तक रोशनी नहीं जाती
- हाई-स्पीड ड्राइविंग के लिए यह पर्याप्त नहीं होती
- सिर्फ लाइट बदल लेने से जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता
इसलिए धुंध में सुरक्षा के लिए लाइट के साथ-साथ ड्राइविंग व्यवहार भी उतना ही अहम है।
धुंध में सुरक्षित ड्राइविंग के जरूरी टिप्स
धुंध में ड्राइव करते समय नीचे दिए गए टिप्स आपकी और दूसरों की जान बचा सकते हैं:
- हाई बीम का इस्तेमाल न करें
हाई बीम से रोशनी ज्यादा रिफ्लेक्ट होती है और विजिबिलिटी और खराब हो जाती है। - फॉग लैंप या पीली लाइट का प्रयोग करें
अगर आपकी कार में फॉग लैंप हैं तो उन्हें जरूर ऑन रखें। - रफ्तार कम रखें
धुंध में तेज रफ्तार सबसे बड़ा दुश्मन है। जितनी कम स्पीड, उतना ज्यादा कंट्रोल। - सुरक्षित दूरी बनाए रखें
आगे चल रहे वाहन से सामान्य से दोगुनी दूरी रखें, ताकि अचानक ब्रेक लगाने पर समय मिल सके। - लेन बदलने से बचें
बार-बार लेन बदलना धुंध में बेहद जोखिम भरा होता है। - इंडिकेटर और डिपर का सही इस्तेमाल करें
ओवरटेक या मोड़ पर समय से संकेत दें, ताकि दूसरे ड्राइवर सतर्क हो सकें। - इमरजेंसी लाइट का गलत इस्तेमाल न करें
चलते वाहन में हैज़र्ड लाइट जलाने से पीछे आने वाले ड्राइवर कन्फ्यूज हो सकते हैं
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धुंध में ड्राइविंग के लिए पीली लाइट सफेद LED लाइट की तुलना में ज्यादा बेहतर विजिबिलिटी देती है, लेकिन केवल लाइट पर निर्भर रहना काफी नहीं है। सही स्पीड, सुरक्षित दूरी और सतर्क ड्राइविंग ही असली सुरक्षा कवच है। याद रखें, धुंध में कुछ मिनट जल्दी पहुंचने से बेहतर है सुरक्षित पहुंचना।
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