Skip to content
By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
TV Today BharatTV Today BharatTV Today Bharat
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • राज्य-शहर
    • उत्तर प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • झारखंड
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • जम्मू-कश्मीर
    • दिल्ली
  • ताजा खबर
  • क्राइम
  • राष्ट्रीय
  • खेल
  • इंटरनेशनल न्यूज़
  • बिज़नेस
  • आस्था
  • हेल्थ
  • टेक्नोलॉजी
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • मनोरंजन
Reading: Holi 2026: गुझिया की असली कहानी क्या है? भारतीय परंपरा, मुगल प्रभाव और स्वाद का संगम
Share
Font ResizerAa
TV Today BharatTV Today Bharat
Search
  • होम
  • राज्य-शहर
    • उत्तर प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • झारखंड
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • जम्मू-कश्मीर
    • दिल्ली
  • ताजा खबर
  • क्राइम
  • राष्ट्रीय
  • खेल
  • इंटरनेशनल न्यूज़
  • बिज़नेस
  • आस्था
  • हेल्थ
  • टेक्नोलॉजी
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • मनोरंजन
Follow US

Home - Holi 2026: गुझिया की असली कहानी क्या है? भारतीय परंपरा, मुगल प्रभाव और स्वाद का संगम

Lifestyle

Holi 2026: गुझिया की असली कहानी क्या है? भारतीय परंपरा, मुगल प्रभाव और स्वाद का संगम

रंगों के संग इतिहास की मिठास—होली 2026 पर गुझिया की कहानी फिर हुई खास

Last updated: फ़रवरी 28, 2026 2:20 अपराह्न
Chhoti Published फ़रवरी 28, 2026
Share
SHARE
Highlights
  • गुझिया की जड़ें प्राचीन भारतीय मिठाइयों और ‘शष्कुली’ से जुड़ी मानी जाती हैं
  • K. T. Achaya की पुस्तक Indian Food: A Historical Companion में ऐतिहासिक उल्लेख
  • मुगलकाल में मावा और मेवों के बढ़ते उपयोग से स्वाद में आया बदलाव
  • Samosa और Baklava से जोड़ा जाता है सांस्कृतिक प्रभाव
  • देशभर में करंजी, कज्जीकायलू, घुघरा जैसे अलग-अलग नामों से लोकप्रिय

Holi 2026: Holi 2026 की तैयारियां शुरू होते ही एक बार फिर रसोई घरों में गुझिया की खुशबू तैरने लगी है. रंगों के इस त्योहार पर अगर कोई मिठाई सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है तो वह गुझिया ही है. उत्तर से लेकर दक्षिण तक, हर घर में इसकी अलग शैली और स्वाद देखने को मिलता है. लेकिन सवाल आज भी कायम है- क्या Gujiya पूरी तरह भारतीय है या इसके स्वाद में मुगलकाल की भी छाप है?

सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा व्यंजन

भारतीय खानपान का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है. प्राचीन ग्रंथों में तले हुए मीठे पकवानों का उल्लेख मिलता है, जिनमें आटे और गुड़ या शहद का इस्तेमाल होता था. खाद्य इतिहासकारों के अनुसार, गुझिया का मूल स्वरूप ऐसे ही व्यंजनों से विकसित हुआ. कई विद्वान इसे ‘शष्कुली’ नामक प्राचीन मिठाई से जोड़ते हैं, जो मैदे से बनती थी और तली जाती थी.

READ MORE: मुंबई एयरपोर्ट पर तान्या मित्तल का एलिगेंट अंदाज

खानपान के इतिहास पर शोध करने वाले विद्वानों ने इस बात की ओर इशारा किया है कि 12वीं से 14वीं शताब्दी के बीच भरावन वाली मिठाइयों का चलन बढ़ा. प्रसिद्ध खाद्य इतिहासकार K. T. Achaya ने अपनी पुस्तक Indian Food: A Historical Companion में उल्लेख किया है कि भारतीय व्यंजनों में समय के साथ बाहरी प्रभाव जुड़े, लेकिन उनकी जड़ें स्थानीय परंपराओं में ही रहीं.

मुगलों से जुड़ा कनेक्शन कितना मजबूत?

जब भी भरवां और तली हुई चीजों की बात होती है, तो मुगलकाल का जिक्र सामने आता है. दरअसल, मध्य एशिया से आया Samosa भारतीय रसोई में मुगलों के दौर में लोकप्रिय हुआ. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि मीठी गुझिया संभवतः इसी अवधारणा से प्रेरित रही होगी.

ALSO READ: 50वें जन्मदिन पर ऐश्वर्या राय का खास संदेश, अभिषेक बच्चन को कहा ‘बेबी पापा’

मुगलकाल में शाही रसोई में मावा, मेवे और केसर का भरपूर इस्तेमाल होता था. इसी दौर में मिठाइयों में समृद्ध भरावन का चलन बढ़ा. तुर्की और फारस की मिठाई Baklava में भी आटे की परतों के बीच मेवा भरा जाता है. यही कारण है कि कई लोग गुझिया को भारतीय और मध्य एशियाई पाक परंपराओं का मिश्रण मानते हैं.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गुझिया को पूरी तरह मुगलई कहना सही नहीं होगा. इसका अर्धचंद्राकार आकार, किनारों पर की जाने वाली विशेष कारीगरी और त्योहारों से जुड़ी परंपरा इसे विशुद्ध भारतीय पहचान देती है. संभव है कि मुगलकाल में इसके स्वाद और भरावन में बदलाव आया हो, लेकिन इसकी मूल अवधारणा पहले से मौजूद थी.

ALSO READ: 5 रंगों में दिखी भक्ति, संगीत और संस्कृति की नई प्रस्तुति

अलग-अलग राज्यों में बदला नाम और स्वाद

भारत की विविधता Gujiya के रूपों में साफ झलकती है. उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे गुझिया या पेड़किया कहा जाता है. महाराष्ट्र में ‘करंजी’ के नाम से यह दिवाली और होली दोनों में बनती है. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ‘कज्जीकायलू’ और ‘सोमास’ के रूप में यह त्योहारों की शान है. गुजरात में इसे ‘घुघरा’ कहा जाता है.

हर क्षेत्र में इसकी भरावन स्थानीय स्वाद के अनुसार बदल जाती है. कहीं मावा और सूजी, तो कहीं नारियल और गुड़ का मेल. दक्षिण भारत में चने की दाल और इलायची का स्वाद प्रमुख रहता है. इस तरह गुझिया केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बन गई है.

ALSO READ: Variety मैगज़ीन लॉन्च में परवती तिरुवोथु पर बॉडी शेमिंग, सोशल मीडिया पर बहस

Holi 2026 और Gujiya : परंपरा से जुड़ा रिश्ता

होली के अवसर पर Gujiya बनाना कई परिवारों में आज भी एक सामूहिक परंपरा है. पहले महिलाएं मिलकर बैठती थीं, आटा गूंथती थीं और घंटों तक गुझिया बनाती थीं. यह केवल खाना बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का जरिया भी था.

मार्च के महीने में मौसम बदलने लगता है. ऐसे समय में घी, मावा और मेवों से बनी मिठाई शरीर को ऊर्जा देती है. गुझिया की एक और खासियत यह है कि इसे कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. त्योहार के दौरान मेहमानों की आवभगत के लिए यह आदर्श मिठाई मानी जाती है.

आधुनिक दौर में नए प्रयोग

समय के साथ Gujiya में भी बदलाव आया है. अब बाजार में चॉकलेट, पान, ड्राई फ्रूट मिक्स और यहां तक कि शुगर-फ्री गुझिया भी उपलब्ध है. कई लोग इसे डीप फ्राई करने की बजाय बेक करना पसंद करते हैं ताकि यह हल्की और स्वास्थ्यवर्धक बने.

READ MORE: 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण, होली पर असर, जानें A to Z जानकारी

फिर भी, पारंपरिक मावा गुझिया का स्वाद आज भी सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. त्योहार के दौरान घर में बनी गुझिया की बात ही अलग होती है. इसकी खुशबू और स्वाद में एक भावनात्मक जुड़ाव छिपा होता है.

निष्कर्ष: स्वाद में इतिहास की झलक

Gujiya का इतिहास बताता है कि भारतीय खानपान ने समय-समय पर बाहरी प्रभावों को अपनाया, लेकिन अपनी मूल पहचान कायम रखी. संभव है कि मुगलकाल में इसके स्वाद और सामग्री में बदलाव आया हो, लेकिन इसकी जड़ें भारतीय परंपरा में ही गहरी हैं.

Holi 2026 पर जब रंगों के बीच गुझिया की मिठास घुले, तो यह याद रखना जरूरी है कि यह केवल एक पकवान नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है. स्वाद के हर कौर में इतिहास, परंपरा और अपनापन छिपा है- यही Gujiya की असली पहचान है.

Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat|  X  | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram | Tanya Mittal Airport Look

You Might Also Like

West Bengal SIR Voter List: 61 लाख ‘अंडर एडजुडिकेशन’ वोटर, न्यायिक मंजूरी के बाद ही मिलेगा मतदान अधिकार

Middle East Conflict: भारत के एयरपोर्ट हाई अलर्ट पर, ईरान में फंसे छात्रों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता

Ranji Trophy 2025-26: जम्मू-कश्मीर ने 67 साल बाद रचा इतिहास, पहली बार बना चैंपियन

Gold Prices: सोने-चांदी में 10–15% तक तेजी की संभावना, विशेषज्ञों का अनुमान

CM Vishnu Deo Sai Bilaspur Visit: 24 लाख किसानों को ₹10,324 करोड़ DBT ट्रांसफर, 263 करोड़ के 89 विकास कार्यों की शुरुआत

Quick Link

  • Contact Us
  • Blog Index
TAGGED:Gujiya historyGujiya originHoli 2026india tv today live newsIndian festive sweetsIndian food heritageK T AchayaMughal food influenceToday Big Breakingtoday political news headlines in hinditraditional Holi desserttv todat bharat big newstv today bharat live breakingtv today bharat live hindi newstv today bharat live news
Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Leave a comment

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

West Bengal SIR Voter List
National

West Bengal SIR Voter List: 61 लाख ‘अंडर एडजुडिकेशन’ वोटर, न्यायिक मंजूरी के बाद ही मिलेगा मतदान अधिकार

फ़रवरी 28, 2026
Middle East Conflict
InternationalNational

Middle East Conflict: भारत के एयरपोर्ट हाई अलर्ट पर, ईरान में फंसे छात्रों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता

फ़रवरी 28, 2026
Ranji Trophy 2025-26
khel

Ranji Trophy 2025-26: जम्मू-कश्मीर ने 67 साल बाद रचा इतिहास, पहली बार बना चैंपियन

फ़रवरी 28, 2026
Gold Prices
Business News

Gold Prices: सोने-चांदी में 10–15% तक तेजी की संभावना, विशेषज्ञों का अनुमान

फ़रवरी 28, 2026
CM Vishnu Deo Sai Bilaspur Visit
Chhattisgarh

CM Vishnu Deo Sai Bilaspur Visit: 24 लाख किसानों को ₹10,324 करोड़ DBT ट्रांसफर, 263 करोड़ के 89 विकास कार्यों की शुरुआत

फ़रवरी 28, 2026
Israel US attack on Iran Tehran
International

Israel US attack on Iran Tehran: इजराइल और अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, धमाकों से दहला Tehran

फ़रवरी 28, 2026

TVTodayBharat एक डिजिटल-फर्स्ट हिंदी समाचार मंच है, जहाँ हम ताज़ा खबरें, राष्ट्रीय व राज्यीय अपडेट, खेल, मनोरंजन, टेक, हेल्थ, एजुकेशन और लाइफ़स्टाइल जैसी श्रेणियों में तेज़, सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग पेश करते हैं। हमारा उद्देश्य सरल भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना, हर खबर के संदर्भ और तथ्य स्पष्ट करना, और ज़रूरत पड़ने पर समय पर सुधार प्रकाशित करना है। हम सनसनी से दूर रहते हुए प्रमाणित स्रोतों, डेटा और ग्राउंड इनपुट पर आधारित पत्रकारिता करते हैं, ताकि आप एक ही जगह पर विश्वसनीय समाचार, विश्लेषण, फोटो-वीडियो और वेब स्टोरीज़ पा सकें।

  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions

TVTodayBharat एक डिजिटल-फर्स्ट हिंदी समाचार मंच है, जहाँ हम ताज़ा खबरें, राष्ट्रीय व राज्यीय अपडेट, खेल, मनोरंजन, टेक, हेल्थ, एजुकेशन और लाइफ़स्टाइल जैसी श्रेणियों में तेज़, सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग पेश करते हैं। हमारा उद्देश्य सरल भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना, हर खबर के संदर्भ और तथ्य स्पष्ट करना, और ज़रूरत पड़ने पर समय पर सुधार प्रकाशित करना है। हम सनसनी से दूर रहते हुए प्रमाणित स्रोतों, डेटा और ग्राउंड इनपुट पर आधारित पत्रकारिता करते हैं, ताकि आप एक ही जगह पर विश्वसनीय समाचार, विश्लेषण, फोटो-वीडियो और वेब स्टोरीज़ पा सकें।

  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
© TVTodayBharat | Design by Vivek
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?