Hamirpur Bullock Cart Procession: यूपी के हमीरपुर जिले में पुरानी परंपरा के अनुसार 25 बैलगाड़ियों से बारात निकाली गई। जिसमें लगभग 200 लोग शामिल हुए थे। इस बैलगाड़ी बारात से एक बार फिर वर्षों पुरानी परंपरा देखने को मिली। सजी-धजी 25 बैलगाड़ियों में सवार होकर दूल्हा और बराती खेतों के रास्ते लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय कर फार्म हाउस पहुंचे । जहां बिना शोर-शराबे और आडंबर के पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया गया ।
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पुराने रितिवाज से सम्पन्न हुई शादी (Hamirpur Bullock Cart Procession)
अपने पुराने रितिवाज से सम्पन्न हुई यह शादी का मामला मौदहा क्षेत्र के अंतिम गांव गुढ़ा में देखने को मिला। जहां के निवासी जागेंद्र द्विवेदी अपने पुत्र मोहित द्विवेदी की शादी भेड़ी जलालपुर निवासी मोहिनी पाठक पुत्री विवेक पाठक के साथ तय की थी। दोनों परिवारों का सपना था की पुरानी परंपरा के हिसाब बैलगाड़ी से बारात निकाली जाए जिसको लेकर बैलगाड़ियों की व्यवस्था की गई ।
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ना कोई शोर ना कोई शराबे सिर्फ देसी अंदाज
यहां तय तिथि बिना किसी शोर-डीजे के देसी अंदाज में धूमधाम से बारात निकाली गई । जिसमे लगभग 200 लोग शामिल हुए। बारात गांव गुढ़ा से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित द्विवेदी परिवार के फार्म हाउस तक पहुंची थी। जहां पर विवाह समारोह में पुरानी रीति रिवाजों के अनुसार कठघोड़वा नृत्य और का आयोजन किया गया। दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर बरातियों के साथ पहुंचा। बारात का मुख्य आकर्षण तमूरा भजन,महिलाओं द्वारा गाए गए। शादी में पारंपरिक बुंदेलखंडी गीत और पत्तल में परोसा गया देशी भोजन रहा ।
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पत्तल में भोजन और देसी मेन्यू ? (Hamirpur Bullock Cart Procession)
मेन्यू में कद्दू, आलू-बैंगन की सब्जी सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल थे । भोजन सभी मेहमानों को एक साथ बैठाकर सम्मानपूर्वक परोसा गया। इतना ही नहीं विवाह की रस्में तीन दिनों तक चलीं । पहले दिन तिलक,दूसरे दिन द्वारचार और तीसरे दिन विदाई की रस्म निभाई गई। इसमें विशेष बात यह रही की बैलगाड़ी से पहुंची बारात और पारंपरिक रीति रिवाज से सम्पन्न हुई शादी लोगों के लिए यादगार क्षण बन गई ।
शादी की सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा (Hamirpur Bullock Cart Procession)
आज के समय में शादियां अक्सर दिखावे और भारी खर्च के लिए चर्चा में रहती हैं। वहीं दूसरी ओर, हमीरपुर के इस आयोजन में लोगों को सादगी, परंपरा, और स्थानीय लोक-संस्कृति की झलक दिखी इसी वजह से यह शादी इलाके में यादगार बन गई।
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परंपरा लौटाने के पीछे क्या सोच रही
परिवार की ओर से बताया गया कि वे चाहें तो आधुनिक और भव्य आयोजन कर सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़कर शादी करने का फैसला किया। खास बात यह है कि जागेंद्र द्विवेदी के फार्म हाउस में जैविक खेती होती है इस शादी में गांव की पहचान से जुड़ी चीजों को सामने लाने का प्रयास किया गया। इसके अलावा, इस तरह का आयोजन ग्रामीण परंपराओं की उस धारा की भी याद दिलाता है, जिसमें सामुदायिक सहभागिता, सादगी और स्थानीय संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती थी।
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शादी सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा (Hamirpur Bullock Cart Procession)
आज के समय में शादियां अक्सर दिखावे और भारी खर्च के लिए चर्चा में रहती हैं। वहीं दूसरी ओर, हमीरपुर के इस आयोजन में लोगों को सादगी, परंपरा, और स्थानीय लोक-संस्कृति की झलक दिखी इसी वजह से यह शादी इलाके में यादगार बन गई। साथ ही, यह उदाहरण उन परिवारों के लिए भी संदेश बनकर सामने आया जो अपने समारोहों में स्थानीय परंपराओं को जगह देना चाहते हैं बशर्ते आयोजन में सुरक्षा, व्यवस्था और मेहमानों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए।
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