32nd Milestone FIR notice: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट 32nd Milestone से जुड़े मामले में FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। यह आदेश गुरुवार को दिया गया। निवेशक अरविंद गुप्ता ने प्रमोटर्स पर वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान में चूक के आरोप लगाए हैं। कोर्ट ने पुलिस से Action Taken Report दाखिल करने को कहा है और अगली सुनवाई 13 मार्च 2026 तय की है।
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क्या है पूरा मामला
याचिका के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 32nd Milestone प्रोजेक्ट में एक कमर्शियल यूनिट खरीदी थी। प्रमोटर्स की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि यूनिट का जल्द डिमार्केशन किया जाएगा और उस पर लंबी अवधि के लिए लीज़ के जरिए नियमित मासिक रेंटल मिलेगा।
इसके अलावा, निवेशक को यह भी कहा गया था कि यदि वह किसी भी समय प्रोजेक्ट से बाहर निकलना चाहे, तो बायबैक विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसी क्रम में एक लीज़िंग अरेंजमेंट किया गया, जिसके तहत यूनिट को लंबे समय के लिए किराए पर दिया गया। हालांकि, शिकायत में दावा किया गया है कि अगस्त 2025 के बाद से लीज़ रेंटल का भुगतान बंद हो गया।
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TDS और GST से जुड़ी गंभीर शिकायतें (32nd Milestone FIR notice)
इसके अलावा, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि,
- सितंबर 2024 के बाद TDS जमा नहीं किया गया
- GST देनदारियों में चूक हुई
- कर्मचारियों से जुड़े वैधानिक योगदान जैसे PF और ESI का भुगतान नहीं किया गया
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शिकायतकर्ता का कहना है कि इन कथित चूकों से निवेशकों, कर्मचारियों और सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ है। खास बात यह है कि निवेशकों को बार-बार यह कहा गया कि TDS जमा किया जा चुका है, लेकिन तकनीकी कारणों से रिफ्लेक्ट नहीं हो रहा। बाद में यह दावा गलत पाया गया।
फर्जी TDS सर्टिफिकेट का आरोप (32nd Milestone FIR notice)
याचिका में यह भी कहा गया है कि निवेशकों को ऐसे TDS सर्टिफिकेट भेजे गए, जो कथित रूप से आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। इससे निवेशकों को यह विश्वास दिलाया गया कि सभी वैधानिक भुगतान पूरे किए जा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, जब निवेशक ने अपनी यूनिट का डिमार्केशन या बायबैक की मांग की, तो प्रमोटर्स ने कथित तौर पर असमर्थता जताई।
एक से ज्यादा निवेशकों को यूनिट बेचने की आशंका
याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि संभव है कि एक ही यूनिट को कई निवेशकों को बेचा गया हो। हालांकि, इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है और यह जांच का विषय बताया गया है।
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फंड डायवर्जन और सिफनिंग के आरोप (32nd Milestone FIR notice)
शिकायत के अनुसार, प्रोजेक्ट में चल रहे रेस्टोरेंट्स और दुकानों से आय होने के बावजूद:
- निवेशकों को भुगतान नहीं किया गया
- कर्मचारियों के वेतन और वैधानिक देनदारियां बकाया रहीं
- बैंकों और निजी संस्थानों से लिए गए कर्ज का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया
इसके अलावा, यह भी आरोप है कि भारी कर्ज लेने के बावजूद उसका उपयोग प्रोजेक्ट से जुड़े दायित्वों को पूरा करने में नहीं किया गया।
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प्रोजेक्ट साइट पर विरोध और सुविधाएं बंद
याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में निवेशक और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। प्रोजेक्ट साइट के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि,
- प्रोजेक्ट के ऑफिस बंद हैं
- बिजली और पानी जैसी सुविधाएं बकाया भुगतान के कारण काट दी गईं
- प्रमोटर्स कथित तौर पर संपर्क में नहीं हैं
प्रमोशनल खर्च को लेकर जांच की मांग (32nd Milestone FIR notice)
याचिका में प्रमोशनल गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें यह कहा गया है कि जब निवेशकों के भुगतान बकाया हैं, उस दौरान बड़े स्तर पर प्रमोशनल इवेंट्स और मीडिया अभियानों पर खर्च किया गया। कुछ सार्वजनिक हस्तियों के साथ ब्रांड एसोसिएशन का जिक्र करते हुए, याचिका में केवल फंड के स्रोत की जांच की मांग की गई है। याचिका में किसी भी सेलिब्रिटी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है।
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याचिका में क्या मांग की गई
शिकायतकर्ता ने कोर्ट से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है,
- FIR दर्ज करने का आदेश
- प्रमोटर्स के बैंक खातों को फ्रीज़ करना
- फॉरेंसिक ऑडिट
- पासपोर्ट सस्पेंड करना
- Look Out Circular जारी करना
- संपत्तियों को अटैच करना
कोर्ट का रुख
इन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए, साकेत कोर्ट ने पुलिस को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च 2026 को होगी।
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पहले भी दर्ज हो चुके हैं FIR
गौरतलब है कि 32nd Milestone FIR notice को लेकर हाल ही में गुरुग्राम पुलिस ने भी 32nd Avenue से जुड़े मामलों में निवेशकों की शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज की थी। निवेशकों का कहना था कि उन्हें लंबे समय से भुगतान नहीं मिल रहा था।
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