Amit Shah: संसद के निचले सदन Lok Sabha में बुधवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष और खासतौर पर Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उनकी टिप्पणी के बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
चार दशक बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
सदन में बोलते हुए Amit Shah ने कहा कि लगभग 40 वर्षों के बाद किसी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।
Amit Shah ने कहा कि संसद की कार्यवाही विश्वास और परंपराओं के आधार पर चलती है और इस तरह का प्रस्ताव लाना संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
Amit Shah ने यह भी कहा कि जब ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष चुना गया था तब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन तक पहुंचाया था।
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लोकतंत्र की साख पर सवाल का आरोप
Amit Shah ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और इसकी प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में है।
उन्होंने कहा कि जब सदन के अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं तो इससे देश की लोकतांत्रिक छवि प्रभावित हो सकती है।
राहुल गांधी पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
अपने भाषण के दौरान Amit Shah ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी कटाक्ष किया।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग संसद की गरिमा को समझे बिना सवाल उठा रहे हैं और “आंख मारने वाले भी आज सवाल उठा रहे हैं।”
इस टिप्पणी के बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया। कई सांसद अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे और कुछ सदस्य सदन के वेल तक पहुंच गए।

विपक्ष का आरोप – बोलने का मौका नहीं
विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्हें संसद में अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता।
इसी वजह से उन्होंने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
हालांकि Amit Shah ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्पीकर ओम बिरला ने हमेशा सभी दलों को बोलने का पूरा अवसर दिया है।
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कांग्रेस को ज्यादा समय मिलने का दावा
Amit Shah ने चर्चा के दौरान आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे 55 मिनट का समय दिया गया था, जबकि उसके पास केवल 52 सांसद थे।
इसके मुकाबले भाजपा के 303 सांसदों को 349 घंटे 8 मिनट का समय मिला।
उनका दावा था कि सदस्यों की संख्या के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस को भाजपा की तुलना में कई गुना ज्यादा समय मिला।
महिलाओं और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा
गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि ओम बिरला के कार्यकाल में संसद में कई सकारात्मक पहल भी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि 2019 में लोकसभा में रिकॉर्ड 78 महिला सांसद चुनी गई थीं और सभी को बोलने का अवसर दिया गया।
इसके अलावा संसद में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को भी बढ़ावा दिया गया।
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हंगामे के बीच खत्म हुई कार्यवाही
Amit Shah के भाषण के बाद विपक्ष का विरोध और तेज हो गया। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।
स्थिति को देखते हुए अध्यक्षीय आसन पर मौजूद Jagadambika Pal ने मतदान की घोषणा की और दिन की कार्यवाही समाप्त कर दी।
मतदान के बाद स्पष्ट हो गया कि विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।
राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत
लोकसभा में हुए इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है।
जहां सत्ता पक्ष इसे संसदीय परंपराओं की रक्षा का मुद्दा बता रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि संसद में लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा रहा है।
आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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