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Home - Iran human rights violation: खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत फांसी? ईरान में इस युवक को मौत की सजा

InternationalNational

Iran human rights violation: खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत फांसी? ईरान में इस युवक को मौत की सजा

ईरान में सवाल पूछना बना गुनाह, जवाब में फांसी!

Last updated: जनवरी 13, 2026 8:56 पूर्वाह्न
KARTIK SHARMA - Sub Editor Published जनवरी 13, 2026
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Iran to Execute Erfan Soltani for Anti-Khamenei Protest
Iran plans to execute 26-year-old Erfan Soltani for joining anti-Khamenei protests. Activists fear this could open the door to more executionsInternational Affairs |
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Highlights
  • खामेनेई विरोध की कीमत, 26 साल की उम्र में मौत का फरमान
  • एक प्रदर्शनकारी, एक फांसी और कांपती दुनिया
  • डर के सहारे सत्ता, फांसी के सहारे खामोशी
  • जिसने आवाज उठाई, उसी को झूले पर चढ़ाया जा रहा है
  • एरफान सोल्तानी सिर्फ नाम नहीं, ईरान के गुस्से की पहचान

Erfan Soltani execution Iran: ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. सड़कों पर गुस्सा है, आंखों में डर है और दिलों में सवाल. इन्हीं सवालों के बीच 26 साल के एरफान सोल्तानी का नाम अब सिर्फ एक व्यक्ति नहीं रहा, बल्कि पूरे आंदोलन का प्रतीक बन चुका है. जिस जुर्म में दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में सवाल पूछे जाते हैं, उसी जुर्म में ईरान में अब फांसी दी जा रही है.

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कौन है एरफान सोल्तानी?

एरफान सोल्तानी तेहरान के पास कराज के फर्दीस इलाके का रहने वाला एक आम युवा है. न कोई बड़ा नेता, न कोई हथियारबंद संगठन. उसका कसूर सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि वह अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में शामिल था. 8 जनवरी को उसकी गिरफ्तारी हुई और कुछ ही दिनों में उसे मौत की सजा सुना दी गई. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की सजा का नहीं, बल्कि पूरे विरोध आंदोलन को डराने की रणनीति का हिस्सा है.

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बिना वकील, बिना सुनवाई, सीधी फांसी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एरफान को बुनियादी कानूनी अधिकार तक नहीं दिए गए.

  • न उसे वकील से मिलने दिया गया
  • न ही खुली अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका
  • केस की फाइल तक परिवार को नहीं दिखाई गई

यहां तक कि उसकी बहन, जो खुद एक वकील हैं, उन्हें भी केस लड़ने या दस्तावेज़ देखने की अनुमति नहीं मिली. यह पूरी प्रक्रिया कानून से ज्यादा सत्ता के डर पर आधारित दिखाई देती है.

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परिवार को सिर्फ 10 मिनट

11 जनवरी को एरफान के परिवार को बताया गया कि उसे मौत की सजा दी जा चुकी है. इसके बाद परिवार को सिर्फ 10 मिनट के लिए उससे मिलने दिया गया. अधिकारियों ने साफ शब्दों में कह दिया कि सजा फाइनल है और इसे रोका नहीं जा सकता. सोचिए, एक मां-बाप को यह जानकर कैसा लगता होगा कि उनका बेटा जिंदा है, सामने है, लेकिन बचाया नहीं जा सकता.

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विरोध प्रदर्शन और मौत का आंकड़ा

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन पहले महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ थे. लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन सत्ता के खिलाफ सीधी चुनौती बन गया. सरकारी आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन स्वतंत्र रिपोर्ट्स के मुताबिक,

  • 500 से ज्यादा लोगों की मौत
  • 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां
  • हजारों लोग लापता

कुछ एक्टिविस्ट तो यह दावा कर रहे हैं कि मरने वालों की संख्या 2,000 तक पहुंच चुकी है.

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फांसी क्यों बन रही है हथियार?

ईरान में पहले भी असहमति को कुचलने के लिए मौत की सजा दी जाती रही है, लेकिन ज्यादातर मामलों में गोली मारने की खबरें सामने आईं. मौजूदा आंदोलन में पहली बार खुले तौर पर फांसी दिए जाने की तैयारी हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक “संदेश” है, जो बोलेगा, वही झूलेगा. डर का यह मॉडल इसलिए अपनाया जा रहा है ताकि बाकी प्रदर्शनकारी पीछे हट जाएं.

मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी

कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने साफ कहा है कि एरफान सोल्तानी का मामला एक खतरनाक मिसाल बन सकता है. अगर एक प्रदर्शनकारी को इतनी तेजी से फांसी दी जा सकती है, तो आगे कई और नाम इस लिस्ट में जुड़ सकते हैं. यह सिर्फ ईरान का आंतरिक मामला नहीं रहा, बल्कि अब यह वैश्विक मानवाधिकार संकट बनता जा रहा है.

डर बनाम बदलाव की जंग

ईरान की सड़कों पर आज सिर्फ नारे नहीं हैं, बल्कि एक पीढ़ी का गुस्सा है. जो युवा कल तक नौकरी और रोटी की बात कर रहे थे, आज वे सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं. एरफान सोल्तानी की संभावित फांसी इस आंदोलन को दबाने की कोशिश जरूर हो सकती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि डर से कुछ समय के लिए आवाज दबाई जा सकती है, खत्म नहीं की जा सकती.

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आखिरी सवाल

आज सवाल यह नहीं है कि एरफान सोल्तानी को फांसी होगी या नहीं. असल सवाल यह है कि क्या सवाल पूछना अब अपराध बन चुका है?
क्या विरोध करना अब मौत की सजा के बराबर है? अगर एक 26 साल का युवक सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए फांसी चढ़ाया जा सकता है, तो आने वाले वक्त में यह आग सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगी. एरफान सोल्तानी का नाम अब एक चेतावनी है, सत्ता जब डरने लगती है, तो इंसाफ सबसे पहले मरता है.

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