Gita Press Kalyan Centenary Issue Launch: उत्तराखंड के आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश में एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजन देखने को मिला, जब गीता प्रेस द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में मासिक पत्रिका कल्याण के शताब्दी अंक और ‘आरोग्यांक’ (गुजराती संस्करण) का विधिवत विमोचन किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देश के केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। संत-महात्माओं, विद्वानों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का संगम
ऋषिकेश सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है। इसी पवित्र भूमि पर गीता प्रेस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का कार्यक्रम आयोजित होना अपने आप में एक संदेश देता है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें आज भी जीवंत हैं। ‘कल्याण’ पत्रिका ने पिछले सौ वर्षों में धर्म, दर्शन, नीति और जीवन-मूल्यों को सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। शताब्दी अंक का विमोचन न केवल एक पत्रिका की उपलब्धि है, बल्कि भारतीय विचारधारा की निरंतरता का भी प्रतीक है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संबोधन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि गीता प्रेस और ‘कल्याण’ पत्रिका ने देश को नैतिक और सांस्कृतिक दिशा देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे देवभूमि राज्य में ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन, संस्कृति संरक्षण और साहित्यिक परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उनके अनुसार, ‘कल्याण’ जैसे प्रकाशन आज के डिजिटल युग में भी विचारों की शुद्धता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।
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अमित शाह का विचार और राष्ट्रीय दृष्टिकोण
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘कल्याण’ पत्रिका केवल धार्मिक पत्रिका नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन की मार्गदर्शक रही है। उन्होंने कहा कि जब देश वैचारिक चुनौतियों से गुजरता है, तब ऐसे प्रकाशन समाज को स्थिरता और दिशा प्रदान करते हैं। अमित शाह ने गीता प्रेस की सराहना करते हुए कहा कि बिना व्यावसायिक लाभ के, केवल सेवा भाव से इतने लंबे समय तक कार्य करना आज के समय में दुर्लभ उदाहरण है। उन्होंने संत समाज के योगदान को भी नमन किया, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखा।
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शताब्दी अंक और आरोग्यांक का महत्व
‘कल्याण’ का शताब्दी अंक अपने आप में एक दस्तावेज है, जिसमें भारतीय संस्कृति, धर्म, समाज और विचार परंपरा की यात्रा समाहित है। वहीं ‘आरोग्यांक’ (गुजराती संस्करण) स्वास्थ्य और जीवनशैली पर केंद्रित है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अत्यंत प्रासंगिक है। इस विशेष अंक के माध्यम से आयुर्वेद, योग, संतुलित जीवन और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को सरल और प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह प्रयास दर्शाता है कि गीता प्रेस समय के साथ विषयों का विस्तार करते हुए भी अपनी मूल आत्मा को बनाए हुए है।
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संत समाज और जनभागीदारी की भूमिका
कार्यक्रम में उपस्थित संतगणों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण में साहित्य और आध्यात्मिक पत्रिकाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब समाज भौतिकता की ओर अधिक झुकता है, तब ऐसे प्रकाशन आत्मिक संतुलन बनाए रखने का कार्य करते हैं। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और पाठकों ने भी इस अवसर को ऐतिहासिक बताया। जनभागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘कल्याण’ पत्रिका आज भी लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।
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देवभूमि से राष्ट्र को संदेश
ऋषिकेश में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक विमोचन समारोह नहीं था, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड से पूरे देश को दिया गया एक सांस्कृतिक संदेश था। यह संदेश था परंपरा और आधुनिकता के संतुलन का, विचारों की शुद्धता का और सेवा भाव से किए गए सतत प्रयासों का। गीता प्रेस, ‘कल्याण’ पत्रिका और इस आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति समय की कसौटी पर खरी उतरती आई है और आगे भी मार्गदर्शन करती रहेगी। इस प्रकार, गीता प्रेस द्वारा आयोजित यह आयोजन न केवल साहित्यिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने वाला भी सिद्ध हुआ। ‘कल्याण’ का शताब्दी अंक आने वाले वर्षों में भी पाठकों को प्रेरणा देता रहेगा और भारतीय संस्कृति के अमूल्य मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाता रहेगा।
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