India Ramsar Wetlands: गणतंत्र दिवस समारोह, पद्म पुरस्कार 2026 और पेटीओल अंतर्राष्ट्रीय खेल सामग्री के बीच भारत को पर्यावरण संरक्षण के संदेश पर एक अहम पहचान मिली है। विश्व वेटलैंड दिवस से ठीक पहले भारत में 2 नए रामसर वेटलैंड जोड़े गए हैं उत्तर प्रदेश के एटा जिले का पाटन पक्षी संरक्षण और गुजरात के कच्छ का छड़ी-बंध। यह कदम आर्द्रभूमि संरक्षण को भूगोल प्रदान करता है और जैव-विविधता की रक्षा के लिए भारत के भूभाग को जोड़ता है।

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India Ramsar Wetlands Network में दो नए नाम (India Ramsar Wetlands)
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर कन्वेंशन की सूची में इन दो उर्वरभूमियों का शामिल होना संरक्षण अभियानों की सफलता का संकेत है। खास बात यह है कि ये दोनों स्थल प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराते हैं, जिससे भारत में जैव विविधता हॉटस्पॉट को बल मिलता है।
पटना पक्षी अभयारण्य, एटा (उत्तर प्रदेश) (India Ramsar Wetlands)
वहीं दूसरी ओर, एटा स्थित पटना पक्षी अभयारण्य उत्तर भारत में पक्षी-प्रेमियों के लिए एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां सर्दियों के मौसम में सैकड़ों migratory birds आते हैं। साथ ही, यह क्षेत्र स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलन में रखने में अहम भूमिका निभाता है।

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छारी-ढांड, कच्छ (गुजरात) (India Ramsar Wetlands)
इसी क्रम में, कच्छ का छारी-ढांड शुष्क परिदृश्य के बीच एक अनोखा आर्द्र क्षेत्र है। यहां चिंकारा, भेड़िए, कैराकल, डेज़र्ट कैट और डेज़र्ट फॉक्स जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। साथ ही, कई लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियां भी इस क्षेत्र को अपना घर बनाती हैं, जिससे इसका संरक्षण और भी आवश्यक हो जाता है।
Ramsar Sites में 276% से अधिक की वृद्धि (India Ramsar Wetlands)
खास बात यह है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है। 2014 में जहां देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, वहीं अब यह संख्या 98 हो गई है जो 276% से अधिक विस्तार को दर्शाती है। यह उपलब्धि भारत की सतत विकास नीति और संतुलन संतुलन की प्रतिकृति सोच को दर्शाती है।
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Wetland Conservation क्यों है जरूरी (India Ramsar Wetlands)
साथ ही, आर्द्रभूमियां जल-शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनका संरक्षण न केवल वन्यजीवों के लिए, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
आगे की राह (India Ramsar Wetlands)
अंततः, नए Ramsar स्थलों का जुड़ना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि नीति, विज्ञान और समुदाय तीनों के समन्वय से भारत में पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल रही है। आने वाले वर्षों में इन आर्द्रभूमियों का सतत प्रबंधन ही उनकी वास्तविक सफलता तय करेगा।

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स्थानीय समुदाय और अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ (India Ramsar Wetlands)
इसके साथ ही, नए Ramsar स्थलों का दर्जा मिलने से स्थानीय समुदायों की भागीदारी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। आर्द्रभूमि संरक्षण से eco-tourism, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के अवसर बढ़ते हैं। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बाद इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण परियोजनाएं और सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित होता है। यही वजह है कि Ramsar साइट्स केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि स्थानीय विकास और आजीविका सुरक्षा का भी अहम आधार बनती हैं।
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Ramsar Site क्या है? (India Ramsar Wetlands)
Ramsar Site वह आर्द्रभूमि होती है जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के आधार पर Ramsar Convention के तहत मान्यता मिलती है। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण, विवेकपूर्ण उपयोग और जैव-विविधता की रक्षा करना है। भारत में Ramsar दर्जा मिलने के बाद संबंधित स्थल पर संरक्षण मानक सख़्त होते हैं, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग बढ़ती है और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। इससे जल-सुरक्षा, पक्षी संरक्षण और जलवायु अनुकूलन जैसे लक्ष्यों को एक साथ साधने में मदद मिलती है।
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