Iran Israel Conflict: पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हमलों और पलटवार की इस श्रृंखला ने जंग का दायरा और असर दोनों बढ़ा दिए हैं। हालात हर दिन अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में India ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील दोहराई है।
विदेश मंत्रालय ने ताजा बयान में कहा कि India पहले भी संघर्ष की शुरुआत के समय अपनी चिंता जता चुका है। सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय शांति, आम नागरिकों की सुरक्षा और कूटनीतिक समाधान ही इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता हैं।
प्रधानमंत्री की खाड़ी देशों से लगातार बातचीत
बढ़ते Iran Israel Conflict के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पिछले 48 घंटों में कई प्रमुख देशों के नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने Oman के सुल्तान, Kuwait के क्राउन प्रिंस और Qatar के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से हालात पर विस्तार से चर्चा की।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री ने United Arab Emirates, Israel, Saudi Arabia, Jordan और Bahrain के नेताओं से भी संवाद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और भारतीय समुदाय की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
कतर के अमीर से चर्चा में प्रधानमंत्री ने वहां भारतीय नागरिकों को दिए जा रहे सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था के लिए आभार भी व्यक्त किया।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट संदेश
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि रमजान के पवित्र महीने में इस तरह की हिंसा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में संघर्ष का दायरा बढ़ा है और यह अन्य देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है। इससे न केवल जान-माल का नुकसान बढ़ा है बल्कि आम जनजीवन और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
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India ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। बयान में कहा गया है कि क्षेत्र की स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिशा में कोई भी नकारात्मक घटनाक्रम चिंता का विषय है।
भारतीय समुदाय और आर्थिक हितों पर असर
खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ India नागरिक काम करते और निवास करते हैं। ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका पर पड़ सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे किसी भी घटनाक्रम से बेपरवाह नहीं रह सकती जो भारतीय समुदाय के हितों को प्रभावित करे। इसके अलावा भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। किसी भी बड़े व्यवधान का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।
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मर्चेंट शिपिंग पर हुए हालिया हमलों को लेकर भी भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है या वे लापता हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
भारतीय दूतावास सक्रिय
संघर्ष प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं। जरूरत के मुताबिक एडवाइजरी जारी की जा रही है और आपात स्थितियों में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि सरकार हालात पर नजदीकी नजर रखे हुए है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अपने समकक्षों से निरंतर संवाद में हैं।
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कूटनीति ही समाधान
भारत ने दोहराया है कि मौजूदा संकट का हल युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह जल्द से जल्द संघर्ष समाप्त करने के पक्ष में है और क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करती है।
पश्चिम एशिया में जारी यह Iran Israel Conflict न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में India की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। सरकार ने संकेत दिया है कि बदलते हालात के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि राष्ट्रीय हित सुरक्षित रह सकें।
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