Kishtwar Terrorists Encounter: जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चल रहे लंबे अभियान का आखिरकार निर्णायक अंत हुआ। सुरक्षा बलों ने किश्तवाड़ में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े मॉड्यूल को खत्म करने का दावा किया है। इस मॉड्यूल का नेतृत्व सैफुल्लाह नामक आतंकी कर रहा था और इसे ‘इजरायल ग्रुप’ के नाम से जाना जाता था।
करीब 326 दिनों तक चले सर्च और ट्रैक ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना की डेल्टा फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में सातों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। सेना ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह Kishtwar Terrorists Encounter आधुनिक तकनीक, खुफिया इनपुट और जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी के दम पर संभव हो पाया।
तकनीक और धैर्य से मिली सफलता
Kishtwar Terrorists Encounter में ड्रोन, थर्मल इमेजिंग उपकरण और सैटेलाइट सहायता का इस्तेमाल किया गया। पहाड़ों की ऊंचाई, घने जंगल और बर्फबारी के बावजूद सुरक्षाबलों ने लगातार दबाव बनाए रखा।
Kishtwar Terrorists Encounter में डेल्टा फोर्स, जो Rashtriya Rifles की स्थानीय यूनिट है, ने इस ऑपरेशन में अग्रिम भूमिका निभाई। अधिकारियों के अनुसार, इस ग्रुप की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी।
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सैफुल्लाह और उसके सहयोगी ढेर
सेना के मुताबिक, सैफुल्लाह पाकिस्तानी नागरिक था और डोडा-किश्तवाड़ बेल्ट में पिछले डेढ़-दो साल से सक्रिय था। उसने अप्रैल 2024 में एलओसी पार कर भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। कई बार सुरक्षाबलों से मुठभेड़ के दौरान वह बच निकला, लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह में उसे घेरकर मार गिराया गया।
Kishtwar Terrorists Encounter के दौरान उसके दो सहयोगी फरमान अली और बशरा उर्फ हुरेरा भी मारे गए। इससे पहले इसी महीने एक अन्य कार्रवाई में आदिल नामक आतंकी को ढेर किया गया था, जिसे सैफुल्लाह का डिप्टी कमांडर माना जाता था।

हथियारों का जखीरा बरामद
मुठभेड़ के बाद आतंकियों के पास से दो एके-47 राइफल, एक एम-4 कार्बाइन और स्टील कोर बुलेट बरामद की गईं। अधिकारियों ने बताया कि ये बुलेट्स बुलेटप्रूफ जैकेट को भी भेद सकती हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकियों के पास उन्नत हथियार मौजूद थे।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल को सीमा पार से लगातार सपोर्ट मिल रहा था।
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14 फरवरी से शुरू हुआ अंतिम चरण
अंतिम चरण का Kishtwar Terrorists Encounter 14 फरवरी को शुरू हुआ। 18 फरवरी को आतंकियों से संपर्क हुआ और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया गया। 21-22 फरवरी को चली मुठभेड़ में सेना ने निर्णायक बढ़त बनाई।
Kishtwar Terrorists Encounter के दौरान सेना के डॉग स्क्वाड के सदस्य ‘टायसन’ ने भी अहम भूमिका निभाई। वह सबसे पहले संदिग्ध ढोक (स्थानीय चरवाहों की झोपड़ी) में दाखिल हुआ और आतंकियों की मौजूदगी का संकेत दिया। गोलीबारी में वह घायल हो गया, लेकिन उसकी बहादुरी को सेना ने विशेष रूप से सराहा।
डोडा-किश्तवाड़ में सघन अभियान
पहलगाम नरसंहार के बाद सेना ने डोडा और किश्तवाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में विशेष अभियान शुरू किया था। सर्दियों के ‘चिलाए कलां’ के दौरान भी ऑपरेशन जारी रखा गया, जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और भारी बर्फबारी होती है।
जंगलों में बनी ढोक और गुफाओं की तलाशी लेकर सुरक्षाबलों ने कई अस्थायी ठिकानों को नष्ट किया। खाली कराए गए ठिकानों पर सीआरपीएफ और पुलिस ने फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित किए, ताकि आतंकी दोबारा इन जगहों को पनाहगाह न बना सकें। पिछले महीनों में 40 से अधिक ऐसे बेस स्थापित किए गए हैं।
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अभी भी चुनौती बरकरार
सेना के अनुसार, सैफुल्लाह ग्रुप के खत्म होने से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है। हालांकि खुफिया एजेंसियों के ताजा इनपुट बताते हैं कि जम्मू रीजन डोडा, किश्तवाड़, पुंछ और राजौरी में अब भी लगभग 30 पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं।
वहीं कश्मीर घाटी में 40-50 आतंकियों की मौजूदगी की आशंका जताई गई है, जिनमें अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के सामने ऑपरेशन को लगातार जारी रखने की चुनौती बनी हुई है।
सख्त संदेश
Kishtwar Terrorists Encounter को सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक संदेश के रूप में देख रही हैं। सेना का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Kishtwar Terrorists Encounter दर्शाता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे अभियानों के बावजूद सुरक्षा बल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम हैं। आने वाले समय में भी आतंकवाद के खिलाफ इसी दृढ़ता के साथ अभियान जारी रहेगा।
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