Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल पहले ही गरम है। इसी बीच दार्जिलिंग में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों ने राज्य की राजनीति को और गर्म कर दिया है। इस मुद्दे पर राष्ट्रपति की नाराजगी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया है।
कार्यक्रम स्थल बदलने पर उठा सवाल
राष्ट्रपति Droupadi Murmu हाल ही में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही यह कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि आयोजन स्थल को अचानक बदल दिया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से कोई मंत्री या मुख्यमंत्री मौजूद नहीं थे।
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राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ और क्या राज्य सरकार की ओर से किसी प्रकार की नाराजगी है।
आदिवासी सम्मेलन में पहुंची थीं राष्ट्रपति
दरअसल राष्ट्रपति Droupadi Murmu को एक आदिवासी सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल संथाल काउंसिल नामक संगठन की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राज्य सरकार के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। उन्होंने आदिवासी समुदाय के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
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मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने दिया जवाब
राष्ट्रपति के बयान के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कार्यक्रम राज्य सरकार का आधिकारिक आयोजन नहीं था। उनके अनुसार यह एक निजी संगठन का कार्यक्रम था, जिसमें राष्ट्रपति को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
Mamata Banerjee ने कहा कि राष्ट्रपति को रिसीव करने और विदा करने के लिए जो आधिकारिक प्रोटोकॉल तय किया गया था, उसका पालन जिला प्रशासन की ओर से किया गया। उन्होंने बताया कि उस प्रोटोकॉल सूची में मुख्यमंत्री या राज्य मंत्रियों के शामिल होने का प्रावधान नहीं था।
कार्यक्रम स्थल बदलने की वजह
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम स्थल को बदलने का फैसला प्रशासनिक कारणों से लिया गया था। उनके अनुसार सिलीगुड़ी जिला प्रशासन ने पहले ही राष्ट्रपति सचिवालय को जानकारी दी थी कि तय स्थल पर व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति की एडवांस टीम ने भी स्थल का निरीक्षण किया था और स्थिति से अवगत कराया गया था। इसके बाद कार्यक्रम को दूसरे स्थान पर आयोजित किया गया, ताकि आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
जिला प्रशासन ने निभाया प्रोटोकॉल
Mamata Banerjee ने कहा कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। सिलीगुड़ी के मेयर, दार्जिलिंग के जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे कार्यक्रम में प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की चूक नहीं हुई है और सभी औपचारिकताओं का पालन किया गया था।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में बयानबाजी भी तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती है, लेकिन चुनावी माहौल में कुछ लोग इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं और उनका सम्मान सभी को करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संवैधानिक पद को राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तनाव
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। एक ओर जहां विपक्ष राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगा रहा है, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि चुनाव नजदीक आने के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। फिलहाल इस मामले ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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