Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit: Mohan Bhagwat दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर देहरादून पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत उनका Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit विशेष महत्व रखता है। राजधानी में उनके आगमन के साथ ही संघ पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit के दौरान मोहन भागवत समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। पहले दिन वे शहर के प्रमुख नागरिकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit के दूसरे दिन पूर्व सैनिकों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और संगठन की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
शताब्दी वर्ष के संदर्भ में विशेष कार्यक्रम
वर्ष 1925 में स्थापित Rashtriya Swayamsevak Sangh अपने 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इस अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit पर देहरादून का यह कार्यक्रम भी उसी कड़ी का हिस्सा है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का समय है।
संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने बताया कि संगठन की परंपरा में औपचारिक उत्सव से अधिक विचार और कार्य की निरंतरता को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों के लिए संगठन की प्राथमिकताओं, समाज के साथ समन्वय और राष्ट्रहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit पर देहरादून में आयोजित जन गोष्ठी में समाज के उन लोगों को आमंत्रित किया गया है, जो शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक सेवा और प्रशासनिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य विचारों का आदान-प्रदान करना और समाज के विविध अनुभवों को समझना बताया गया है।
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit के दूसरे दिन गढ़ी कैंट स्थित सांस्कृतिक सभागार में पूर्व सैनिकों के साथ विशेष संवाद होगा। उत्तराखंड को सैनिक बहुल प्रदेश माना जाता है, इसलिए पूर्व सैनिकों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्र सुरक्षा, अनुशासन और समाज में पूर्व सैनिकों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

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गांव-गांव तक पहुंचने का दावा
संघ पदाधिकारियों के अनुसार, उत्तराखंड में संगठन का विस्तार लगातार बढ़ा है। बताया गया कि राज्य के हजारों गांवों में स्वयंसेवकों ने घर-घर संपर्क अभियान चलाया है। न्याय पंचायत, मंडल और शहरी वार्ड स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए गए हैं।
दावा किया गया है कि प्रदेश में सैकड़ों मंडलों और बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित कर समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ा गया है। इन आयोजनों के माध्यम से संगठन की विचारधारा और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई।
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तैयारियां पूरी, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit पर मोहन भागवत के दौरे को देखते हुए कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम स्थलों पर अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाली है।
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संवाद पर रहेगा फोकस
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit का मुख्य उद्देश्य संवाद और विचार-विमर्श बताया जा रहा है। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, समाज के प्रबुद्ध वर्ग के साथ खुली चर्चा से संगठन को दिशा और सुझाव मिलते हैं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह संवाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह भविष्य की कार्ययोजना तय करने का आधार बन सकता है।
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit पर देहरादून में दो दिनों तक चलने वाले इन कार्यक्रमों के बाद मोहन भागवत अन्य राज्यों में भी शताब्दी वर्ष से जुड़े आयोजनों में भाग लेंगे। फिलहाल राजधानी में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर उत्सुकता बनी हुई है और विभिन्न वर्गों की निगाहें इन संवाद सत्रों पर टिकी हैं।
इस प्रकार, आरएसएस प्रमुख का यह Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit संगठन के लिए वैचारिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां उत्सव से अधिक विचार और भविष्य की दिशा पर जोर दिया जा रहा है।
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