Narendra Modi Israel Visit: प्रधानमंत्री Narendra Modi का इजराइल दौरा उस समय ऐतिहासिक बन गया जब उन्होंने इजराइल की संसद Knesset को संबोधित किया। दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान यह वह पल था, जिसने न केवल भारत-इजराइल संबंधों को नई ऊंचाई दी, बल्कि इजराइल की आंतरिक राजनीति में भी एक अनोखी एकजुटता का दृश्य प्रस्तुत किया।
Narendra Modi Israel Visit के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष-दोनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। आमतौर पर घरेलू राजनीतिक मुद्दों को लेकर विभाजित रहने वाले सांसद इस अवसर पर एक मंच पर दिखाई दिए।
विपक्ष ने भी दिखाया सम्मान (Narendra Modi Israel Visit)
इजराइल की राजनीति में प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को लेकर मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। विपक्षी दल अक्सर उनकी नीतियों का खुलकर विरोध करते रहे हैं। लेकिन पीएम मोदी के संबोधन के दौरान यह मतभेद पीछे छूटते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने पहले कुछ सत्रों का बहिष्कार किया था, लेकिन जब पीएम मोदी के भाषण की बारी आई तो वे सभी संसद में मौजूद रहे। विपक्ष के नेता Yair Lapid ने व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी का स्वागत किया और स्पष्ट किया कि उनका विरोध भारत या भारतीय प्रधानमंत्री से संबंधित नहीं है।
Narendra Modi Israel Visit में जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन अम यिस्राएल चाई (इजराइल के लोग जीवित हैं) के शब्दों के साथ किया, तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर उनकी सराहना करते दिखाई दिए।
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आतंकवाद पर स्पष्ट और सख्त संदेश
Narendra Modi Israel Visit के दौरान नेसेट में दिए गए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की स्पष्ट नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और इजराइल दोनों ऐसे देश हैं, जिन्होंने आतंकवाद की पीड़ा को करीब से झेला है।
प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाता। भारत वर्तमान और भविष्य में भी इजराइल के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
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भारत-इजराइल रिश्तों को नई दिशा
पीएम मोदी का यह भाषण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। यह पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नेसेट को संबोधित किया। इस अवसर को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
भारत और इजराइल के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग पहले से मजबूत रहा है। इस यात्रा ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Narendra Modi Israel Visit से नेसेट में दिखी एकजुटता इस बात का संकेत है कि भारत-इजराइल संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक राजनीतिक और सामाजिक समर्थन प्राप्त करते हैं।
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इजराइल में मोदीमय माहौल (Narendra Modi Israel Visit)
प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संसद परिसर में कई सांसद और अधिकारी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने और हाथ मिलाने के इच्छुक दिखे। सोशल मीडिया पर भी उनके भाषण और इजराइल दौरे की तस्वीरें व्यापक रूप से साझा की जा रही हैं।
इजराइली मीडिया ने भी इस यात्रा को प्रमुखता से कवर किया। कई विश्लेषकों ने इसे भारत की वैश्विक भूमिका के विस्तार और मध्य-पूर्व में उसकी बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति के रूप में देखा।
ऐतिहासिक संबोधन का व्यापक संदेश
Narendra Modi Israel Visit में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में केवल कूटनीतिक औपचारिकताएं नहीं थीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और साझा संघर्षों की झलक भी थी। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और शांति के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
उनका संदेश स्पष्ट था-आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता आवश्यक है और निर्दोषों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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कूटनीति से परे एक प्रतीकात्मक क्षण
नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन केवल एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वह एक ऐसा क्षण था जिसने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका कितनी मजबूत हो चुकी है।
सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, जिस तरह इजराइली संसद ने भारतीय प्रधानमंत्री का सम्मान किया, वह दोनों देशों के गहरे विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है।
Narendra Modi Israel Visit भारत-इजराइल संबंधों के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है जहां कूटनीति, भावनात्मक जुड़ाव और साझा मूल्यों का अनूठा संगम देखने को मिला।
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