Bagurumba Dwhou 2026 Guwahati: गुवाहाटी के सुरूसजाई स्टेडियम में आयोजित बागुरुम्बा दोहो 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत कर बोडो समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि असम की उस यात्रा का प्रतीक बना, जो संघर्ष से निकलकर शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक पहुंची है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बागुरुम्बा दोहो असम की सांस्कृतिक अस्मिता और बोडो समाज की महान परंपरा का उत्सव है।
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असम से प्रधानमंत्री का विशेष जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें असम की संस्कृति को करीब से देखने और महसूस करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने उल्लेख किया कि किसी भी अन्य प्रधानमंत्री की तुलना में उन्होंने असम का सबसे अधिक दौरा किया है। इसके पीछे उद्देश्य असम की कला, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच देना रहा है। उन्होंने भव्य बिहू उत्सव, झुमोइर बिनिंदिनी, नई दिल्ली में आयोजित बोडो महोत्सव जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी प्रयास असम की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए किए गए हैं।
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बागुरुम्बा, केवल नृत्य नहीं, पहचान का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि बागुरुम्बा केवल एक नृत्य या उत्सव नहीं है, बल्कि यह बोडो समाज की आत्मा और पहचान का प्रतीक है। यह त्योहार बोडो समाज के महान व्यक्तियों और उनके योगदान को स्मरण करने का माध्यम भी है। उन्होंने बोडोफा उपेन्द्रनाथ ब्रह्मा, गुरुदेव कालीचरण ब्रह्मा, रूपनाथ ब्रह्मा, सतीश चंद्र बसुमतारी, मोरादम ब्रह्मा और कनकेश्वर नरजारी जैसे महापुरुषों को याद करते हुए उनके सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक चेतना और राजनीतिक जागरण में योगदान को रेखांकित किया।
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असम की संस्कृति: पूरे देश का गर्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की संस्कृति केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे भारत की धरोहर है। भारत का इतिहास असम की विरासत के बिना अधूरा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में असम की संस्कृति को राष्ट्रीय मान्यता मिली है बिहू को राष्ट्रीय पहचान, चराइदेओ मोइदम को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना, असमिया भाषा को शास्त्रीय स्तरों और बोडो भाषा को असम की सह आधिकारिक भाषा का स्तर मिलते हैं, इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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परंपरा, आस्था और सम्मान
प्रधानमंत्री ने बताया कि बथौ धर्म को पूर्ण सम्मान दिया गया है और बथौ पूजा को राज्य से बाहर घोषित कर दिया गया है। उन्होंने वीर योद्धा लाचित बोरफुकन की भव्य प्रतिमा की स्थापना और बोडोफा के उपेन्द्रनाथ ब्रह्मा की प्रतिमा के अनावरण का भी उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने श्रीमंत शंकरदेव की भक्ति परंपरा और ज्योति प्रसाद अग्रवाल की कला और स्वयं को असम की पहचान का सिद्धांत बताया। ज्योति प्रसाद अलार्वाल की स्मृति में उन्हें भी निक्की की उपाधि दी गई।
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संघर्ष से शांति की ओर असम
प्रधानमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा कि उन्होंने असम को खून-खराबे, बंदूक की आवाज़ों और कर्फ्यू के सन्नाटे से निकलकर आज संस्कृति के रंगों में खिलते देखा है। उन्होंने कहा, ‘आज खाम और सिफुंग की मधुर ध्वनि गूंजती है, संगीत बहता है और बागुरुम्बा के मनमोहक नृत्य होते हैं।’ यह बदलाव केवल असम की नहीं, बल्कि पूरे भारत की उपलब्धि है।
2020 बोडो शांति समझौता, ऐतिहासिक मोड़
प्रधानमंत्री ने 2020 के बोडो शांति समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसने दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त किया, विश्वास बहाल किया और हजारों युवाओं को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जोड़ा। इस समझौते के बाद बोडो क्षेत्र में शिक्षा, विकास और रोजगार के नए अवसर बने और शांति रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी।
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युवाओं के सपनों को पंख
प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और बोडोलैंड का भविष्य उसके युवाओं में निहित है। सरकार ने पुनर्वास को तेज किया है और हजारों युवाओं को करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता देकर नए सिरे से जीवन शुरू करने का अवसर दिया है। आज बोडो युवा खेल, कला और संस्कृति में असम के सांस्कृतिक दूत बनकर उभर रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
विकास की नई रफ्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि बोडोलैंड के लिए 15 सौ करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज, कोकराझार में मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, तमुलपुर में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग व पैरामेडिकल संस्थान, पॉलिटेक्निक और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बिश्मुरी सरलपारा सड़क परियोजना और कोकराझार गेलेफू रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं व्यापार, पर्यटन और संपर्क को बढ़ावा देंगी।
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असम का आत्मविश्वास, भारत की प्रगति
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल है और बोडोलैंड इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जड़ों से जुड़े रहकर, संवाद और विश्वास को मजबूत कर, समान अवसर सुनिश्चित करते हुए असम और बोडोलैंड सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पबित्रा मरघेरिटा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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