President Mathura Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से तीन दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा पर मथुरा-वृंदावन पहुंच रही हैं। 19 मार्च से 21 मार्च 2026 तक चलने वाले इस दौरे में वह ब्रजभूमि के प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगी और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं का अनुभव लेंगी। President Mathura Visit को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा विशेष कार्यक्रम माना जा रहा है।
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी यह पावन भूमि सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है। राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ब्रज संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने का भी अवसर है।
इस्कॉन मंदिर से होगी दौरे की शुरुआत
President Mathura Visit के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सबसे पहले वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर में दर्शन करेंगी। श्री कृष्ण-बलराम मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर आधुनिक वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम है।
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इस मंदिर की स्थापना 1975 में इस्कॉन के संस्थापक ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। यहां भगवान कृष्ण और बलराम की मुख्य वेदी के साथ राधा-श्यामसुंदर और गौरा-निताई की मूर्तियां भी स्थापित हैं। राष्ट्रपति यहां प्रभुपाद समाधि के दर्शन करेंगी और गौ पूजा में भी हिस्सा लेंगी, जो ब्रज संस्कृति का एक अहम हिस्सा है।
प्रेम मंदिर की भव्यता का करेंगी दर्शन
इसके बाद President Mathura Visit के दौरान राष्ट्रपति प्रेम मंदिर पहुंचेंगी, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला और दिव्य सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। सफेद इतालवी संगमरमर से बना यह मंदिर रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी में और भी आकर्षक दिखाई देता है।
इस मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा कराया गया था और इसे बनने में करीब एक दशक का समय लगा। मंदिर की दीवारों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। यहां का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है।
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सीता-राम मंदिर में भी करेंगी पूजा
प्रेम मंदिर परिसर में स्थित सीता-राम मंदिर भी राष्ट्रपति के इस दौरे का हिस्सा है। President Mathura Visit के तहत यहां भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के दर्शन किए जाएंगे।
यह मंदिर भी अपनी भव्यता और शिल्पकला के लिए जाना जाता है। संगमरमर से बने इस मंदिर में भक्तों को एक अलग ही शांति और भक्ति का अनुभव होता है। यहां की सजावट और धार्मिक वातावरण लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है।
गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में विशेष पूजा
दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रपति गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर पहुंचेंगी। President Mathura Visit का यह सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यहां गोपियों से दान के रूप में माखन और दही लिया था, इसी कारण इस स्थान का नाम दानघाटी पड़ा। यहां गिरिराज जी शिला के रूप में विराजमान हैं और श्रद्धालु मानते हैं कि इनके दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सप्तकोसीय परिक्रमा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति सप्तकोसीय परिक्रमा भी करेंगी। President Mathura Visit में यह परिक्रमा विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसे ब्रज की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक माना जाता है।
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करीब 21 किलोमीटर लंबी इस परिक्रमा के पीछे मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। तभी से इस पर्वत को भगवान का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
ब्रज संस्कृति को मिलेगा नया मंच
राष्ट्रपति का यह दौरा केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का भी एक बड़ा अवसर है। President Mathura Visit के जरिए देश और दुनिया को यह संदेश जाएगा कि भारत की परंपराएं आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं।
स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने इस दौरे को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा आस्था, संस्कृति और परंपरा का एक अनूठा संगम है, जो ब्रजभूमि की पहचान को और मजबूत करेगा।
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