Rahul Gandhi SIR vote theft allegation: विपक्ष और कांग्रेस में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने गुजरात में चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर ‘रणनीति वोट चोरी’ की जा रही है। राहुल गांधी का कहना है कि यह कोई सामान्य आम सहमति नहीं है, बल्कि स्थिरता को प्रभावित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। उनके अनुसार, दस्तावेज़ में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका है और भारत के चुनाव आयोग में इस मामले में ‘मुख्य सहयोगी’ बन गया है।
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SIR क्या है और विवाद क्यों?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, मतदाता सूची की गहन समीक्षा की प्रक्रिया होती है। आम तौर पर इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नागरिकों को जोड़ना होता है। लेकिन राहुल गांधी के अनुसार, गुजरात में SIR का इस्तेमाल निष्पक्षता के बजाय चयनात्मक तरीके से किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिन इलाकों और बूथों पर कांग्रेस का समर्थन अधिक है, वहां मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए जा रहे हैं। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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‘जहां SIR, वहां वोट चोरी’ राहुल गांधी का दावा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर गुजरात कांग्रेस की एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जहां-जहां SIR लागू हुआ है, वहां वोट चोरी का पैटर्न सामने आया है। उन्होंने लिखा कि गुजरात में हो रही यह प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही लोकतांत्रिक। उनका कहना है कि यह पूरी कवायद पहले से तय योजना के तहत की जा रही है, ताकि विपक्ष के समर्थन वाले वोटरों को सूची से बाहर किया जा सके। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है।
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सामूहिक आपत्तियों का मुद्दा, ‘खतरनाक संकेत’
इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर पहलू वह है, जिसे राहुल गांधी ने “खतरनाक” बताया। उनके अनुसार, मतदाता सूची पर हजारों-लाखों आपत्तियां एक ही नाम से दाखिल की गईं। कांग्रेस का दावा है कि कई मामलों में नाम एक व्यक्ति का है, हस्ताक्षर किसी और के हैं और फिर भी आपत्तियों को स्वीकार कर लिया गया। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विशेष समुदायों और कांग्रेस-समर्थक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
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पहले भी दिख चुका है यही पैटर्न?
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कोई नया तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इसी तरह का पैटर्न पहले कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी देखा गया था।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक के आलंद और महाराष्ट्र के राजुरा जैसे इलाकों में भी SIR के जरिए वोटर लिस्ट में बदलाव हुए थे। अब वही ब्लूप्रिंट गुजरात और राजस्थान में दोहराया जा रहा है। इस आरोप ने चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत पर हमला
राहुल गांधी ने SIR को संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को हथियार बनाकर ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को कमजोर किया जा रहा है। उनके शब्दों में, अगर वोटर ही सूची से गायब कर दिए जाएंगे, तो चुनाव का फैसला जनता नहीं बल्कि सत्ता में बैठे लोग करेंगे। यह बयान सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का सवाल खड़ा करता है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए बुनियादी है।
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चुनाव आयोग पर सीधा हमला
राहुल गांधी का सबसे तीखा हमला चुनाव आयोग पर रहा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का संरक्षक नहीं रहा, बल्कि इस कथित वोट चोरी साजिश में मुख्य भूमिका निभा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि जब पार्टी ने इस मुद्दे पर आयोग को पत्र लिखकर जानकारी मांगी, तो कोई जवाब नहीं मिला। इससे संदेह और गहरा हो गया है। गुजरात कांग्रेस ने भी कहा कि आयोग की चुप्पी यह दिखाती है कि वह अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही निभाने में विफल रहा है।
गुजरात कांग्रेस के आरोप, ‘नेक्ट लेवल चुनाव चोरी’
गुजरात कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में इसे ‘नेक्सट लेवल मॉडल ऑफ इलेक्शन थेफ्ट’ करार दिया। पार्टी के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 18 जनवरी को आपत्तियों की अंतिम तारीख तय की गई थी। लेकिन 15 जनवरी तक जहां गिनी-चुनी आपत्तियां आईं, वहीं अंतिम दिनों में अचानक लाखों फॉर्म-7 जमा हो गए। कांग्रेस का कहना है कि यह सब एक संगठित साजिश के तहत हुआ। पार्टी का आरोप है कि इन आपत्तियों ने नियमों का उल्लंघन किया और खास जातियों, वर्गों व क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।
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कांग्रेस का ऐलान, सड़क से संसद तक संघर्ष
गुजरात कांग्रेस ने साफ कहा है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी ने ऐलान किया है कि लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर एक भी नागरिक का वोट छीनने की कोशिश होती है, तो वह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। इसी वजह से पार्टी ने चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग की है।
पहले भी लगे हैं ‘वोट चोरी’ के आरोप
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने वोट चोरी का आरोप लगाया हो। इससे पहले बिहार, हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के चुनावों में भी ऐसे आरोप सामने आ चुके हैं। राहुल गांधी का कहना है कि हर बार पैटर्न एक-सा रहा है और अब वही तरीका गुजरात में अपनाया जा रहा है।
इन आरोपों ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
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लोकतंत्र की परीक्षा की घड़ी
कुल मिलाकर, गुजरात में SIR को लेकर उठे सवाल केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। यह मुद्दा पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी होगी। वहीं, अगर गलत हैं, तो चुनाव आयोग पर लगे आरोपों का जवाब भी उतना ही जरूरी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस विवाद पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और क्या पारदर्शिता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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