Savarkar Bharat Ratna: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सरसंघचालक ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाता है, तो इससे भारत रत्न की गरिमा और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सावरकर की भूमिका और विरासत को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श एक बार फिर तेज हो गया है।
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Savarkar Bharat Ratna पर RSS प्रमुख का बयान
RSS प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि वीर सावरकर का योगदान केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहींथा, बल्कि उन्होंने सामाजिक सुधार, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत रत्न किसी राजनीतिक लाभ का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि राष्ट्र के लिए असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का माध्यम है। इसके अलावा, उन्होंने यह संकेत दिया कि सावरकर को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस को तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

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Savarkar का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
वीर सावरकर का नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती और क्रांतिकारी दौर से जुड़ा रहा है। उन्होंने युवावस्था में ही ब्रिटिश शासन के खिलाफ संगठित आंदोलन की शुरुआत की और विदेशी धरती पर भारत की आज़ादी का मुद्दा उठाया। वहीं दूसरी ओर, सावरकर को काला पानी की सज़ा झेलनी पड़ी, जिसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे कठोर दंडों में गिना जाता है। खास बात यह है कि उस दौर में बहुत कम क्रांतिकारी ऐसे थे, जिन्होंने इतनी लंबी और कठोर कैद का सामना किया।
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सावरकर की विचारधारा और सामाजिक सुधार
राजनीतिक संघर्ष के साथ साथ सावरकर सामाजिक सुधारों के भी पक्षधर रहे। उन्होंने जाति भेदभाव, अस्पृश्यता और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। इसी क्रम में, उन्होंने मंदिर प्रवेश आंदोलन और सामाजिक समरसता की वकालत की। RSS और उससे जुड़े संगठनों का मानना है कि सावरकर की यह भूमिका अक्सर सार्वजनिक विमर्श में कम दिखाई जाती है।
भारत रत्न सम्मान और चयन प्रक्रिया
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। अब तक यह सम्मान राजनीति, विज्ञान, कला, खेल और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वालों को दिया गया है। साथ ही, यह भी उल्लेखनीय है कि भारत रत्न देने की कोई औपचारिक आवेदन प्रक्रिया नहीं होती। सरकार स्वतंत्र विवेक और सलाह के आधार पर निर्णय लेती है।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अलग-अलग दृष्टिकोण
RSS प्रमुख के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ दलों और संगठनों ने इस मांग का समर्थन किया, जबकि कुछ ने सावरकर की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। वहीं दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि स्वतंत्रता संग्राम को केवल एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की आज़ादी सामूहिक प्रयासों का परिणाम थी, जिसमें अलग-अलग विचारधाराओं का योगदान रहा।
Savarkar को लेकर ऐतिहासिक बहस क्यों जारी है
सावरकर भारतीय इतिहास के उन व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिन पर सबसे अधिक शोध, आलोचना और विमर्श हुआ है। उनके लेखन, विचार और राजनीतिक फैसलों की व्याख्या अलग-अलग दौर में अलग तरह से की गई। खास बात यह है कि हाल के वर्षों में ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन (historical reassessment) पर जोर बढ़ा है, जिसके तहत कई स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नए सिरे से देखा जा रहा है।

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RSS का तर्क, सम्मान से बढ़ेगी भारत रत्न की गरिमा
RSS का मानना है कि भारत रत्न किसी व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि महान व्यक्तित्व उस सम्मान की गरिमा बढ़ाते हैं। सरसंघचालक ने इसी तर्क के आधार पर कहा कि सावरकर को सम्मानित करने से पुरस्कार की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय संतुलित और तथ्यात्मक दृष्टि से समझना आवश्यक है।
आगे क्या हो सकता है ?
फिलहाल सरकार की ओर से सावरकर को भारत रत्न देने पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, RSS प्रमुख के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस पर कोई औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन RSS प्रमुख के हालिया बयान ने इस बहस को नई धार दी है। यह विषय केवल सम्मान का नहीं, बल्कि इतिहास, विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की व्यापक समझ से जुड़ा हुआ है।
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