Twisha Sharma Death Mystery: भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले में कई ऐसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
Madhya Pradesh High Court के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने माना कि WhatsApp चैट्स, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों, गवाहों के बयानों और जांच से जुड़े तथ्यों को अनदेखा कर अग्रिम जमानत देना उचित नहीं था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और गर्भपात के लिए दबाव जैसे आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत होते हैं। ऐसे में जांच के शुरुआती चरण में आरोपी को राहत देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
शादी के कुछ महीनों बाद हुई थी मौत
Twisha Sharma Death Mystery के अनुसार ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ हुई थी। शादी के महज कुछ महीनों बाद 12 मई 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक ट्विशा घर में फांसी पर लटकी मिली थी।
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इसके बाद शव को AIIMS Bhopal भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम किया गया। जांच के दौरान मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा और बाद में मृतका के पिता, राज्य सरकार तथा सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी।
हाईकोर्ट में दाखिल हुईं दो याचिकाएं
मामले में पहली याचिका मध्यप्रदेश सरकार और सीबीआई की ओर से दाखिल की गई, जबकि दूसरी याचिका मृतका के पिता नवनीधि शर्मा की तरफ से दायर की गई। दोनों याचिकाओं में मुख्य मांग यही थी कि आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द की जाए।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने खुद को पक्षकार बनाने की मांग भी की। एजेंसी की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार ने जांच दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट यानी सीबीआई को सौंप दी है और 25 मई 2026 को नई एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। कोर्ट ने सीबीआई को पक्षकार बनने की अनुमति देते हुए दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई की।
WhatsApp चैट्स बने जांच का बड़ा आधार
Twisha Sharma Death Mystery सुनवाई के दौरान मृतका के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कई WhatsApp चैट्स का हवाला दिया। इन चैट्स में ट्विशा ने कथित तौर पर अपने माता-पिता को बताया था कि पति और ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। चैट्स में यह भी दावा किया गया कि उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया जा रहा था।
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ट्विशा ने अपने परिवार को यह भी बताया था कि वह ससुराल में खुद को पूरी तरह फंसा हुआ महसूस कर रही है और उसे मायके ले जाने की गुहार लगा रही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने इन महत्वपूर्ण चैट्स और केस डायरी में दर्ज बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छह चोटों का जिक्र
Twisha Sharma Death Mystery में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक फांसी के निशानों के अलावा ट्विशा के शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान पाए गए थे।
इनमें हाथ, उंगलियों और सिर पर चोटें शामिल थीं। AIIMS की क्वेरी रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें शव को नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं। हाईकोर्ट ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने इन तथ्यों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया।
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सीबीआई और राज्य सरकार ने क्या दलील दी?
सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शादी के बाद ट्विशा गर्भवती हुई थी, जिसके बाद पति और सास द्वारा उसके चरित्र पर सवाल उठाए जाने लगे। अदालत में कहा गया कि WhatsApp चैट्स से गर्भपात के दबाव और मानसिक उत्पीड़न की बात सामने आती है।
इसके अलावा आरोप लगाया गया कि CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की गई और चुनिंदा वीडियो सोशल मीडिया पर लीक किए गए। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि नोटिस जारी होने के बावजूद गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग के लिए उपस्थित नहीं हुईं।
बचाव पक्ष ने आत्महत्या का दावा किया
वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि ट्विशा ने आत्महत्या की थी और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया था।
बचाव पक्ष ने अदालत में कुछ तस्वीरें और पत्र भी पेश किए, जिनमें कथित तौर पर ट्विशा ने अपनी सास की तारीफ की थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि WhatsApp चैट्स में मुख्य आरोप पति समर्थ सिंह के खिलाफ हैं, गिरिबाला सिंह के खिलाफ नहीं।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केवल इस आधार पर राहत दी कि शिकायतों का मुख्य केंद्र पति था। लेकिन अदालत ने यह नहीं देखा कि गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य सास के खिलाफ भी आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि शादी के कुछ ही महीनों बाद महिला की संदिग्ध मौत होना अपने आप में गंभीर परिस्थिति है। ऐसे मामलों में जांच के शुरुआती चरण में जल्दबाजी में राहत नहीं दी जानी चाहिए।
जांच में सहयोग न करने पर भी टिप्पणी
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं।
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कोर्ट ने माना कि आरोपी प्रभावशाली पृष्ठभूमि से जुड़ी हैं और उन्हें साइबर फॉरेंसिक तथा क्राइम सीन मैनेजमेंट की विशेष ट्रेनिंग भी मिली हुई है। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने रद्द की अग्रिम जमानत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद Madhya Pradesh High Court ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा 15 मई 2026 को दिया गया अग्रिम जमानत आदेश टिकाऊ नहीं है।
कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, WhatsApp चैट्स और जांच में कथित असहयोग को देखते हुए आरोपी को दी गई राहत उचित नहीं थी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। यह फैसला अब इस बहुचर्चित मामले की जांच को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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