Chief Minister Self Employment: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के युवाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 3848 लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹33.22 करोड़ की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की गई। यह पहल न केवल आर्थिक सहायता का माध्यम है, बल्कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” के संकल्प को जमीन पर उतारने का एक ठोस प्रयास भी है। राज्य सरकार का मानना है कि स्वरोजगार ही वह रास्ता है जिससे युवाओं को अपने ही गांव और शहरों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और उन्हें पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
उत्तराखंड लंबे समय से पलायन की समस्या से जूझता रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों से रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में बड़ी संख्या में युवाओं का मैदानी इलाकों या अन्य राज्यों की ओर पलायन हुआ है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने इस चुनौती का समाधान स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के जरिए करने की कोशिश की है। इस योजना के तहत युवाओं को छोटे उद्योग, स्वरोजगार, स्टार्टअप, कृषि आधारित व्यवसाय, पशुपालन, पर्यटन, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र से जुड़े कार्यों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि कई युवा अब अपने ही क्षेत्र में रोजगार शुरू कर रहे हैं और दूसरों को भी काम दे रहे हैं।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि यह योजना राज्य में रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। जो लोग पहले रोजगार के लिए बाहर गए थे, वे अब अपने गांव लौटकर स्वरोजगार शुरू कर रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी सुदृढ़ हो रहा है। गांवों में फिर से गतिविधियां बढ़ रही हैं और युवाओं में आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।
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योजना की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2025 से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 (MSY 2.0) की शुरुआत की है। इस नए चरण में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और नैनो योजना का एकीकरण किया गया है, जिससे लाभार्थियों को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से सहायता मिल सके। MSY 2.0 के तहत स्वरोजगार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है और वित्तीय सहयोग के साथ-साथ प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड के युवा केवल नौकरी तलाशने वाले न रहें, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। इसके लिए उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 इसी सोच का विस्तार है, जहां युवाओं को नई तकनीक, नवाचार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटन, होमस्टे, ऑर्गेनिक खेती, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में इस योजना के तहत नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
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राज्य सरकार का यह भी मानना है कि DBT के माध्यम से सीधे खातों में धनराशि हस्तांतरण से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। लाभार्थियों को समय पर सहायता मिलने से वे अपने व्यवसाय की योजना बेहतर तरीके से बना पा रहे हैं। इससे योजनाओं पर लोगों का भरोसा भी बढ़ा है और सरकारी नीतियों का सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंच रहा है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और MSY 2.0 उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक वास्तविक गेम चेंजर के रूप में उभर रही है। यह योजना आत्मनिर्भर उत्तराखंड के सपने को साकार करने, पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को मजबूती देने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है। आने वाले समय में इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है और उत्तराखंड अपने संसाधनों और युवाशक्ति के बल पर विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।
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