Cooperation for Prosperity in Uttar Pradesh: प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा दिया गया ‘सहकार से समृद्धि, सहकार से आत्मनिर्भरता’ का विजन आज देश की सहकारी व्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में आयोजित युवा सहकार सम्मेलन एवं यूपी को-ऑपरेटिव एक्सपो-2025 राज्य के सहकारिता आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभरा। इस भव्य आयोजन में सहकारिता से जुड़े युवाओं, किसानों, स्वयं सहायता समूहों और नवाचार से जुड़े उद्यमियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री Suresh Prabhu की उपस्थिति ने सम्मेलन को राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रदान किया। मंच से सहकारिता के भविष्य, युवाओं की भूमिका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक मॉडल नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम है, जो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने में सक्षम है।
इस अवसर पर सहकारिता विभाग की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश में सहकारी संस्थाओं द्वारा किए गए सफल प्रयोगों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, पारदर्शिता, महिला सशक्तिकरण और किसान हितैषी योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। यह दस्तावेज न केवल नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी है, बल्कि युवाओं को सहकारिता के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने की प्रेरणा भी देता है।
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सम्मेलन के दौरान सहकारिता के सर्वांगीण विकास में योगदान देने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने यह संदेश स्पष्ट किया कि सरकार केवल योजनाएं ही नहीं बना रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पहचान और प्रोत्साहन भी दे रही है। इससे सहकारी संस्थाओं में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
यूपी को-ऑपरेटिव एक्सपो-2025 में सहकारी उत्पादों, स्टार्टअप मॉडल, कृषि आधारित नवाचार, डेयरी, हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्योगों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। यहां यह साफ नजर आया कि सहकारिता आज परंपरागत ढांचे से निकलकर आधुनिक तकनीक, मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रही है। यही बदलाव उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने की क्षमता रखता है।
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प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप, उत्तर प्रदेश में सहकारिता को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा जा रहा है। युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर मूल्य और महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने में सहकारी मॉडल अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह नीति, तकनीक और जनभागीदारी का तालमेल बना रहा, तो सहकारिता आने वाले वर्षों में राज्य की ग्रोथ इंजन बन सकती है।
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कुल मिलाकर, यह सम्मेलन ‘नए उत्तर प्रदेश’ की समृद्धि और सामूहिक विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होता दिख रहा है। सहकार से समृद्धि का यह संदेश न केवल मंच तक सीमित रहा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन की उम्मीद भी जगाकर गया।
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