Haryana farmers relief ₹380 crore: हरियाणा के किसानों के लिए यह समय बड़ी राहत और भरोसे का बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बाजरा किसानों को लेकर एक ऐसा फैसला किया है, जिसे सीधे तौर पर “खेत से खाते तक” की नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। राज्य सरकार ने बाजरा किसानों के लिए ₹380 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खातों में जारी कर दी है। यह कदम न केवल किसानों की आय को सहारा देने वाला है, बल्कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP व्यवस्था पर सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।
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हरियाणा में बाजरा एक महत्वपूर्ण खरीफ फसल है, खासकर सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में रहने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और बाजार में दामों की उठापटक के बीच बाजरा किसानों को लंबे समय से बेहतर समर्थन की मांग थी। ₹380 करोड़ की यह राशि उन किसानों को दी गई है जिन्होंने सरकार द्वारा तय MSP पर बाजरा बेचा था। भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ कहा है कि सरकार किसानों की मेहनत का पूरा मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। MSP केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीन पर लागू होने वाली व्यवस्था है। यही वजह है कि हरियाणा उन राज्यों में शामिल है जहां MSP पर खरीद को सबसे गंभीरता से लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि राज्य में सभी 24 फसलों की खरीद MSP पर सुनिश्चित की जा रही है, जो अपने आप में एक बड़ा कदम है।
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बाजरा किसानों को मिली यह राहत सिर्फ एक बार की मदद नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। जब ₹380 करोड़ जैसी बड़ी राशि सीधे गांवों में पहुंचेगी, तो इसका असर खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। खाद, बीज, कृषि यंत्र, पशुपालन और स्थानीय बाजारों में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। किसान अपनी अगली फसल की तैयारी ज्यादा आत्मविश्वास के साथ कर सकेंगे।
सरकार का फोकस केवल MSP तक सीमित नहीं है। फसल बीमा योजना को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि, सूखा या बाढ़ जैसी स्थितियों में किसानों को बड़ा नुकसान न उठाना पड़े। हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो और खेती एक सुरक्षित पेशा बने। बीमा क्लेम के भुगतान को तेज और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसके साथ-साथ सब्सिडी की व्यवस्था को भी सरल बनाया गया है। बीज, खाद, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर, कृषि यंत्रों और आधुनिक तकनीक पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है। इससे न केवल खेती की लागत घट रही है, बल्कि आधुनिक और टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है। बाजरा जैसी मोटे अनाज की फसलों को सरकार खासतौर पर प्रोत्साहित कर रही है, क्योंकि ये कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
हरियाणा सरकार का यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाज को बढ़ावा देने की नीति से भी जुड़ा हुआ है। बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलें आज ‘श्री अन्न’ के नाम से पहचानी जा रही हैं। इनकी मांग देश और विदेश दोनों जगह बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को MSP, बीमा और सब्सिडी का मजबूत सुरक्षा कवच देकर सरकार उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रही है।
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₹380 करोड़ की राशि जारी होने के बाद किसानों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। कई किसान संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया है। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से उनकी सबसे बड़ी चिंता दूर हुई है। कर्ज चुकाने, बच्चों की पढ़ाई और अगली फसल की तैयारी में यह पैसा बड़ी मदद करेगा।
राज्य सरकार यह भी दावा कर रही है कि आगे चलकर डिजिटल सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा ताकि खरीद, भुगतान और सब्सिडी की पूरी प्रक्रिया और तेज हो सके। ई-खरीद पोर्टल, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाएं किसानों के लिए खेती को ज्यादा आसान बना रही हैं।
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कुल मिलाकर, बाजरा किसानों के लिए ₹380 करोड़ की यह राहत केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि सरकार किसान को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानती है। MSP पर सभी 24 फसलों की खरीद, मजबूत बीमा व्यवस्था और सीधी सब्सिडी के जरिए हरियाणा सरकार खेती को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। अगर यह मॉडल इसी तरह जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होता रहा, तो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण भारत को मजबूत करने में यह एक अहम भूमिका निभा सकता है।
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