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Reading: Ayodhya Ram Mandir News : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ, अयोध्या से उठती सनातन चेतना और राष्ट्रबोध का संदेश
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Home - Ayodhya Ram Mandir News : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ, अयोध्या से उठती सनातन चेतना और राष्ट्रबोध का संदेश

AasthaAyodhyaRajya

Ayodhya Ram Mandir News : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ, अयोध्या से उठती सनातन चेतना और राष्ट्रबोध का संदेश

अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भव्य उत्सव, जिससे पूरा देश भावनात्मक रूप से जुड़ा दिखाई देता है।

Last updated: दिसम्बर 31, 2025 6:18 अपराह्न
KARTIK SHARMA - Sub Editor Published दिसम्बर 31, 2025
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Devotees celebrating the second anniversary of Ram Mandir Pran Pratishtha at Ayodhya with illuminated temple, prayers, and spiritual atmosphere.
अयोध्या की पावन धरा से उठा श्रद्धा और राष्ट्रबोध का स्वर—राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर सनातन चेतना का भव्य उत्सव।स्पेशव विश्लेषण टीम
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Highlights
  • अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ: आस्था से राष्ट्रबोध तक का सफर
  • ‘प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह’: सनातन चेतना का जीवंत उत्सव
  • राम मंदिर: केवल धार्मिक केंद्र नहीं, राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक
  • देश-विदेश के रामभक्त और वैश्विक भारतीय पहचान
  • आस्था, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई धुरी बनी अयोध्या

Ram Mandir Pran Pratishtha Anniversary: अयोध्या की पावन धरा पर राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि समकालीन भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनकर उभरी है। दो वर्ष पहले जिस क्षण ने सदियों की प्रतीक्षा को विराम दिया था, वही क्षण आज ‘प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह’ के रूप में एक व्यापक राष्ट्रीय अनुभूति में बदल चुका है। यह आयोजन जितना आध्यात्मिक है, उतना ही राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श के केंद्र में भी है।

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अयोध्या में दिखाई दे रही भव्यता और अनुशासन, यह संकेत देता है कि राम मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक सुव्यवस्थित राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुका है। मंदिर परिसर, सरयू घाट और आसपास का पूरा क्षेत्र जिस तरह श्रद्धालुओं से भरा है, वह यह दर्शाता है कि यह आयोजन किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक जनमानस की सहभागिता का उत्सव है। मंत्रोच्चार, दीप-प्रज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एक साथ मिलकर उस भाव को गढ़ रही हैं, जिसमें श्रद्धा और राष्ट्रबोध का संगम स्पष्ट दिखता है।

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प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह समय केवल उत्सव का नहीं, बल्कि मूल्यांकन का भी है। दो वर्षों में राम मंदिर ने जिस प्रकार से राष्ट्रीय पहचान का रूप लिया है, वह भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास में आए परिवर्तन को रेखांकित करता है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि भारत अब अपने इतिहास और परंपराओं को लेकर संकोच में नहीं है, बल्कि उन्हें खुले तौर पर स्वीकार कर, वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।

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इस पूरे घटनाक्रम पर देश की नजरें इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि राम मंदिर का विमर्श केवल धार्मिक नहीं रहा। यह न्यायिक प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक धैर्य की सामूहिक परीक्षा का परिणाम भी है। जिस तरह दशकों तक चले विवाद का समाधान संवैधानिक दायरे में हुआ, और उसके बाद मंदिर निर्माण तथा आज का उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता को भी दर्शाता है। प्राण-प्रतिष्ठा की वर्षगांठ इस बात की याद दिलाती है कि आस्था और संविधान को टकराव में नहीं, बल्कि संतुलन में रखा जा सकता है।

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‘प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह’ के दौरान संतों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं की एकजुट उपस्थिति यह संकेत देती है कि राम का विचार आज भी समाज को जोड़ने की क्षमता रखता है। राम को यहां केवल पूज्य देवता के रूप में नहीं, बल्कि मर्यादा, करुणा और कर्तव्य के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यही कारण है कि यह आयोजन भावनात्मक होते हुए भी गरिमामय बना हुआ है, जहां आस्था के साथ अनुशासन और संयम भी समान रूप से दिखाई देता है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस वर्षगांठ का प्रभाव देखा जा रहा है। विदेशों में बसे भारतीय समुदायों द्वारा दीप-प्रज्वलन, भजन-कीर्तन और सामूहिक प्रार्थनाएं यह दर्शाती हैं कि राम मंदिर अब वैश्विक भारतीय पहचान का भी एक अहम हिस्सा बन चुका है। यह केवल धार्मिक जुड़ाव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति और भावनात्मक संबंध का विस्तार है, जो सीमाओं से परे जाकर भारतीय मूल्यों को जोड़ता है। आर्थिक और शहरी दृष्टि से भी अयोध्या में हो रहा परिवर्तन इस आयोजन को और व्यापक बनाता है। बुनियादी ढांचे का विकास, पर्यटन में वृद्धि और स्थानीय रोजगार के अवसर यह संकेत देते हैं कि राम मंदिर केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का भी एक प्रमुख आधार बन रहा है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि आस्था और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।

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कुल मिलाकर, राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ आज एक ऐसे पड़ाव के रूप में सामने आई है, जहां अतीत की स्मृति, वर्तमान का आत्मविश्वास और भविष्य की दिशा तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। यह आयोजन भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है, जो यह संदेश देता है कि देश अपनी जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। अयोध्या से उठती यह भावना केवल श्रद्धा तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को भी नई ऊर्जा दे रही है और यही कारण है कि आज पूरा देश इस घटनाक्रम को इतनी गहराई से देख और महसूस कर रहा है।

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