Surajkund International Crafts Fair: हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के भव्य उद्घाटन अवसर पर देश-विदेश से आए शिल्पकारों, कलाकारों और अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन करने के लिए माननीय सी. पी. राधाकृष्णन के प्रति आभार प्रकट किया और कहा कि यह मेला भारत की लोक कला, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है।

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मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। ‘लोकल से ग्लोबल आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ की थीम के साथ शुरू हुआ यह मेला शिल्पकारों को न सिर्फ पहचान देता है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाता है।

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लोक कला और परंपरा का जीवंत उत्सव (Surajkund International Crafts Fair)
सूरजकुंड शिल्प मेला वर्षों से भारतीय लोक कला और हस्तशिल्प की विविधता को दर्शाता आ रहा है। मिट्टी, लकड़ी, धातु, वस्त्र और हस्तनिर्मित आभूषणों से सजे स्टॉल भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला हमारी परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।

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उन्होंने यह भी कहा कि लोक कला केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं से भी जुड़ी हुई है। सूरजकुंड मेला इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है।
शिल्पकारों को वैश्विक मंच (Surajkund International Crafts Fair)
मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेला देश के कोने-कोने से आए शिल्पकारों को एक ऐसा मंच देता है, जहां वे अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और पर्यटकों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे उनकी कला को नई पहचान मिलती है और आय के स्थायी स्रोत विकसित होते हैं।
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साथ ही, विदेशी कलाकारों और शिल्पकारों की भागीदारी से सांस्कृतिक संवाद को भी मजबूती मिलती है। यह आदान-प्रदान भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप ढालने में सहायक साबित हो रहा है।

पर्यटन और रोजगार को नई गति (Surajkund International Crafts Fair)
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाता है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से आने वाले पर्यटक स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय व्यवसायों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला युवाओं और महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि इससे उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते मिलते हैं। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में ऐसे आयोजनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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सामूहिक प्रयास से सफलता का संकल्प (Surajkund International Crafts Fair)
अपने संदेश में मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने कहा, ‘आइए, हम सभी मिलकर लोक संस्कृति के इस महोत्सव को सफल बनाएं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त करें।’ उन्होंने मेले में उपस्थित सभी परिवारजनों, माननीय अतिथियों तथा देश-विदेश से पधारे शिल्पकारों और कलाकारों का हार्दिक स्वागत किया।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिल्पकारों के हित में निरंतर काम कर रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोक कला को प्रोत्साहन देती रहेगी।
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आत्मनिर्भर भारत की मजबूत कड़ी (Surajkund International Crafts Fair)
अंततः, 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारत की सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक सशक्तिकरण और वैश्विक पहचान की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह आयोजन दिखाता है कि जब लोक कला, पर्यटन और रोजगार एक साथ जुड़ते हैं, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना और अधिक सशक्त रूप में सामने आता है।
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