Uttar Pradesh winter night shelters: उत्तर भारत में शीतलहर के बढ़ते प्रकोप के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी नागरिक ठंड में असहाय नहीं छोड़ा जाएगा। कड़ाके की ठंड, गिरते तापमान और घने कोहरे के बीच सबसे ज्यादा जोखिम में वे लोग होते हैं जिनके पास न तो स्थायी छत होती है और न ही पर्याप्त संसाधन। ऐसे समय में प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जनपद में रैन बसेरों की व्यापक व्यवस्था एक मानवीय पहल के रूप में सामने आई है, जिसने जरूरतमंदों को राहत और भरोसा दिया है। प्रदेश सरकार के इस प्रयास का जीवंत उदाहरण आज वाराणसी के टाउन हॉल में देखने को मिला, जहां संचालित रैन बसेरों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान वहां मौजूद सुविधाओं की विस्तार से जानकारी ली गई और रैन बसेरों में ठहरे लोगों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं को समझा गया। इस दौरान भोजन और कंबलों का वितरण भी किया गया, जिससे ठंड से जूझ रहे लोगों को तत्काल राहत मिली।
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रैन बसेरे: केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षा का भरोसा
रैन बसेरे केवल रात गुजारने की जगह नहीं हैं, बल्कि वे सुरक्षा, सम्मान और संवेदना का प्रतीक बन चुके हैं। यहां ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त कंबल, स्वच्छ बिस्तर, पीने का साफ पानी, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई स्थानों पर गर्म भोजन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि ठंड के मौसम में किसी को भूखा न रहना पड़े। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि रैन बसेरों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नगर प्रशासन और सामाजिक संगठनों के सहयोग से इन केंद्रों को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यही है कि शीतलहर के कारण किसी भी नागरिक के स्वास्थ्य या जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
वाराणसी से मिला संवेदनशील प्रशासन का संदेश
वाराणसी के टाउन हॉल स्थित रैन बसेरे में जब अधिकारियों ने वहां ठहरे लोगों से बातचीत की, तो कई भावुक क्षण भी सामने आए। बुजुर्गों, मजदूरों और बेसहारा लोगों ने सरकार की इस पहल के लिए आभार जताया। उनका कहना था कि ठंड की रातों में जब सड़कों पर रहना मुश्किल हो जाता है, तब रैन बसेरे उन्हें सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं। कंबल और भोजन वितरण के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि सरकार का लक्ष्य केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि शीतलहर के दौरान प्रशासन को सतर्क रहने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
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डबल इंजन सरकार का सेवा-संकल्प
प्रदेश में डबल इंजन सरकार का यह दावा बार-बार दोहराया गया है कि सेवा, संवेदना और सुरक्षा शासन की प्राथमिकता है। शीतलहर के समय रैन बसेरों की व्यवस्था उसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सरकार का मानना है कि विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा और सुविधा पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। इस दिशा में स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों को एक साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। रात के समय सड़कों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर गश्त कर बेसहारा लोगों को रैन बसेरों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल ठंड से होने वाली बीमारियों और दुर्घटनाओं को रोका जा रहा है, बल्कि मानवीय मूल्यों को भी मजबूत किया जा रहा है।
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स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष फोकस
शीतलहर के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं, खासकर बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए। इसे ध्यान में रखते हुए रैन बसेरों में प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था रखी गई है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी अस्पतालों से भी संपर्क किया जाता है। इसके अलावा, ठंड से बचाव के लिए लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं और लोगों को खुले में न सोने की अपील की जा रही है। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि रैन बसेरों की संख्या जरूरत के अनुसार बढ़ाई जाए। जिन क्षेत्रों में बेसहारा लोगों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त अस्थायी रैन बसेरे भी बनाए गए हैं।
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संवेदनशीलता से मजबूत होता विश्वास
शीतलहर के इस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार की पहल ने यह साबित किया है कि संवेदनशील शासन केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जमीन पर दिखता भी है। वाराणसी में रैन बसेरों का निरीक्षण और वहां सुविधाओं का जायजा लेना उसी विश्वास को मजबूत करता है कि सरकार हर परिस्थिति में अपने नागरिकों के साथ खड़ी है। कुल मिलाकर, रैन बसेरों की यह व्यवस्था न केवल ठंड से बचाव का माध्यम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक अकेला नहीं है। सेवा, संवेदना और सुरक्षा के संकल्प के साथ Government of Uttar Pradesh और स्थानीय प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि शीतलहर के इस कठिन समय में हर जरूरतमंद को राहत, सम्मान और सुरक्षित आश्रय मिल सके।
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