Veer Bal Diwas Brajesh Pathak: सच्चाई, आत्मसम्मान और संस्कृति की रक्षा के लिए खड़े होना ही किसी भी सभ्य समाज का सबसे बड़ा धर्म है। यही मूल्य राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देते हैं। यह बात उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वीर बाल दिवस के अवसर पर कृष्णानगर में आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि वीर बाल दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि त्याग, साहस और धर्मनिष्ठा की अमर गाथा है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—की शहादत को समर्पित है, जिन्होंने मुगल शासक औरंगज़ेब के अत्याचार और दबाव के बावजूद अपने धर्म और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। बहुत कम उम्र में उन्होंने हंसते-हंसते बलिदान का मार्ग चुना और इतिहास में अमर हो गए।
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उन्होंने कहा कि साहिबजादों की शहादत यह सिखाती है कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। जब विचार पवित्र हों और आत्मसम्मान अडिग हो, तब बालक भी इतिहास की दिशा बदल सकते हैं। यही कारण है कि वीर बाल दिवस बच्चों और युवाओं के लिए विशेष प्रेरणा का स्रोत है। यह दिन उन्हें धर्म, नैतिकता, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध का संदेश देता है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं है, बल्कि साहिबजादों की वीरगाथा को बिंदुवार और तथ्यात्मक रूप से जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों ने इतिहास की कई सच्चाइयों को या तो नजरअंदाज किया या सही ढंग से जनता के सामने नहीं रखा। आज आवश्यकता है कि देश और प्रदेश की नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को जाने, समझे और उससे प्रेरणा ले।
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ब्रजेश पाठक ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान केवल सिख इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण भारतीय सनातन परंपरा का गौरव है। उन्होंने सनातन संस्कृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है, जब समाज को वैचारिक दृढ़ता और नैतिक साहस की आवश्यकता है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उससे जीवन मूल्यों को आत्मसात करें। सत्य के मार्ग पर चलना, अन्याय के सामने न झुकना और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही सच्ची देशभक्ति है। वीर बाल दिवस हमें यही सिखाता है कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए सोचना ही सच्चा धर्म है।
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कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वीर बाल दिवस जैसे आयोजन बच्चों और युवाओं में आत्मगौरव और आत्मविश्वास जगाने का कार्य करते हैं। इससे उनमें यह भावना मजबूत होती है कि भारत की संस्कृति त्याग, सहिष्णुता और साहस की संस्कृति रही है। सरकार द्वारा ऐसे आयोजनों के माध्यम से इतिहास के प्रेरणादायी अध्यायों को सामने लाने का प्रयास सराहनीय है।
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अंत में डिप्टी सीएम ने कहा कि जब तक समाज अपने नायकों को याद रखेगा और उनके आदर्शों पर चलेगा, तब तक राष्ट्र सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहेगा। वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है सत्य, आत्मसम्मान और संस्कृति की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में खड़े रहने का संकल्प।
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