Yogi Adityanath Assembly Remark: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान राजनीति उस वक्त और गरमा गई जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने नेता प्रतिपक्ष Mata Prasad Pandey पर तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोल दिया। सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “आप आमतौर पर सच बोलते हैं, लेकिन आज लगता है कि Shivpal Yadav के पास बैठने का आप पर बुरा असर पड़ा है।” इस टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा, ठहाके और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
यह बयान उस समय आया जब विपक्ष सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सरकार की नीतियों और फैसलों पर हमला बोल रहे थे, तभी मुख्यमंत्री योगी ने अपने जवाब के दौरान यह टिप्पणी की। सीएम योगी का यह अंदाज न सिर्फ तीखा था, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक संदेश से भरा हुआ भी माना जा रहा है।
यूपी विधानसभा में इस तरह की तीखी नोकझोंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री का यह कथन इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के आंतरिक राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा किया गया। शिवपाल यादव को समाजवादी राजनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है और उनका नाम आते ही सियासी माहौल गरमा जाता है। योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि शिवपाल के साथ बैठने का “बुरा असर” पड़ा है, विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी इस तरह के बयानों के जरिए न केवल विपक्ष को घेरते हैं, बल्कि अपने समर्थकों के बीच एक मजबूत और आक्रामक नेता की छवि भी पेश करते हैं। वहीं विपक्ष इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताकर मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा ले रही है।
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इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे “करारा जवाब” बता रहे हैं तो आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष से ज्यादा कुछ नहीं मान रहे। ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इस बयान के वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे इसकी पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ गए हैं। यही वजह है कि यह बयान फिलहाल यूपी की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है।
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अगर व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जाए, तो यह टिप्पणी आने वाले चुनावी माहौल का भी संकेत देती है। विधानसभा के भीतर की भाषा और तीखापन यह दिखाता है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी अपने सख्त और स्पष्ट बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, और यह बयान उसी कड़ी का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
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कुल मिलाकर, यूपी विधानसभा में दिया गया यह बयान सिर्फ एक तंज नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही गहरी राजनीतिक लड़ाई का प्रतीक है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस पर क्या रणनीति अपनाता है और क्या यह बयान आगे की राजनीति में कोई नया मोड़ लाता है या नहीं।
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