Asaduddin Owaisi on SIR: चुनाव सुधार (Electoral Reforms) पर लोकसभा में चल रही बहस आज उस समय बेहद तीखी हो गई जब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने SIR को लेकर सरकार पर करारा प्रहार किया। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा SIR यानी ‘Search, Identity & Reverification’ के उद्देश्य को स्पष्ट किए जाने के बाद ओवैसी ने अपने तर्कों के साथ सदन में एक बार फिर यह बहस ज्वलंत कर दी कि क्या यह सुधार लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा या फिर इसे कमजोर करने की ओर ले जाएगा।
ओवैसी ने कहा कि SIR और NRC का यह ‘बैकडोर वर्ज़न’ भारत के कमजोर वर्गों, गरीबों, प्रवासी मज़दूरों और अल्पसंख्यक समुदाय पर सबसे गहरा प्रभाव डालेगा। उन्होंने सीधा सवाल रखते हुए कहा कि क्या सरकार स्पष्ट कर सकती है कि जिनके पास दस्तावेज़ नहीं हैं, जो मज़दूरी करते हुए प्रदेश-प्रदेश घूमते हैं, वे अपनी पहचान लगातार दोबारा साबित कैसे करेंगे?
सदन में अपनी जोशीली शैली में बोलते हुए ओवैसी ने कहा, ‘चुनाव आयोग Supreme Court और संसद से ऊपर नहीं हो सकता… और न ही ऐसा कोई कानून बनाया जा सकता है जो नागरिकों को बार-बार अपनी भारतीयता साबित करने पर मजबूर करे।‘ यह बयान सदन में मौजूद सांसदों के बीच तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना, जिससे बहस का तापमान और बढ़ गया।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को समान अधिकार देता है, और किसी भी सुधार का उद्देश्य लोकतंत्र को ‘समावेशी’ बनाना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग को संदेह की निगाह से देखना। ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायिक समीक्षा का प्रावधान पर्याप्त रूप से मौजूद है?
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ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ‘फ्री एंड फेयर चुनाव” के नाम पर ऐसे कानून ला रही है, जिनसे मतदाता सूची की पुन जांच के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से यह मांग की कि SIR पर विस्तृत स्पष्टता दी जाए और इसकी प्रक्रिया को मानवीय, सरलऔर गैर-भेदभावपूर्ण बनाया जाए।
इसके साथ ही ओवैसी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट डालने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नागरिकों का भरोसा भी है। यदि नागरिकों को यह डर लगे कि उनकी वैध पहचान पर भी शक किया जा रहा है, तो इससे लोकतांत्रिक सहभागिता कमजोर होगी।
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उनका यह भाषण न केवल सदन में सुर्खियों में रहा बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया, जहां #AsaduddinOwaisi, #SIRBill, #ElectoralReforms जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। चुनाव सुधारों पर सरकार और विपक्ष की टकराहट के बीच यह साफ है कि SIR आने वाले दिनों में राजनीति के केंद्र में रहने वाला मुद्दा है। सरकार इसे चुनावों को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का महत्वपूर्ण कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष का मानना है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक और सामाजिक रूप से कमजोर समुदायों को प्रभावित करने में हो सकता है।
लोकसभा में आज की बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि SIR पर राजनीति अभी खत्म नहीं होने वाली। आने वाले दौर में इस विधेयक को लेकर और भी व्यापक चर्चा और मतभेद देखने को मिल सकते हैं।
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