Chhattisgarh IED blast woman constable: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में एक नियमित सुरक्षा ऑपरेशन के दौरान IED (Improvised Explosive Device) ब्लास्ट में एक महिला कांस्टेबल के घायल होने की घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा बलों के सामने मौजूद जोखिम और चुनौतियों को उजागर कर दिया है। यह घटना राज्य के दक्षिणी हिस्से में उस समय हुई जब सुरक्षा जवान पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात थे।
घटना कैसे हुई, गश्ती दल पर घातक वार
सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सुरक्षाबल का दल जंगल क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर रहा था। इसी दौरान रास्ते में जमीन के नीचे दबाए गए IED में विस्फोट हुआ। ब्लास्ट का झटका इतना तेज था कि पास में चल रही महिला कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत पास के कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया।

घायल महिला कांस्टेबल, साहस और जिम्मेदारी का परिचय
घायल कांस्टेबल पिछले दो वर्षों से सुकमा में पोस्टेड हैं और कई अभियानों का हिस्सा रह चुकी हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि उनके जज़्बे और ड्यूटी के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें ऑपरेशनल टीम में शामिल किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल उनका उपचार जारी है और स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
नक्सली रणनीति, IED बिछाकर नुकसान पहुंचाना
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सली अक्सर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए IED का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह डिवाइस आमतौर पर मिट्टी में गहराई तक दबाया जाता है और दबाव या ट्रिगर के संपर्क में आते ही विस्फोट करता है। विशेषज्ञों के अनुसार,
- IED का पता लगाना कठिन होता है
- घने जंगल और कच्चे रास्ते सुरक्षा खतरे को बढ़ाते हैं
- नक्सलियों की स्थानीय भौगोलिक जानकारी उन्हें रणनीतिक बढ़त देती है
नक्सली रणनीति, IED बिछाकर नुकसान पहुंचाना
सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया: सर्च ऑपरेशन और इलाके की घेराबंदी
विस्फोट के बाद तुरंत बैकअप टीम भेजी गई और क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है और सुरक्षाबलों द्वारा अन्य संभावित IED डिवाइसों की तलाश भी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
महिलाएं अग्रिम पंक्ति में, बदलता सुरक्षा परिदृश्य
यह घटना दिखाती है कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिलाएं अब केवल सपोर्ट भूमिकाओं में नहीं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर भी सक्रिय हैं। कई महिला सिपाही, कॉन्स्टेबल और अधिकारी अब गश्ती, खोज अभियान, इन-ग्राउंड ऑपरेशन और खुफिया गतिविधियों में शामिल हैं।
सुरक्षा, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी
सुकमा की यह घटना सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण विस्फोट नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी देना कितना जोखिम भरा होता है। महिला कांस्टेबल की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा सराहनीय है, और यह स्पष्ट संकेत है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था में महिलाएं भी बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। इस घटना से जुड़े सावधानी उपाय और सुरक्षा रणनीतियाँ आगे भी सुरक्षा बलों के ऑपरेशनल प्लान में अहम भूमिका निभाएंगी।
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