Detect-Delete-Deport Amit Shah Parliament Winter Session: लोकसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार का दिन पूरी तरह गृहमंत्री अमित शाह के नाम रहा। चुनाव सुधारों पर चर्चा शुरू हुई ही थी कि सदन का माहौल गरमा गया। विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी, सवाल और बीच में वॉकआउट सब कुछ एक ही भाषण के दौरान होता रहा। लेकिन इन सबके बीच अमित शाह ने बेहद सरल और साफ शब्दों में वह संदेश दे दिया, जिसने पूरे राजनीतिक वातावरण को नई दिशा दे दी। उन्होंने अपने भाषण में ‘Detect-Delete-Deport’ यानी ट्रिपल D का जिक्र करते हुए कहा कि यही भारत की घुसपैठ-रोधी नीति का असली आधार है। घुसपैठियों को पहचानना, उन्हें सूची से हटाना और फिर उन्हें देश से बाहर भेजना बिल्कुल तीन स्पष्ट चरणों में।
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गृह मंत्री का भाषण जिस तरह आगे बढ़ा, वह विपक्ष के लिए असहज साबित हुआ। जैसे ही उन्होंने SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर बोलना शुरू किया, कांग्रेस के सांसदों ने वॉकआउट कर दिया। लेकिन शाह ने उसी दौरान एक तीखा सवाल उछाल दिया ‘ये क्यों सदन छोड़कर भाग गए? मैं तो कांग्रेस की बात ही नहीं कर रहा था, मैं तो घुसपैठियों पर बात कर रहा था।‘ उनकी यह पंक्ति सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गई और ट्रिपल D की चर्चा तेजी से फैल गई।
अमित शाह ने राहुल गांधी से हुई तीखी बहस का जिक्र किए बिना भी विपक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि 2004 तक किसी भी दल ने SIR का विरोध नहीं किया था। क्योंकि यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करती है। यदि मतदाता सूची गलत है, मृत व्यक्ति के नाम दर्ज हैं, या घुसपैठियों के नाम शामिल हैं, तो चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। इसलिए SIR—Special Intensive Revision—मतलब मतदाता सूची का गहन, घर-घर जाकर किया जाने वाला सत्यापन, बेहद जरूरी कदम है। चुनाव आयोग ने इसी उद्देश्य से 2025 में देशभर में SIR शुरू करने का फैसला लिया है, ताकि हर वोटर लिस्ट अपडेट हो, हर नाम प्रामाणिक हो और हर वोट सही हाथ तक पहुंचे।
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शाह का तर्क बिल्कुल स्पष्ट था साफ वोटर लिस्ट, साफ चुनाव और मजबूत लोकतंत्र। उन्होंने कहा कि अगर आधारभूत दस्तावेज़ ही गलत होंगे तो पूरी चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? SIR का मकसद किसी समुदाय, किसी क्षेत्र या किसी पार्टी के समर्थकों को निशाना बनाना नहीं है। यह केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बिना किसी भी चुनाव में वास्तविक स्थिति को समझ पाना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए चुनाव आयोग की यह पहल लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
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अमित शाह ने अपने भाषण में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस के पुराने नेताओं ने भी चुनावी सुधारों का समर्थन किया था। लेकिन आज जब तकनीक के साथ और भी बेहतर अपडेट संभव है, तब ही विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि SIR किसी राजनीतिक लाभ या नुकसान की योजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी शुचिता से जुड़ा विषय है।
ट्रिपल D—Detect, Delete, Deport—का सामरिक संदेश भी इसी संदर्भ से जुड़ा है। शाह ने साफ कहा कि घुसपैठ केवल जनसंख्या संतुलन को नहीं बिगाड़ती, बल्कि सुरक्षा, सियासत और संसाधनों पर भारी असर डालती है। इसलिए भारत को इस चुनौती से निर्णायक रूप से निपटना ही होगा। संसद में उनका यह बयान अब तक की बहसों में सबसे स्पष्ट और प्रभावी माना जा रहा है।
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शाह का पूरा भाषण एक ही बात को मजबूती से स्थापित करता है कि चुनाव सुधार सिर्फ राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र को सुरक्षित रखने का अनिवार्य हिस्सा हैं। चाहे ट्रिपल D हो या SIR, दोनों ही प्रक्रियाएं देश की चुनाव प्रणाली को अधिक सटीक, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अपरिहार्य हैं।
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