Giriraj Singh Statement Begusara: बेगूसराय की धरती से एक बार फिर सियासत का टेम्परेचर हाई हो चुका है। यूनियन मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने महागठबंधन, वेस्ट बंगाल की CM ममता बनर्जी, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और RJD लीडर तेजस्वी यादव की बिहार यात्रा पर ऐसे तीर छोड़े हैं, जिससे पूरा पॉलिटिकल नैरेटिव हिल गया है। यह सिर्फ बयान नहीं, बाल्की 2026–27 के बिहार पावर गेम का ट्रेलर माना जा रहा है।
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बेगूसराय से सीधा संदेश
बेगूसराय में मीडिया से बात करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि महागठबंधन सिर्फ कुर्सी का जोड़ है, विचार का नहीं। उनका कहना था कि जब तक अलायंस का एजेंडा सिर्फ पावर में रहेगा, तब तक जनता का भरोसा मिलना मुश्किल है। गिरिराज ने यह भी जोड़ा कि बिहार की पब्लिक ने पहले भी ऐसे एक्सपेरिमेंट देखे हैं, जहां वादे ज्यादा और डिलीवरी कम रही।
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ममता बनर्जी पर सीधा अटैक
गिरिराज सिंह ने वेस्ट बंगाल का रेफरेंस देते हुए ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल में लॉ एंड ऑर्डर और पॉलिटिकल वायलेंस के मुद्दे सबके सामने हैं, और वही मॉडल अगर बिहार में बेचने की कोशिश की जा रही है, तो जनता उसे एक्सेप्ट नहीं करेगी। गिरिराज का कहना था कि इम्पोर्टेड पॉलिटिक्स बिहार की मिट्टी के साथ फिट नहीं बैठती।
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ओवैसी फैक्टर और वोट कट थ्योरी
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी को लेकर गिरिराज सिंह ने खुलकर कहा कि ओवैसी का रोल हर इलेक्शन में सेम पैटर्न फॉलो करता है वोट कटिंग। उन्होंने दवा की कि ओवैसी की पॉलिटिक्स आइडियोलॉजिकल कम और टैक्टिकल ज्यादा होती है। गिरिराज ने यह भी कहा कि बिहार के वोटर्स अब इस गेम को समझ चुके हैं, और सिर्फ भाषण से फैसला नहीं करते।
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तेजस्वी यादव की बिहार यात्रा
तेजस्वी यादव की बिहार यात्रा पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि यात्रा से ज्यादा जरूरी ट्रैक रिकॉर्ड होता है। उनका कहना था कि सिर्फ रैलियों और यात्राओं से विकास नहीं होता, बाल्की गवर्नेंस से होता है। गिरिराज ने यह भी कहा कि जब RJD पावर में थी, तब बिहार को क्या मिला यह सवाल तेजस्वी को खुद से पूछना चाहिए। गिरिराज सिंह ने महागठबंधन को मजबूरी का अलायंस बताया। उनका कहना था कि जब लीडरशिप और विजन क्लियर न हो, तो अलायंस सिर्फ नंबरों का खेल बन कर रह जाता है। बिहार के वोटर्स डेवलपमेंट, सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी चाहते हैं, ना कि डेली पॉलिटिकल ड्रामा।
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बिहार का मूड क्या कह रहा है?
बेगूसराय और आस-पास के इलाकों में पॉलिटिकल बातचीत यह बताती है कि जनता अब इमोशनल नारों से ज्यादा परफॉर्मेंस देखती है। गिरिराज सिंह ने इसी बात को हाईलाइट करते हुए कहा कि बिहार का वोटर साइलेंट ज़रूर है, लेकिन कन्फ्यूज़ नहीं। एम्प्लॉयमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉ एंड ऑर्डर जैसे मुद्दों पर ही वोट डिसाइड होगा।
2026–27 का बिग पिक्चर
गिरिराज सिंह के बयान पर सिर्फ़ एक रिएक्शन नहीं, बाल्की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी माना जा रहा है। महागठबंधन को घेरना, ममता और ओवैसी के मॉडल पर सवाल उठाना, और तेजस्वी की यात्रा को अकाउंटेबिलिटी के फ्रेम में लाना यह सब एक वेल-प्लान्ड पॉलिटिकल नैरेटिव का हिस्सा लगता है। बिहार की पॉलिटिक्स अब सिर्फ़ जाति या गठबंधन तक सिमित नहीं रही, बाल्की गवर्नेंस वर्सेस एक्सपेरिमेंट की लाइन खड़ी हो रही है।
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फाइनल पंच गिरिराज सिंह ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि बिहार को ट्रायल पॉलिटिक्स नहीं, टेस्टेड गवर्नेंस चाहिए। उनका कहना था कि महागठबंधन जितना भी शोर मचा ले, ज़मीन पर फैसला काम और क्रेडिबिलिटी से ही होगा। बेगूसराय से निकला यह मैसेज सीधा पटना और दिल्ली तक गूंज रहा है बिहार का फ्यूचर सिर्फ वादों पर नहीं, परफॉर्मेंस पर तय होगा।
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