Jordan Museum Crown Prince: अम्मान की सड़कों पर यह कोई साधारण यात्रा नहीं है। गाड़ी आगे बढ़ रही है और उसके भीतर बैठा एक ऐसा चेहरा है, जिसके कंधों पर आने वाले कल का ताज रखा है। जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल-हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय। गंतव्य है द जॉर्डन म्यूज़ियम। लेकिन सच कहें तो यह सफर सिर्फ एक संग्रहालय तक पहुंचने का नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और भविष्य के बीच चल रही एक जीवित बातचीत का है।
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जब किसी देश का युवराज अपने देश के संग्रहालय की ओर जाता है, तो वह सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत देखने नहीं जा रहा होता। वह दरअसल उस स्मृति को देखने जाता है, जो एक राष्ट्र को राष्ट्र बनाती है। जॉर्डन म्यूज़ियम अपने भीतर हजारों साल पुरानी सभ्यताओं की गवाही समेटे हुए है नियोलीथिक काल से लेकर इस्लामी विरासत तक। और इस यात्रा में क्राउन प्रिंस की मौजूदगी अपने आप में एक संदेश है कि विरासत सिर्फ अतीत नहीं होती, वह वर्तमान की ज़िम्मेदारी भी होती है।
कार के शीशे के बाहर अम्मान का बदलता हुआ दृश्य दिखाई देता है। कहीं पुरानी बस्तियाँ, कहीं आधुनिक इमारतें। यह शहर खुद में जॉर्डन की कहानी है परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधता हुआ। ठीक वैसे ही जैसे क्राउन प्रिंस अल-हुसैन की छवि। पश्चिमी शिक्षा, वैश्विक सोच और साथ ही अरब पहचान से गहरा जुड़ाव। यह टकराव नहीं, बल्कि संवाद है।
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द जॉर्डन म्यूज़ियम केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं है। यहां रखा गया डेड सी स्क्रॉल्स का अंश जॉर्डन को वैश्विक सभ्यता के मानचित्र पर स्थापित करता है। यहां रखी मूर्तियां, सिक्के, हथियार और दस्तावेज़ यह बताते हैं कि यह धरती सिर्फ संघर्षों की नहीं, बल्कि विचारों, व्यापार और संस्कृति के आदान-प्रदान की भी भूमि रही है। और जब इस संग्रहालय की ओर एक क्राउन प्रिंस जाता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों को यह संकेत देता है कि सत्ता की जड़ें स्मृति में होती हैं, विस्मृति में नहीं।

असल भाषा में कहें तो यह यात्रा कैमरे के लिए नहीं, चेतना के लिए है। सवाल यह नहीं है कि म्यूज़ियम में क्या रखा है, सवाल यह है कि हम उसे किस नज़र से देखते हैं। क्या वह सिर्फ अतीत की धूल भरी अलमारियां हैं, या फिर वह आईना है जिसमें आज का जॉर्डन खुद को देखता है? क्राउन प्रिंस की यह यात्रा उसी आईने में झांकने की कोशिश लगती है।
आज की दुनिया में जहां राजतंत्र अक्सर प्रतीक भर बनकर रह गए हैं, वहां अल-हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय का यह कदम एक अलग तरह का संकेत देता है। वह संकेत कि नेतृत्व केवल वर्तमान का प्रबंधन नहीं, अतीत की समझ और भविष्य की तैयारी भी है। संग्रहालय तक जाने का रास्ता छोटा है, लेकिन उसके मायने लंबे हैं।
इस सफर में यह भी साफ़ दिखता है कि जॉर्डन अपने युवराज के ज़रिये दुनिया को क्या बताना चाहता है—कि यह देश अपनी जड़ों को लेकर असुरक्षित नहीं है। वह जानता है कि उसकी ताक़त उसकी विविधता और इतिहास में छिपी है। और यही विश्वास उसे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता देता है।
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कार जैसे ही म्यूज़ियम के करीब पहुंचती है, यात्रा भौतिक रूप से समाप्त होने लगती है, लेकिन वैचारिक यात्रा अभी शुरू होती है। क्योंकि संग्रहालय में कदम रखना सिर्फ अंदर जाना नहीं है, बल्कि समय के भीतर उतरना है। और जब एक क्राउन प्रिंस ऐसा करता है, तो वह यह स्वीकार करता है कि सत्ता समय से ऊपर नहीं, समय के भीतर होती है। यही इस यात्रा का असली अर्थ है द जॉर्डन म्यूज़ियम तक पहुंचना नहीं, बल्कि जॉर्डन की आत्मा तक पहुंचना।
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