Kangana Ranaut on MGNREGA name change bill: मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत– रोजगार और आजीविका मिशन–ग्रामीण’ किए जाने वाले विधेयक को लेकर संसद और सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष इस बदलाव को लेकर सरकार पर हमला बोल रहा है और इसे गरीबों के अधिकारों से खिलवाड़ बता रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत का इस मुद्दे पर बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक चर्चा को और गर्म कर दिया है।
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कंगना रनौत ने विपक्ष के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाम बदलने को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि किसी योजना का नाम बदलना उसका उद्देश्य खत्म करना नहीं होता, बल्कि समय और जरूरत के हिसाब से उसे और प्रभावी बनाना होता है। कंगना के मुताबिक, सरकार का फोकस सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।
उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा जब शुरू हुआ था, तब देश की परिस्थितियां अलग थीं। उस समय ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम रोजगार सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन आज भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में योजनाओं का स्वरूप भी उसी सोच के अनुरूप होना चाहिए। कंगना ने कहा कि ‘विकसित भारत– रोजगार और आजीविका मिशन–ग्रामीण’ नाम यह दर्शाता है कि सरकार सिर्फ दिहाड़ी मजदूरी नहीं, बल्कि टिकाऊ आजीविका, कौशल विकास और लंबे समय तक रोजगार के अवसर पैदा करने पर काम कर रही है।
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विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कंगना रनौत ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार गरीबों से रोजगार छीन रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का इरादा गरीब विरोधी होता, तो वह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी पर इतना बड़ा निवेश नहीं करती। कंगना के अनुसार, रोजगार का असली मतलब केवल गड्ढा खोदना और भरना नहीं, बल्कि ऐसे काम देना है जिससे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और लोगों को सम्मानजनक जीवन मिले।
कंगना ने यह भी जोड़ा कि विपक्ष को हर बदलाव में नकारात्मकता खोजने की आदत हो गई है। उन्होंने कहा कि जब देश आगे बढ़ने की बात करता है, तब कुछ लोग सिर्फ पुराने नामों और राजनीति में उलझे रहते हैं। उनके मुताबिक, अगर योजना का नाम बदलने से उसका दायरा बढ़ता है और ज्यादा लोगों को फायदा मिलता है, तो इसमें आपत्ति की कोई वजह नहीं होनी चाहिए।
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भाजपा सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक में रोजगार के अधिकार को खत्म करने की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता है और नए मिशन के तहत कृषि से जुड़े काम, ग्रामीण उद्योग, स्वरोजगार और कौशल आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे गांवों में सिर्फ अस्थायी काम नहीं, बल्कि स्थायी आय के साधन विकसित होंगे।
कंगना रनौत के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भाजपा नेताओं ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रहा है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं और उन्हें डर है कि इससे मनरेगा जैसी गारंटी कमजोर हो सकती है।
हालांकि कंगना ने साफ कहा कि सरकार की नीयत पर शक करना गलत है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना तभी पूरा होगा जब गांव मजबूत होंगे और गांव तभी मजबूत होंगे जब वहां रोजगार और आजीविका के ठोस अवसर होंगे। उनके अनुसार, नया नाम इसी सोच को दर्शाता है और इसका मकसद ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि किसी की मदद छीनना।
कुल मिलाकर, मनरेगा का नाम बदलने को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच कंगना रनौत का बयान सरकार के पक्ष को मजबूती से सामने रखता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इस विधेयक पर बहस किस दिशा में जाती है और क्या सरकार विपक्ष की आशंकाओं को दूर कर पाने में सफल होती है या नहीं।
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