Akhilesh Yadav SIR Debate Lok Sabha: लोकसभा में मंगलवार को वह नज़ारा देखने को मिला, जिसकी आहट पूरे दिन न्यूज-रूम में महसूस की जा रही थी। चुनाव सुधारों और Special Intensive Revision (SIR) पर चल रही चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अचानक खड़े हुए और इसके बाद सदन का माहौल पल में बदल गया। विपक्ष की बेंचों से तालियां, सत्ता पक्ष की तरफ से तीखी टोके और बीच में खड़े अखिलेश यादव, जो चुनाव आयोग पर लगातार एक के बाद एक गंभीर आरोप लगा रहे थे। यही वह पल था, जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे में बहस को गर्मा दिया और सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा ‘Akhilesh Yadav SIR Debate Lok Sabha’।
अखिलेश यादव ने अपने भाषण की शुरुआत एक सीधी चुभन के साथ की उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का SIR डेटा सिर्फ तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि ‘जनमत को दिशा देने की कोशिश’ जैसा दिखता है। यह वही शैली है जिसमें सत्ता पर सवाल रखने वाली राजनीति वर्षों से अपनी पहचान बनाती आई है। लेकिन आज का हमला और तीखा था। श्वेता सिंह के स्टाइल में कहा जाए तो,’सवाल सिर्फ डेटा का नहीं है, सवाल भरोसे का है… और भरोसा चुनावी लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है।‘
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया कई राज्यों में पारदर्शी नहीं रही। BLOs की तैनाती, फॉर्म वितरण, और मतदाता सूची में सुधार की समयसीमा इन सब पर उन्होंने ऐसे सवाल उठाए जो सत्ता पक्ष को असहज कर गए। अखिलेश का एक वाक्य पूरे सदन में गूंजा ‘आप चुनाव सुधार नहीं कर रहे, आप सुधार के नाम पर लोकतंत्र को सीमित कर रहे हैं।‘
सत्ता पक्ष तुरंत खड़ा हो गया। भारी शोर, तीखी आपत्तियां, और अध्यक्ष को बार-बार माइक बंद करवाना पड़ा। लेकिन अखिलेश अपनी बात पूरी दृढ़ता से रखते रहे यही ‘डिटरमिनेशन टोन’ उन्हें सदन में सबसे अलग बनाता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि SIR के दौरान हजारों मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टमेटिक पैटर्न’ है, जिसका राजनीतिक असर साफ दिखता है। पूरे भाषण में वह सिर्फ तथ्य नहीं रख रहे थे, बल्कि एक कहानी सुना रहे थे लोकतंत्र की कहानी, जिसे उन्होंने बार-बार खतरे में बताया।
सत्ता पक्ष ने उनके तर्कों को ‘भ्रम फैलाने वाला” बताया। जवाब में अखिलेश ने कहा कि यदि सरकार और आयोग इतने आश्वस्त हैं, तो SIR की एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी जांच करवा लें। यह प्रस्ताव सत्ता पक्ष को और अखर गया और हंगामा फिर तेज हो गया। लेकिन बहस का सबसे निर्णायक क्षण वह था जब अखिलेश ने कहा, ‘भारत चुनाव प्रक्रिया पर दुनिया भरोसा करती है… लेकिन SIR की ये विसंगतियां उस भरोसे पर धब्बा हैं।‘
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यही लाइन सदन से बाहर खड़े मीडिया कैमरों और रिपोर्टरों के लिए सबसे बड़ा “हाइलाइट” बन गई। आज की इस गरमा-गरम बहस ने यह तो साफ कर दिया कि Special Intensive Revision सिर्फ एक तकनीकी इलेक्टोरल प्रक्रिया नहीं यह 2026 की राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुद्दा बन चुका है। और इस पूरी बहस का केंद्र रहा. ‘Akhilesh Yadav SIR Debate Lok Sabha , जिसने चुनाव सुधारों की बहस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
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