Fugitive Extradition India: भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर यह दोहराया है कि देश से फरार और कानून द्वारा वांछित आरोपियों को वापस लाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार सक्रिय प्रयास कर रहा है। उनका कहना था कि प्रत्यर्पण और वापसी की प्रक्रिया जटिल जरूर है, लेकिन भारत की इच्छाशक्ति मजबूत है और प्रयास निरंतर जारी हैं।
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रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत कई देशों के साथ इस विषय पर नियमित बातचीत कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिन देशों में भारतीय कानून से भागे हुए आरोपी शरण लिए हुए हैं, वहां की सरकारों और कानूनी संस्थाओं से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में द्विपक्षीय समझौते, अंतरराष्ट्रीय संधियां और स्थानीय अदालतों के आदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हर मामला अलग होता है और हर केस में कानूनी प्रक्रियाएं देश-विशेष के कानूनों के अनुसार चलती हैं।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण केवल राजनीतिक इच्छा का मामला नहीं होता, बल्कि इसमें न्यायिक समीक्षा, मानवाधिकार पहलू और संबंधित देशों के घरेलू कानूनों का भी ध्यान रखा जाता है। कई बार आरोपी विदेशी अदालतों में शरण याचिका या अन्य कानूनी उपाय अपनाते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। इसके बावजूद भारत सरकार पीछे हटने वाली नहीं है और हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
MEA प्रवक्ता ने कहा कि भारत का यह संदेश पूरी दुनिया के लिए साफ है कि आर्थिक अपराध, आतंकवाद या अन्य गंभीर अपराध करके देश से भागने वालों को अब सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलेगा। सरकार की प्राथमिकता है कि ऐसे लोग भारतीय कानून का सामना करें और पीड़ितों को न्याय मिले। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हाल के वर्षों में भारत ने कई मामलों में सफलता हासिल की है और कुछ भगोड़ों को वापस लाने में कामयाबी मिली है, जो इस नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाता है। मजबूत द्विपक्षीय संबंध, आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग के चलते कई देश भारत की बात को गंभीरता से ले रहे हैं। इसके साथ ही इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस और अन्य अंतरराष्ट्रीय तंत्रों का उपयोग भी तेज़ी से किया जा रहा है।
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रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियां मिलकर एक समन्वित रणनीति के तहत काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी प्रक्रियाओं में कोई ढील न रहे और हर संभव कूटनीतिक और कानूनी विकल्प का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में इस दिशा में और ठोस नतीजे सामने आएंगे।
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कुल मिलाकर, MEA का यह बयान भारत की उस नीति को रेखांकित करता है जिसमें कानून के सामने सभी को जवाबदेह ठहराने का संकल्प झलकता है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भगोड़े आरोपी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिपे हों, उन्हें वापस लाने की कोशिशें रुकने वाली नहीं हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा भारत की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।
