MSME Niryat Protsahan Trade Finance Mission: केंद्र सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission) के शुरुआती चरण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के निर्यात को मजबूती देने के लिए निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Protsahan) उप-योजना के तहत दो महत्वपूर्ण हस्तक्षेप शुरू किए हैं। शुक्रवार को जारी बयान में वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य MSME निर्यातकों को सस्ती और सुगम ट्रेड फाइनेंस उपलब्ध कराना, कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करना और बैंक ऋण तक उनकी पहुंच बढ़ाना है।
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पहला हस्तक्षेप: प्री और पोस्ट-शिपमेंट निर्यात ऋण पर ब्याज सब्सिडी
पहली पहल प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट निर्यात ऋण पर ब्याज सब्सिडी से जुड़ी है। इसका मकसद निर्यात ऋण की लागत को कम करना और MSME निर्यातकों पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव को घटाना है। इस योजना के तहत पात्र ऋणदात्री संस्थानों द्वारा दिए गए रुपये आधारित निर्यात ऋण पर 2.75 प्रतिशत की बेस ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।
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इसके अलावा, सरकार ने कम प्रतिनिधित्व वाले या उभरते बाजारों में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है, जो परिचालन तैयारी के अधीन होगा। यह सब्सिडी केवल उन उत्पादों पर लागू होगी जो HS (Harmonised System) छह-अंकीय स्तर की अधिसूचित ‘पॉजिटिव लिस्ट’ में शामिल हैं। यह सूची भारत की लगभग 75 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती है और इसमें MSME की मजबूत भागीदारी वाले उत्पादों को प्राथमिकता दी गई है।
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सरकार ने FY 2025–26 के लिए प्रति निर्यातक 50 लाख रुपये की वार्षिक सीमा तय की है। ब्याज सब्सिडी की दरों की साल में दो बार (मार्च और सितंबर) समीक्षा की जाएगी, जिसमें घरेलू और वैश्विक बेंचमार्क को ध्यान में रखा जाएगा। इस पहल के लिए विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए जाएंगे। योजना को पहले पायलट आधार पर लागू किया जाएगा, ताकि फीडबैक के आधार पर इसमें आवश्यक सुधार किए जा सकें।
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डेटा-आधारित पॉजिटिव लिस्ट
पॉजिटिव लिस्ट को पारदर्शी और डेटा-आधारित पद्धति से तैयार किया गया है। इसमें श्रम-प्रधान और पूंजी-प्रधान क्षेत्रों, MSME की एकाग्रता और मूल्य संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। प्रतिबंधित या निषिद्ध वस्तुएं, कचरा और स्क्रैप, तथा अन्य प्रोत्साहन योजनाओं में शामिल उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। हालांकि, रक्षा और SCOMET अधिसूचित उत्पादों को रणनीतिक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शामिल किया गया है।
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दूसरा हस्तक्षेप: निर्यात ऋण के लिए कोलैटरल गारंटी
निर्यात प्रोत्साहन के तहत दूसरा अहम कदम निर्यात ऋण के लिए कोलैटरल सपोर्ट से जुड़ा है। इस पहल का उद्देश्य MSME निर्यातकों की बैंक ऋण तक पहुंच में आ रही बाधाओं को दूर करना है। इसके तहत CGTMSE के साथ साझेदारी में कोलैटरल गारंटी कवरेज प्रदान की जाएगी।
इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म और लघु निर्यातकों को 85 प्रतिशत तक, जबकि मध्यम निर्यातकों को 65 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज मिलेगा। प्रति निर्यातक अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के बकाया ऋण को एक वित्त वर्ष में गारंटी के दायरे में लाया जाएगा। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा और वे निर्यात-उन्मुख MSME को अधिक सहजता से ऋण उपलब्ध करा सकेंगे। CGTMSE द्वारा इसके विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद इसे पायलट चरण में लागू किया जाएगा।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन का व्यापक लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन के जरिए निर्यात की लागत कम हो, वित्त तक पहुंच बढ़े, भारत के निर्यात ब्रांड को मजबूती मिले और नए बाजारों में विविधीकरण हो। यह मिशन MSME, पहली बार निर्यात करने वालों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देता है, ताकि भारतीय निर्यातक वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहराई से जुड़ सकें।
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गौरतलब है कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन को 12 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसके लिए FY 2025–26 से FY 2030–31 तक कुल 25,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह मिशन वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से लागू किया जा रहा है और इसमें दो उप-योजनाएं निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायता) और निर्यात दिशा (मार्केट एक्सेस, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स, नियमों का अनुपालन) शामिल हैं।
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