शुरुआती रुझानों ने बदला राजनीतिक नैरेटिव
Pune Municipal Corporation election: पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) चुनाव के शुरुआती ट्रेंड्स महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया सिग्नल दे रहे हैं। काउंटिंग के शुरुआती राउंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगभग 38 सीटों पर लीड करती नज़र आ रही है। यह ट्रेंड सिर्फ नंबर्स का खेल नहीं है, बाल्की पुणे की लोकल पॉलिटिक्स में पवार परिवार की पकड़ को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस बार चुनाव इसलिए भी खास रहा है क्योंकि अजित पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP ने साथ मिलकर PMC और PCMC में किस्मत आज़माई। फिर भी शुरुआती ट्रेंड्स यह बताते हैं कि वोट कंसोलिडेशन ग्राउंड पर उतनी मज़बूत नहीं दिख रही।
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पवार परिवार एक साथ, पर वोट एकजुट क्यों नहीं?
अजित पवार के BJP के साथ जाने के बाद NCP का ट्रेडिशनल वोट बेस बंट गया। इस चुनाव में दोनों पवार ग्रुप्स का साथ आना एक डैमेज कंट्रोल स्ट्रैटेजी के रूप में देखा गया। लेकिन पुणे के वार्ड-लेवल ट्रेंड्स ये सजेस्ट करते हैं कि वोटों का ट्रांसफर सीमलेस नहीं हुआ। अर्ली लीड्स के हिसाब से NCP सिर्फ 5 सीटों पर आगे है, जब कांग्रेस अभी तक खाता भी नहीं खोल पाई। ये सिग्नल करता है कि अर्बन वोटर डेवलपमेंट, गवर्नेंस और लीडरशिप क्लैरिटी को ज्यादा वेट दे रहा है।
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2017 से 2025: पीएमसी का राजनीतिक सफर
PMC और PCMC के पिछले चुनाव 2017 में हुए थे यानी करीब 8 साल का गैप। उस दौर में पुणे के मेयर मुरलीधर मोहोल थे, जो नवंबर 2019 तक इस पद पर रहे। इस लंबी गैप के बाद आए इस सिविक चुनाव को वोटर्स ने परफॉर्मेंस रिव्यू के तौर पर लिया। इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक, वाटर सप्लाई, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और IT हब पुणे के सिविक मुद्दों ने वोटिंग बिहेवियर को आकार दिया।
बीएमसी में भी बीजेपी सेना महायुति आगे
सिर्फ पुणे ही नहीं, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के शुरुआती ट्रेंड्स भी महाराष्ट्र के पॉलिटिकल बैलेंस को रीडिफाइन करते दिख रहे हैं। काउंटिंग के शुरुआती घंटों में BJP–शिवसेना महायुति लगभग 75 वार्ड्स में लीड करती नज़र आ रही है। इसमें BJP 49 सीटों पर और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) 26 सीटों पर आगे है।
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नंबर जो कहानी कहते हैं
शुरुआती डेटा के मुताबिक, BJP ने 135 वार्ड में चुनाव लड़ा और 36% स्ट्राइक रेट के साथ लीड बनाई। शिंदे की सेना ने 90 वार्ड में चुनाव लड़ते हुए 29% स्ट्राइक रेट दिखाया। दूसरी तरफ, शिवसेना (UBT) करीब 40 सीटों पर लीड करती दिख रही है, जबकी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) 8 सीटों पर आगे है। कांग्रेस के पास 7 लीड हैं और अजित पवार की NCP पार्टी 1 सीट पर।
ऑफिशियल ट्रेंड्स बनाम ग्राउंड बज़
BMC के ऑफिशियल चुनावी ऑफिस से आ रहे ट्रेंड्स थोड़े कंजर्वेटिव हैं। यहां BJP 9 वार्ड, शिवसेना 3, शिवसेना (UBT) 4, और AIMIM 2 वार्ड पर लीड कर रही है। ग्राउंड बज़ और ऑफिशियल नंबर्स के बीच का गैप यह बताता है कि काउंटिंग के साथ पिक्चर और क्लियर हो जाएगी।
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आरोप, खंडन और एसईसी का स्टैंड
चुनाव के दौरान शिवसेना (UBT) MNS गठबंधन ने गड़बड़ियों के आरोप लगाए। इन आरोपों को स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC) ने गलत बताया। सिविक चुनाव में ट्रांसपेरेंसी और प्रोसेस पर सवाल उठना नया नहीं, लेकिन SEC का क्लियर स्टैंड नतीजों को लेजिटिमेसी देता है।
BJP lead PMC: 8 साल बाद चुनाव, 4 साल बाद मेयर
मुंबई के लिए ये चुनाव एक ऐतिहासिक सिविक रीसेट है। पिछला BMC चुनाव 2017 में हुआ था और आखिरी चुनी हुई मेयर किशोरी पेडनेकर का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म हुआ। अब, लगभग 4 साल बाद, मुंबई को नया मेयर मिलने जा रहा है जो सिटी गवर्नेंस के लिए महत्वपूर्ण होगा।
BJP lead PMC: वोटर टर्नआउट, नंबरों में लोकतंत्र
टोटल 1,03,44,315 वोटर्स में से 54,76,043 ने वोट डाला। जेंडर के हिसाब से देखें तो 29,23,433 पुरुष, 25,52,359 महिलाएं, और 251 ट्रांसजेंडर वोटर्स ने अपना अधिकार बताया। यह डेटा अर्बन सिविक पार्टिसिपेशन का एक बैलेंस्ड स्नैपशॉट देता है।
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2017 का फ्लैशबैक, कौन कहां था?
2017 में अविभाजित शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जबकी BJP के साथ मिलकर गठबंधन ने 114 सीटों का बहुमत पार किया था। BJP ने तब 82 सीटें जीती थीं। उस समय BJP 15 नगर निगमों पर रूलिंग पार्टी थी, जबकी शिवसेना मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली जैसे शहरों में आगे थी। PMC और BMC के शुरुआती ट्रेंड्स एक बात साफ करते हैं। शहरी महाराष्ट्र में वोटर का मूड प्रैक्टिकल हो रहा है। फैमिली लेगेसी से ज्यादा डिलीवरी, अलायंस क्लैरिटी और गवर्नेंस नैरेटिव मैटर कर रहा है। अगर फाइनल रिजल्ट्स भी इसी दिशा में जाते हैं, तो यह सिर्फ सिविक जीत नहीं होगी, बाल्की 2029 के स्टेट और नेशनल बैटल्स के लिए एक मजबूत पॉलिटिकल इंडिकेटर होगा।
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शहरी महाराष्ट्र का मूड
PMC और BMC के शुरुआती ट्रेंड्स एक बात साफ करते हैं। शहरी महाराष्ट्र में वोटर का मूड प्रैक्टिकल हो रहा है। फैमिली लेगेसी से ज्यादा डिलीवरी, अलायंस क्लैरिटी और गवर्नेंस नैरेटिव मैटर कर रहा है। अगर फाइनल रिजल्ट्स भी इसी दिशा में जाते हैं, तो यह सिर्फ सिविक जीत नहीं होगी, बाल्की 2029 के स्टेट और नेशनल बैटल्स के लिए एक मजबूत पॉलिटिकल इंडिकेटर होगा।
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