Somnath Swabhimaan Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शौर्य यात्रा में शामिल होकर जो भाव व्यक्त किए, वो सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं थे, बाल्की भारत की आत्मा से निकली हुई आवाज़ थी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए अत्यंत गौरव का विषय है, क्योंकि यह यात्रा उन अनंत वीर संतानों की याद दिलाती है जिन्होंने सोमनाथ मंदिर और भारत की अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह शब्द देश के हर नागरिक के मन में गर्व, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का नया जोश भर देते हैं।
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सोमनाथ और भारत का स्वाभिमान
सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का प्रतीक है। इतिहास के कई दौर देखें, आक्रमण सहे, तोड़-फोड़ झेली, लेकिन सोमनाथ का अस्तित्व कभी मिटा नहीं। हर बार जैसे ही इस पवित्र स्थल को नुकसान पहुंचाया गया, भारत की चेतना ने इसे और मजबूती से पुन: खड़ा कर दिया। इसी के लिए जब सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजन होते हैं, तो वो सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहते, बाल्की राष्ट्रीय स्मृति और राष्ट्रीय संकल्प का उत्सव बन जाते हैं।
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शौर्य यात्रा का मतलब
शौर्य यात्रा का मतलब सिर्फ कदम बढ़ाना नहीं होता, बाल्की अपने इतिहास के साथ चलना होता है। इस यात्रा में शामिल हर व्यक्ति उन वीरों के पदों पर चलता है जिन्होंने धर्म, संस्कृति और देश के लिए बलिदान दिया। PM मोदी का यह कहना कि उन वीर संतानों का आदमी साहस और पराक्रम देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा, एक गहरा संदेश देता है—कि राष्ट्र तभी मजबूत होता है जब वो अपने वीरों को याद रखता है।
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वीर संतानों को श्रद्धांजलि
भारत की धरती हमेशा से वीरों की जन्मभूमि रही है। माँ भारती की उन संतानों ने अपने जीवन देश पर कुर्बान करके यह सिखाया कि राष्ट्रभक्ति सिर्फ शब्दों का विषय नहीं, बल्कि कर्म का मार्ग है। सोमनाथ मंदिर की रक्षा में बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करना, असल में अपने अस्तित्व को नमन करना है। यह श्रद्धांजलि आज की पीढ़ी को यह याद दिलाती है कि जो आज़ादी, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान हमें मिली है, वो किसी एक दिन का परिणाम नहीं है।
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आज की पीढ़ी के लिए संदेश
आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ कदम बढ़ा रहा है, तब ऐसे संदेश और भी ज़रूरी हो जाते हैं। PM मोदी का यह संदेश सिर्फ़ इतिहास को याद करने तक सीमित नहीं है, बाल्की भविष्य की तैयारी का आह्वान है। जब युवा पीढ़ी सोमनाथ जैसी जगह और उनसे जुड़ी कहानियों को जानती है, तो उनके मन में राष्ट्र के लिए ज़िम्मेदारी का भाव पैदा होता है। यह ही राष्ट्र निर्माण की असली नीव है।
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स्वाभिमान से विकास तक
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यह भी दिखाता है कि स्वाभिमान और विकास एक दूसरे के विरोधी नहीं, बाल्की सहयोगी हैं। जब राष्ट्र अपनी जड़ों पर गर्व करता है, तब भी वह विश्व मंच पर मजबूत पहचान बनाता है। भारत आज आत्मनिर्भर, तकनीकी और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, और इस सफर में अपनी सांस्कृतिक विरासत से शक्ति लेता है।
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एक प्रेरक संदेश हैं
PM मोदी के शब्द सोमनाथ से सिर्फ गुजरात या किसी एक क्षेत्र के लिए नहीं, बाल्की पूरे देश के लिए एक प्रेरक संदेश हैं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और शौर्य यात्रा हमें याद दिलाती है कि भारत का इतिहास सिर्फ किताब के पन्ने नहीं, बाल्की जीवंत प्रेरणा है। मां भारती के वीर संतानों का आदमी साहस और पराक्रम हमें हर युग में राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य याद दिलाता रहेगा। यह स्वाभिमान है, यह स्मृति है और यह संकल्प है कि भारत को आगे बढ़ता रहेगा।
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