Sudhanshu Trivedi attacks Mamata: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर ममता बनर्जी का रुख समय-समय पर बदलता रहा है। त्रिवेदी ने दावा किया कि 2005 में ममता बनर्जी घुसपैठियों के खिलाफ थीं, लेकिन अब वे उनके समर्थन में खड़ी दिखाई देती हैं।
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सुधांशु त्रिवेदी के बयान का राजनीतिक संदर्भ समझना आवश्यक है। बंगाल की राजनीति में घुसपैठ का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। बीजेपी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि टीएमसी इस मुद्दे पर वोट-बैंक की राजनीति करती है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को खारिज करते हुए मानवता और संवैधानिक अधिकारों की दुहाई देती है।
त्रिवेदी ने कहा कि ‘2005 में ममता बनर्जी ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि घुसपैठियों के कारण बंगाल के संसाधनों पर दबाव पड़ रहा है, लेकिन आज वही ममता सरकार घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है। टीएमसी बताए कि ममता दीदी तब सही थीं या अब सही हैं।‘
इस बयान के माध्यम से बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि टीएमसी का रुख राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। बीजेपी इसके जरिए बंगाल में हिंदू वोटों को साधना चाहती है और राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को चुनावी विमर्श का हिस्सा बना रही है।
उधर टीएमसी का रुख इस मामले पर बिल्कुल अलग है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी सांप्रदायिकता और बहुसंख्यक भावना को भड़काकर राजनीति करना चाहती है। ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि वे सभी समुदायों के अधिकारों का सम्मान करती हैं और भाजपा बंगाल की सामाजिक संरचना को तोड़ना चाहती है।
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बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भारत-बांग्लादेश सीमा के राज्यों में हमेशा से चर्चा का विषय रहा है, जिसमें असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं। असम में NRC और CAA जैसे मुद्दे पहले भी इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक रूप से गर्म कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले चुनावों से पहले इस तरह के बयान बंगाल की जनता के बीच ध्रुवीकरण बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देना चाहती है, जबकि टीएमसी सामाजिक समावेशन और सेक्युलर राजनीति पर।
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कुल मिलाकर सुधांशु त्रिवेदी का यह हमला सिर्फ बयान भर नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक जंग में आने वाले दिनों की तीखी टकराहट का संकेत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विषय पर टीएमसी (TMC) क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है और बंगाल की जनता इस बयानबाज़ी को कैसे समझती है।
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