AI Jobs Impact in India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नौकरी जाने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन भारत के संदर्भ में तस्वीर कुछ अलग है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस कृष्णन ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में एआई से दफ्तरी और ज्ञान-आधारित नौकरियों पर जोखिम अपेक्षाकृत कम है। इसके पीछे भारत के श्रम बाजार की संरचना, STEM आधारित रोजगारों का वर्चस्व और मानव-केंद्रित कार्यों की बड़ी भूमिका प्रमुख कारण हैं।
READ MORE: श्रीहरिकोटा से ISRO का बड़ा मिशन, LVM3-M6 के जरिए BlueBird Block-2 सैटेलाइट होगा लॉन्च

भारत में एआई क्यों कम खतरा, ज्यादा अवसर
आईटी सचिव के अनुसार, भारत में कुल कार्यबल में दफ्तर वाली नौकरियों की हिस्सेदारी पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। जहां विकसित देशों में बड़ी संख्या में कर्मचारी विशुद्ध रूप से ज्ञान-आधारित, प्रशासनिक या डेस्क जॉब्स पर निर्भर हैं, वहीं भारत में इंजीनियरिंग, तकनीकी, सेवा और फील्ड आधारित नौकरियों का अनुपात अधिक है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत में एआई का असर जॉब रिप्लेसमेंट से ज्यादा “जॉब ऑगमेंटेशन” के रूप में देखने को मिलेगा।
READ MORE: भारत-ओमान सीईपीए से निर्यात, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
एआई (AI) से बदलेंगे रोज़मर्रा के 6 काम
कंपनियों द्वारा किए गए हालिया डेमो में यह साफ हुआ है कि एआई आने वाले समय में कई रोज़मर्रा के कामों को आसान और तेज़ बनाएगा। इनमें प्रमुख हैं:
- ई-मेल और रिपोर्ट ड्राफ्टिंग
- डेटा एनालिसिस और प्रेज़ेंटेशन तैयार करना
- कस्टमर सपोर्ट में चैटबॉट और वॉयस असिस्टेंट
- मीटिंग शेड्यूलिंग और नोट्स तैयार करना
- कोडिंग में सहायक टूल्स के जरिए समय की बचत
- HR और रिक्रूटमेंट में रिज़्यूमे शॉर्टलिस्टिंग
हालांकि, सचिव ने स्पष्ट किया कि इन बदलावों का मतलब यह नहीं है कि इंसानी कामगारों की जरूरत खत्म हो जाएगी।
READ MORE: हरित विकास की रफ्तार, Electric Vehicles in India कैसे बदल रहे हैं परिवहन और रोजगार का स्वरूप
‘एआई इंसान की जगह नहीं, क्षमता बढ़ाने का औजार’
एस कृष्णन ने कहा कि एआई ऐसी पहली तकनीक है जो संज्ञानात्मक यानी दिमाग से किए जाने वाले कार्यों को प्रभावित कर सकती है। इससे पहले की औद्योगिक क्रांतियों में मशीनों ने मुख्य रूप से शारीरिक श्रम की जगह ली थी। उनका मानना है कि एआई का वास्तविक प्रभाव मानव क्षमताओं को बढ़ाने में होगा, जिससे विश्लेषण, निर्णय और रचनात्मकता से जुड़े काम और अधिक कुशल बनेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम इतनी जल्दी उस स्थिति में नहीं पहुंचेंगे जहां इंसानी श्रमिकों की जरूरत ही खत्म हो जाए।‘
READ MORE: इंटरस्टेलर धूमकेतु पर भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, सौरमंडल के रहस्यों से उठा पर्दा
हैलुसिनेशन और मानवीय निगरानी की जरूरत
आईटी सचिव ने एआई से जुड़ी एक बड़ी चुनौती पर भी ध्यान दिलाया गलत या भ्रामक जानकारी, जिसे तकनीकी भाषा में ‘हैलुसिनेशन’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री की जांच, सत्यापन और निगरानी के लिए लंबे समय तक मानवीय हस्तक्षेप जरूरी रहेगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि एआई मानव को पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।
रोजगार सृजन की असली संभावना कहां ?
कृष्णन के अनुसार, एआई सिस्टम को चलाने के लिए जरूरी बड़े मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भले ही पूंजी-प्रधान हों, लेकिन असली रोजगार सृजन सेक्टर-स्पेसिफिक और यूज़-केस आधारित एआई एप्लिकेशन के विकास में होगा। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की स्थिति में है चाहे वह हेल्थकेयर हो, एजुकेशन, एग्रीटेक या गवर्नेंस।
READ MORE: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि, एआई मॉडल ने खोला एच5एन1 वायरस के इंसानों पर अटैक का रहस्य
स्वदेशी एआई मॉडल और भारत की तैयारी ?
आईटी (IT) सचिव ने यह भी जानकारी दी कि सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा स्वदेशी एआई (AI) एप्लिकेशन मॉडल अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित एआई शिखर सम्मेलन से पहले तैयार होने की उम्मीद है। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
