Adampur Airport renamed Shri Guru Ravidas Maharaj: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास जयंती के अवसर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। पंजाब स्थित आदमपुर एयरपोर्ट का नाम अब श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर रखा जाएगा। यह फैसला सामाजिक समानता, करुणा और सेवा के उनके शाश्वत संदेश को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार के अनुसार, यह निर्णय देश की समावेशी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने की दिशा में एक अहम कदम है।
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संत रविदास जयंती पर ऐतिहासिक घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह देश के लिए सौभाग्य और गौरव की बात है कि संत रविदास जयंती जैसे पावन अवसर पर यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि आदमपुर एयरपोर्ट को ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी’ एयरपोर्ट के रूप में जाना जाना, केवल नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों और मूल्यों के प्रति राष्ट्र की विनम्र श्रद्धांजलि है।

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खास बात यह है कि यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब सरकार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है।
गुरु रविदास के आदर्श और उनका सामाजिक संदेश (Adampur Airport renamed)
श्री गुरु रविदास महाराज को भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में गिना जाता है। समानता, करुणा और सेवा का उनका संदेश सदियों से समाज को प्रेरित करता रहा है। उन्होंने जाति, भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई और एक ऐसे समाज की कल्पना की, जहां सभी को समान सम्मान मिले।
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इसी क्रम में, प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे। उनका जीवन हमें मानवता, सह-अस्तित्व और सामाजिक न्याय का मार्ग दिखाता है।
आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व (Adampur Airport renamed)
आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे एक सकारात्मक संदेश छिपा है देश की विविध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान देना।
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वहीं दूसरी ओर, यह फैसला उन वर्गों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से सामाजिक प्रतिनिधित्व और सम्मान की मांग करते रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह के निर्णय समाज में सकारात्मक सोच और समावेशी भावना को बढ़ावा देते हैं।
सरकार की नीति विरासत और आधुनिकता का संतुलन
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने कई सार्वजनिक स्थलों, संस्थानों और बुनियादी ढांचे को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के नाम समर्पित किया है। इसके अलावा, उद्देश्य यह भी रहा है कि नई पीढ़ी देश की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत से जुड़े। हालांकि, कुछ आलोचनात्मक स्वर भी सामने आते हैं, जो ऐसे फैसलों को प्रतीकात्मक बताते हैं। लेकिन सरकार का तर्क है कि प्रतीक भी समाज को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर तब जब वे सकारात्मक मूल्यों से जुड़े हों।
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सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर संतुलित दृष्टि (Adampur Airport renamed)
सकारात्मक पहलू
- सामाजिक समरसता और सम्मान का संदेश
- संत रविदास के विचारों को राष्ट्रीय मंच
- सांस्कृतिक पहचान को मजबूती
संभावित आलोचनाएं (Adampur Airport renamed)
- कुछ वर्ग इसे प्राथमिक मुद्दों से ध्यान हटाने वाला कदम मान सकते हैं
- विकास और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस की मांग
इसके बावजूद, नीति विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक सम्मान और विकास, दोनों एक साथ चल सकते हैं। साथ ही, यह निर्णय आने वाले समय में अन्य राज्यों और क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। सरकार का संकेत है कि देश की विविध परंपराओं और संतों के योगदान को इसी तरह सम्मान दिया जाता रहेगा।
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अंतत:, आदमपुर एयरपोर्ट का नाम ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी’ एयरपोर्ट रखा जाना, एक ऐसा कदम है जो आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक भारत के बीच सेतु बनाने का प्रयास करता है।
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