Ayodhya BJP Councillor Controversy: उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। नगर विकास विभाग द्वारा जारी नामित पार्षदों की सूची में एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल कर दिया गया, जिसकी पांच महीने पहले ही मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद Ayodhya BJP Councillor Controversy चर्चा का विषय बन गई है।
बताया जा रहा है कि खिरौनी नगर पंचायत से भाजपा कार्यकर्ता राजवंश पासी को पार्षद के रूप में नामित किया गया, जबकि उनका निधन नवंबर 2025 में हो चुका था। सूची सामने आने के बाद परिवार और स्थानीय लोग हैरान रह गए।
लिस्ट में नाम देख चौंका परिवार
जब नामित पार्षदों की सूची सार्वजनिक हुई और उसमें राजवंश पासी का नाम सामने आया, तो उनके परिवार के लोग भी हैरान रह गए।
Ayodhya BJP Councillor Controversy के बीच मृतक के भाई पवन कुमार ने बताया कि राजवंश पासी को 9 नवंबर 2025 को ब्रेन स्ट्रोक आया था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ ले जाया गया, जहां 23 नवंबर को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार का सवाल है कि जब उनकी मृत्यु को पांच महीने हो चुके हैं, तो उनका नाम इस सूची में कैसे शामिल किया गया।
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सोशल मीडिया पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी सवालों की बाढ़ आ गई है। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया, तो कुछ ने इसे पुरानी सूची जारी करने की गलती करार दिया।
Ayodhya BJP Councillor Controversy के चलते लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी के पास अपने कार्यकर्ताओं की अद्यतन जानकारी नहीं है। कुछ यूजर्स ने यह तक कहा कि यदि सूची अपडेट नहीं की गई, तो यह गंभीर चूक है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं।
BJP जिलाध्यक्ष ने बताया मानवीय भूल
इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के अयोध्या जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने इसे एक मानवीय भूल बताया है।
उन्होंने कहा कि Ayodhya BJP Councillor Controversy को अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है। पार्टी के पास अपने कार्यकर्ताओं की पूरी जानकारी रहती है और राजवंश पासी पार्टी के एक सक्रिय और सम्मानित कार्यकर्ता थे।
त्यागी ने यह भी बताया कि उनके निधन के बाद पार्टी के कई कार्यकर्ता और स्थानीय विधायक उनके घर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस त्रुटि को जल्द ही सुधार लिया जाएगा।
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दूसरी नामांकन पर भी उठे सवाल
इस सूची में एक और नाम को लेकर भी चर्चा हो रही है। मंजू निषाद, जो भदरसा के भारत कुंड नगर पंचायत में सहायक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, उन्हें भी पार्षद के रूप में नामित किया गया है।
मंजू निषाद एक चर्चित मामले में पीड़िता की ओर से मुख्य पैरवीकार भी हैं, जिसके कारण उनके नामांकन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। Ayodhya BJP Councillor Controversy के चलते यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
तीन साल बाद जारी हुई सूची
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मई 2023 में नगर निकाय चुनाव हुए थे, लेकिन नामित पार्षदों की सूची अब जाकर जारी की गई है। लगभग तीन साल बाद प्रदेश के 761 नगर निकायों में कुल 2,802 पार्षदों को नामित किया गया है।
इसमें 17 नगर निगमों में 170 सदस्य, 200 नगर पालिका परिषदों में 1,000 सदस्य और 544 नगर पंचायतों में 1,632 सदस्यों को नामित किया गया है।
Ayodhya BJP Councillor Controversy ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक लापरवाही या तकनीकी गलती?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही या डेटा अपडेट न होने की वजह से हो सकता है।
Ayodhya BJP Councillor Controversy यह दर्शाता है कि सरकारी प्रक्रियाओं में डेटा की सटीकता और समय-समय पर अपडेट होना कितना जरूरी है। यदि समय रहते जानकारी अपडेट नहीं की जाती, तो इस तरह की गलतियां सामने आ सकती हैं, जिससे सरकार और प्रशासन की छवि प्रभावित होती है।
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राजनीतिक हलचल तेज
इस घटना के बाद अयोध्या के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध सकते हैं।
Ayodhya BJP Councillor Controversy ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छोटी सी चूक भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस गलती को कैसे सुधारता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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