Adhokshajanand Dev Tirth: माघ मेले के दौरान कल्पवास पूर्ण करने के बाद मीडिया से बातचीत में गोवर्धन पूरी पीठ के स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ ने ज्योतिष पीठ से जुड़े विवाद पर स्पष्ट और कड़ा रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक किसी को भी ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य मानना उचित नहीं है।
Adhokshajanand Dev Tirth का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज यौन शोषण के मामले को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज है। स्वामी अधोक्षजानंद (Adhokshajanand Dev Tirth) ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी
स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ (Adhokshajanand Dev Tirth) ने कहा कि किसी भी संत या धार्मिक पदाधिकारी पर लगे आरोप बेहद गंभीर होते हैं। ऐसे मामलों में भावनाओं के बजाय कानून का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, तब तक किसी दावे को अंतिम सत्य मान लेना उचित नहीं है। न्यायालय ही इस विषय में अंतिम प्राधिकरण है।’
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उन्होंने यह भी जोड़ा कि धार्मिक पदों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी विवाद के बीच जल्दबाजी में निर्णय लेना न तो परंपराओं के अनुरूप है और न ही न्यायसंगत।

संतों की छवि पर पड़ता है असर
अपने वक्तव्य में Adhokshajanand Dev Tirth ने इस बात पर भी चिंता जताई कि साधु-संतों पर लगे आरोपों से व्यापक समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। भगवाधारी संतों की छवि समाज में श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक रही है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद आवश्यक है, ताकि सत्य सामने आए और अनावश्यक अटकलों पर विराम लगे।
उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष की प्रतिष्ठा प्रभावित न हो और यदि आरोप सिद्ध हों तो उचित कार्रवाई भी हो सके।
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धार्मिक हलकों में बढ़ी चर्चा
प्रयागराज में दिए गए इस बयान को कई लोग ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में अहम मान रहे हैं। इसे कुछ लोग स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के रूप में मान्यता देने से परोक्ष रूप से इंकार के रूप में भी देख रहे हैं।
धार्मिक संगठनों और अखाड़ों के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। हालांकि स्वामी अधोक्षजानंद (Adhokshajanand Dev Tirth) ने अपने बयान में किसी व्यक्तिगत टिप्पणी से परहेज करते हुए केवल न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताने की बात कही।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी अपनी राय रखी। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन पर उन्होंने शुभकामनाएं दीं और वहां रहने वाले हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान दे। सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ शासन चलाना ही स्थायी शांति और विकास का आधार है।
तारिक रहमान के नेतृत्व में बनी नई सरकार से Adhokshajanand Dev Tirth ने उम्मीद जताई कि वह सभी समुदायों का विश्वास जीतने का प्रयास करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वहां का हिंदू समाज भी सकारात्मक भूमिका निभाएगा और सरकार का सहयोग करेगा।
शेख हसीना की वापसी पर टिप्पणी
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने के प्रश्न पर Adhokshajanand Dev Tirth ने स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक विषय है। इस पर निर्णय संबंधित देशों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को करना चाहिए। धार्मिक मंच से इस पर कोई ठोस टिप्पणी करना उचित नहीं है।
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नजरें अब अदालत के फैसले पर
प्रयागराज से आया यह बयान धार्मिक, कानूनी और अंतरराष्ट्रीय तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। ज्योतिष पीठ से जुड़े विवाद की दिशा अब पूरी तरह अदालत के फैसले पर निर्भर है।
जब तक न्यायालय अपना अंतिम निर्णय नहीं सुनाता, तब तक इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल धार्मिक जगत और आम श्रद्धालु न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जो आगे की स्थिति स्पष्ट करेगा।
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