Uttar Pradesh Constitution Day: लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में संविधान दिवस के व्यापक अर्थों पर गंभीर और सार्थक चर्चा देखने को मिली। कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि संविधान केवल मौलिक अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के लिए मूल कर्तव्यों का भी स्पष्ट निर्देश देता है। उत्तर प्रदेश ने इसी भावना के साथ न केवल संविधान दिवस मनाया, बल्कि विधानसभा और विधान परिषद के भीतर मूल कर्तव्यों पर निरंतर संवाद को भी अपनी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा बनाया।

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मौलिक अधिकारों के साथ मूल कर्तव्यों पर ज़ोर
संविधान दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि नागरिक केवल अधिकारों की बात करें और कर्तव्यों की अनदेखी करें, तो लोकतंत्र का संतुलन बिगड़ता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में समय समय पर मूल कर्तव्यों को चर्चा का विषय बनाकर यह संदेश दिया गया कि संविधान के प्रति सम्मान केवल शब्दों से नहीं, आचरण से भी झलकना चाहिए।
नागरिकों से अपेक्षा की गई कि वे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, सामाजिक सौहार्द बनाए रखें और संविधान द्वारा स्थापित संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव रखें। यही भावना लोकतंत्र को मज़बूत बनाती है और शासन को अधिक उत्तरदायी बनाती है।
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पेपरलेस विधानसभा से पेपरलेस कैबिनेट तक
उत्तर प्रदेश ने तकनीक के उपयोग से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। पेपरलेस विधानसभा के सफल प्रयोग के बाद अब प्रदेश में पेपरलेस कैबिनेट और पेपरलेस बजट की व्यवस्था लागू हो चुकी है। इस पहल का उद्देश्य केवल काग़ज़ की बचत नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया को तेज़, सटीक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। डिजिटल माध्यम से विधायी कार्यवाही और कैबिनेट निर्णयों का रिकॉर्ड सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तुरंत उपलब्ध हो पाता है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ती है।
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संसद और विधानमंडलों के प्रति सम्मान की भावना
सम्मेलन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत की संसद दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है। उसके प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव हर भारतवासी का दायित्व है। यही सिद्धांत राज्यों के विधानमंडलों पर भी समान रूप से लागू होता है। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब जनप्रतिनिधि और नागरिक दोनों मर्यादा और अनुशासन का पालन करें। स्वस्थ बहस, असहमति का सम्मान और नियमों के तहत संवाद ये सभी तत्व लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखते हैं।
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न्याय, समता और बंधुता लोकतंत्र की आत्मा
संविधान के मूल सिद्धांत न्याय, समता और बंधुता पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इन्हें भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताया। न्याय का अर्थ केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय से भी जुड़ा है। समता सभी नागरिकों को समान अवसर देने की बात करती है, जबकि बंधुता समाज में आपसी विश्वास और एकता को मज़बूत करती है। उत्तर प्रदेश में इन मूल्यों को नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में उतारने की कोशिश लगातार की जा रही है। सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश गया कि संविधान के ये शब्द केवल प्रस्तावना में लिखे आदर्श नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाने योग्य सिद्धांत हैं।
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लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करने का संदेश
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के पुनः स्मरण का अवसर भी बना। उत्तर प्रदेश ने यह दिखाया कि परंपरा और तकनीक साथ-साथ चल सकती हैं जहां एक ओर संविधान के मूल आदर्शों पर ज़ोर है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक के ज़रिए शासन को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि संविधान दिवस मनाने का वास्तविक अर्थ तभी है जब हम अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से अपनाएँ। यही सोच लोकतंत्र को मजबूत करती है और देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाती है।
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