BHISM Event: देहरादून स्थित उत्तराखंड लोक भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल Gurmit Singh ने ‘BHISM’ (भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान मंच का लोगो और आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की गई। ‘भीष्म’ को एक रणनीतिक थिंक टैंक के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक विचार-विमर्श का सशक्त केंद्र बनाना है। BHISM Event में प्रशासनिक, सैन्य और शैक्षणिक जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
CDS जनरल अनिल चौहान ने रखे स्पष्ट विचार
BHISM Event के मुख्य आकर्षण रहे देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ Anil Chauhan, जिन्होंने ‘फ्रंटियर्स, बॉर्डर्स एंड एलएसी: द मिडिल सेक्टर’ विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी सीमाओं की बदलती परिस्थितियों, विशेषकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के मध्य सेक्टर में बढ़ती संवेदनशीलता पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सीमाओं की सुरक्षा बहुआयामी दृष्टिकोण की मांग करती है।
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सीमा सुरक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका
जनरल अनिल चौहान ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में केवल सैन्य बल की तैनाती पर्याप्त नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में मजबूत सड़क नेटवर्क, पुल, आधुनिक लॉजिस्टिक्स सिस्टम और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का विकास अत्यंत आवश्यक है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक जटिलता को देखते हुए तैयारी भी उसी स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता ध्यान भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिमालयी नजरिए से रणनीति निर्माण पर जोर
अपने संबोधन में CDS ने यह भी कहा कि हिमालय की पृष्ठभूमि में बैठकर तैयार की गई रणनीति अधिक व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टि वाली हो सकती है। जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, सैन्य आधुनिकीकरण और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों को हिमालयी दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। उनका मानना है कि पर्वतीय राज्यों की चुनौतियां मैदानी इलाकों से अलग होती हैं, इसलिए उनकी योजना और नीति निर्माण की प्रक्रिया भी विशिष्ट होनी चाहिए।
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उत्तराखंड का रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और रणनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य की दो अंतरराष्ट्रीय सीमाएं इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेष महत्व प्रदान करती हैं। गंगा और यमुना के उद्गम स्थल तथा केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धार्मिक धाम इस प्रदेश को विशिष्ट पहचान देते हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय की यह भूमि सदैव राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती रही है।

विशेषज्ञों की मजबूत टीम से सुसज्जित है ‘भीष्म’
BHISM Event की स्थापना अनुभवी सैन्य अधिकारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षाविदों के सहयोग से की गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड से जुड़े लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अजय कुमार सिंह इस पहल से सक्रिय रूप से जुड़े हैं। इसके अलावा कर्नल डॉ. गिरिजा शंकर मुंगली (सेवानिवृत्त), संजीव चोपड़ा (आईएएस, सेवानिवृत्त), प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, नितिन गोखले और राजन आर्य जैसे विशेषज्ञ मंच का हिस्सा हैं। इन सभी का विविध क्षेत्रों में अनुभव BHISM Event को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
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केंद्र सरकार को देगा रणनीतिक इनपुट
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड से जुड़े अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह मंच हिमालयी क्षेत्र से संबंधित रणनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव और विश्लेषण उपलब्ध कराएगा। देहरादून के शैक्षणिक संस्थानों और शोध संगठनों के साथ मिलकर यह मंच नीति निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त और कार्यरत अधिकारियों तथा नीति विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श का उभरता केंद्र बनेगा देहरादून
BHISM Event में मौजूद विशेषज्ञों और अतिथियों ने ‘भीष्म’ की स्थापना को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनका मानना है कि हिमालय की पृष्ठभूमि में स्थापित यह मंच आने वाले समय में नीतिगत विमर्श और रणनीतिक सोच का प्रमुख केंद्र बन सकता है। देहरादून को रणनीतिक अध्ययन और राष्ट्रीय सुरक्षा संवाद के हब के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक ठोस और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
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