CAG Report: उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आई CAG Report ने राज्य की कई परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष मार्च 2022 तक की जांच में करीब 186 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं।
इस CAG Report के सामने आने के बाद न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन बल्कि सरकारी धन के उपयोग, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्ट में कई परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी, अधूरे कार्यों के बावजूद भुगतान और योजनाओं के समय पर पूरा न होने जैसी गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है।
अधूरे कार्यों के बावजूद किया गया भुगतान
ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि कई परियोजनाओं में कार्य पूरा होने से पहले ही ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। CAG Report के अनुसार कुल 98 परियोजनाएं तय समय में पूरी नहीं हो सकीं, जबकि 31 परियोजनाओं का काम शुरू ही नहीं किया गया।
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इसके बावजूद करीब 3.89 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया, जिसे वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की व्यवस्था से सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं।
झील विकास योजनाओं में भी सामने आई कमियां
राज्य के पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी झील विकास योजनाओं को भी CAG Report में लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट के दौरान पाया गया कि भीमताल झील विकास परियोजना पर लगभग 71.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि नैनीताल झील विकास परियोजना पर करीब 50.33 करोड़ रुपये की लागत आई।
हालांकि इन परियोजनाओं के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। रिपोर्ट के अनुसार कई मामलों में गलत स्थान चयन, उचित योजना की कमी और धीमी कार्यप्रणाली के कारण परियोजनाएं अपेक्षित स्तर पर सफल नहीं हो पाईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जाता तो इन योजनाओं से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ मिल सकता था।
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प्रक्रिया का पालन किए बिना ठेकेदारों को भुगतान
CAG Report में यह भी सामने आया है कि कुछ परियोजनाओं में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। कई मामलों में कार्य की गुणवत्ता, समय सीमा और वास्तविक प्रगति का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।
इसका परिणाम यह हुआ कि कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और सरकारी धन का प्रभावी उपयोग भी नहीं हो सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय अनुशासन और परियोजना प्रबंधन की कमी के कारण योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया।
हरिद्वार कुंभ 2021 से जुड़ी परियोजनाओं पर भी सवाल
रिपोर्ट में हरिद्वार कुंभ 2021 से संबंधित विकास परियोजनाओं का भी जिक्र किया गया है। CAG Report के मुताबिक कुंभ से जुड़ी 13 परियोजनाओं के लिए करीब 36.99 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई थी।
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लेकिन इनमें से कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं और कुछ योजनाएं अधूरी ही रह गईं। इससे कुंभ मेले के लिए निर्धारित कई विकास कार्यों का पूरा लाभ नहीं मिल सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इन योजनाओं की निगरानी बेहतर तरीके से की जाती तो परिणाम अधिक प्रभावी हो सकते थे।
आपदा पुनर्निर्माण परियोजनाओं पर भी उठे सवाल
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आपदा प्रबंधन और पुनर्निर्माण परियोजनाएं बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। लेकिन CAG Report के अनुसार कुछ आपदा पुनर्निर्माण योजनाओं में भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।
ऑडिट के दौरान पाया गया कि कई परियोजनाओं में धन खर्च होने के बावजूद काम की गति धीमी रही। कुछ मामलों में खर्च का सही आकलन नहीं किया गया और निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रही।
रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और योजना निर्माण प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है।
पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
CAG Report में यह भी कहा गया है कि कई विभागों में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी तंत्र पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं रहा। परियोजनाओं के चयन, कार्यों के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दी।
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ऑडिट संस्था ने संबंधित विभागों को सलाह दी है कि भविष्य में योजनाओं के संचालन के दौरान वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने और परियोजनाओं की समय-समय पर समीक्षा करने की भी सिफारिश की गई है।
राज्य में शुरू हुई नई बहस
इस CAG Report के सामने आने के बाद उत्तराखंड में विकास योजनाओं के प्रबंधन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिपोर्ट में बताए गए सुझावों को गंभीरता से लागू किया जाता है तो भविष्य में योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।
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